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जहरीली शराब कांड पर एसआईटी की रिपोर्ट : मिथाइल पीने से हुई थीं सहारनपुर और कुशीनगर में मौतें

Tue, 26 Mar 2019 11:16 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 26 Mar 2019 11:16 PM IST
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sit report on illicit liquor : drinking methyl is the cause of deaths in saharanpur and kusinagar
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर और कुशीनगर में गत फरवरी में हुए जहरीली शराब कांड की रिपोर्ट एसआईटी ने मंगलवार को शासन को सौंप दी। एसआईटी ने रिपोर्ट में मौत के कारण स्पष्ट रूप से बताए हैं। जानकारी के अनुसार इसमें सीमावर्ती राज्यों से आए मिथाइल केमिकल पीने से मौत की बात कही गई है। 
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एसआईटी में शामिल एडीजी रेलवे संजय सिंघल, कमिश्नर गोरखपुर अमित गुप्ता और कमिश्नर सहारनपुर चंद्र प्रकाश त्रिपाठी ने अपनी संयुक्त रिपोर्ट प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार को सौंप दी। हालांकि एसआईटी प्रमुख संजय सिंघल ने रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। वहीं प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि रिपोर्ट मिल गई है, फिलहाल उसका अध्ययन किया जा रहा है। 
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सहारनपुर के सूत्रों की मानें तो वहां उत्तराखंड से सटे जिलों में काफी समय से कच्ची शराब पीने का प्रचलन है। उत्तराखंड का भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र है। यूपी के सहारनपुर की सीमा से लगे हजारों मजदूर रोजाना काम करने के लिए भगवानपुर आते-जाते हैं। उत्तराखंड में कच्ची शराब कम दामों में मिलती है और दोनों राज्यों की सीमा के गांव बालूपुर और बिंदु खेड़ा में खुलेआम बिकती है। 
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वहां से आसपास के कई गांवों में भी कच्ची शराब की सप्लाई होती है। यहां कच्ची शराब तैयार करने के लिए इथाइल अल्कोहल (इथेनॉल) का प्रयोग किया जाता है। एक लीटर इथाइल में पानी मिलाकर कई लीटर कच्ची शराब बनाई जाती है। लहन से कच्ची शराब तैयार करने में अधिक समय लगता है और कम शराब तैयार हो पाती है। 

उत्तराखंड में औद्योगिक क्षेत्र होने के नाते यहां मिथाइल और इथाइल का भी प्रयोग काफी मात्रा में होता है। मिथाइल थिनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और इथाइल अल्कोहल के रूप में होता है। इथाइल और मिथाइल के रंग और रूप में कोई अंतर नहीं होता और इसकी पहचान कर पाना मुश्किल होता है। 

सूत्रों का कहना है कि घटना वाले दिन कच्ची शराब बनाने में इथाइल के स्थान पर मिथाइल का प्रयोग किया गया था, जिसे पीने से लगभग 80 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग प्रभावित हुए। इसका जिक्र रिपोर्ट में किया गया है। सहारनपुर में लगभग 22 गांव ऐसे थे, जहां लोगों की मौतें इस तरह की शराब पीने से हुईं। 

रिपोर्ट में एसआईटी ने पुलिस व आबकारी विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों को लापरवाही का दोषी माना है। इन पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। पुलिस की अब तक की जांच को एसआईटी ने सही ठहराया है। इस मामले में सहारनपुर में तीन एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनमें कच्ची शराब के कारोबार से जुड़े 30 लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें से आठ की मौत अवैध शराब पीने से पहले ही हो चुकी है।
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