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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Sitapur: Guru was decided by fate in 53 days, the journey from Mistry to minister, registered victory even after facing opposition from the party

योगी का एक ऐसा सहयोगी: 'गुरु' ने 53 दिनों में तय किया मिस्त्री से मंत्री बनने का सफर, पार्टी का विरोध झेलने के बाद भी दर्ज कराई जीत

Fri, 25 Mar 2022 09:37 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव श्रेष्ठ सक्सेना, अमर उजाला, सीतापुर
श्रेष्ठ सक्सेना, अमर उजाला, सीतापुर Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 25 Mar 2022 09:37 PM IST
सार

राकेश राठौर ने कुछ समय पहले स्कूटर रिपेयरिंग का काम छोड़ दिया था। लेकिन उनके छोटे भाई अतुल राठौर आज भी स्कूटर बनाने का काम करते हैं। उनकी दुकान बट्सगंज मोहल्ले में स्थित है।

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Sitapur: Guru was decided by fate in 53 days, the journey from Mistry to minister, registered victory even after facing opposition from the party
सीतापुर में दुर्गापुरवा स्थित मंत्री राकेश राठौर के आवास पर उनके बड़े भाई सतीश और अन्य लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीतापुर सदर विधानसभा से विधायक बने राकेश राठौर गुरु की किस्मत के सितारे इतने बुलंद रहे कि महज 53 दिनों के भीतर एक स्कूटर मिस्त्री से यूपी सरकार का मंत्री बनने का सफर तय कर लिया। जिले की राजनीति में शायद ही ऐसा कोई नेता रहा हो जिसकी किस्मत इतनी बुलंद रही हो। पार्टी का टिकट मिलने से लेकर मंत्री बनने तक राकेश राठौर गुरु ने जमकर संघर्ष भी किया। जिले में कई ऐसे दिग्गज नेता रहे। जिन्होनें अपने क्षेत्र में काफी विकास किया। लेकिन मंत्री पद की कुर्सी उनको नहीं मिली। हर बार उनका नाम तो चर्चाओं में रहे। लेकिन आखिर में किस्मत ने साथ नहीं दिया तो वह मंत्री नहीं बन सके।

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राकेश राठौर गुरु तब चर्चा में आए जब पार्टी ने एक फरवरी को टिकट देकर इन्हें अपना प्रत्याशी बनाया। 23 फरवरी को जिले में चुनाव होना था। सिर्फ 22 दिनों का कम समय था। इस पर भी उनको पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी झेलनी पड़ी। हद तो तब हो गई जब पार्टी के एक नेता निर्दलीय रूप से उन्हीं के खिलाफ खडे़ हो गए। चुनाव के नतीजे भी चौकानें वाले आए। हर राउंड में उठापटक के बाद बहुत की कम अंतर से राकेश राठौर गुरु ने चुनाव जीत लिया। उनके प्रतिद्वंदी महज 12 सौ वोटों से हार गए। जीत की खुशी तब दोगुनी हो गई। जब शुक्रवार को राकेश राठौर गुरु को मंत्री बनाया गया। मेहनत रंग लाई और मिस्त्री से मंत्री बनने का सफर गुरु ने सिर्फ 53 दिनों में तय कर लिया, जिसके लिए लोग सपने देखते हैं।
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मैकेनिक से मंत्री बने गुरु
राज्यमंत्री बनने वाले राकेश राठौर की कहानी फि ल्मी पटकथा से कम नहीं है। मिश्रिख के निवासी राकेश राठौर गुरू 40 साल पहले सीतापुर आए थे। यहां पर इन्होंने आरएमपी मोड़ के पास लकड़ी की गुमटी से स्कूटर मिस्त्री की शुरुआत की थी। करीब 10 साल तक स्कूटर बनाने के बाद इन्होंने शहर कोतवाली के पास बैटरी की दुकान खोली। स्कूटर बनाने के साथ बैटरी का कारोबार खूब चमका। वह अपने कारोबार को और चमकाने में लगे थे, कि इसी बीच 8 जनवरी को विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया। व्यवहार और सादगी के साथ किस्मत के धनी बैटरी वाले राकेश राठौर गुरू भाजपा से टिकट पाकर सदर सीट से चुनावी अखाड़े में उतरे और जीत कर सभी को चौंका दिया। अब एक बार मंत्री बनकर उन्होंने एक बार फिर सभी को चौंकाने का काम किया है।
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साथी बना मंत्री तो छलके खुशी के आंसू
पुराने साथी के मंत्री बनने की खबर आई तो बाइक मिस्त्री निसार की आंखों से आंसू छलक उठे। उन्होनें बताया कि करीब 10 साल पहले वह और गुरु एक साथ ही काम करते थे। दोनों की दुकानें अलग थी। लेकिन एक साथ ही उठना बैठना था। राकेश राठौर ने उस काम को छोड़ दिया। लेकिन रोटी गोदाम के निवासी निसार अभी भी बाइक रिपेयरिंग का काम करते हैं। शुक्रवार जैसे ही यह खबर सुनी तो वह खुश हो गए। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि काफी समय दोनों ने साथ काम किया, उनका साथी आज मंत्री बना है, तो उनको गर्व महसूस हो रहा है।

भाई अभी भी करते हैं स्कूटर की रिपेयरिंग
राकेश राठौर ने कुछ समय पहले स्कूटर रिपेयरिंग का काम छोड़ दिया था। लेकिन उनके छोटे भाई अतुल राठौर आज भी स्कूटर बनाने का काम करते हैं। उनकी दुकान बट्सगंज मोहल्ले में स्थित है। रोज वह स्कूटर की रिपेयरिंग कर अपनी आजीविका चलाते हैं। चुनाव के समय भी उनकी दुकान खुली रही। भाई के मंत्री बनने पर उन्होनें भी खुशी जाहिर की है।

बुनकर का बेटा और मैकेनिक भी बना मंत्री

योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल में जमीन से जुड़े लोगों को भी मंत्री बनने का मौका मिला है। योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल के मंत्रिमंडल में हर वर्ग के और हर जाति के लोगों का समावेश किया गया है। इसे प्रधानमंत्री के संदेश ‘सबका साथ सबका विकास’ की नजर से भी देखा जा रहा है।

मंत्रीमंडल में शामिल एक मात्र मुस्लिम चेहरा दानिश आजाद अंसारी के पिता बुनकर हैं। वह साड़ियां बुनते हैं। दानिश साधारण परिवार से आते हैं। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रह चुके हैं और लंबे समय से भाजपा में सक्रिय हैं। वह भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महामंत्री हैं। दानिश ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बलिया से और स्नातक लखनऊ से किया है। 

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