{"_id":"5f85f09c38158619302b452f","slug":"sit-registers-fir-against-unit-incharge-of-rnn-ayodhyanchal","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरएनएन अयोध्यांचल के यूनिट इंचार्ज के खिलाफ एसआईटी ने दर्ज की एफआईआर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरएनएन अयोध्यांचल के यूनिट इंचार्ज के खिलाफ एसआईटी ने दर्ज की एफआईआर
Tue, 13 Oct 2020 11:53 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 13 Oct 2020 11:53 PM IST
विज्ञापन
भ्रष्टाचार
- फोटो : un hindi samachar
राजकीय निर्माण निगम अयोध्यांचल के एक यूनिट इंचार्ज के खिलाफ एसआईटी ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। यह मामला अयोध्या में बन रहे मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है, जिसमें यूनिट इंचार्ज द्वारा ठेकेदार से भुगतान के बदले रिश्वत की मांग की जा रही थी। ठेकेदार ने बतौर रिश्वत 27 लाख रुपये दे भी दिए, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद भी रिश्वत की मांग की जाती रही।
जानकारी के अनुसार अयोध्या में मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 189.01 करोड़ रुपये स्वीकृृत हुआ था। निर्माण के लिए राजकीय निर्माण निगम और उप संविदाकार (सब कॉन्ट्रैक्टर) मेसर्स रेड्डी विरन्ना कॉन्स्ट्रक्शन के बीच 131 करोड़ रुपये का काम कराने के लिए 30 नवंबर 2016 को अनुबंध हुआ था। सब कॉन्ट्रैक्टर ने 2017 में इसका काम शुरू किया था। मेसर्स रेड्डी विरन्ना कॉन्स्ट्रक्शन के उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने राजकीय निर्माण निगम अयोध्यांचल के महाप्रबंधक के खिलाफ बिलों को पास करने के लिए घूस मांगने की शिकायत की थी।
उन्होंने यूनिट इंचार्ज अनिल कुमार के साथ हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी शिकायत के साथ सौंपी थी। शासन ने इस मामले की जांच 22 जून 2020 को एसआईटी को सौंपी थी। एसआईटी की जांच के दौरान यूनिट इंचार्ज द्वारा अवैध तरीके से धन उगाही के पर्याप्त सुबूत मिले।
विज्ञापन
जांच के दौरान पाया गया कि कंपनी के कमल सिंह बिष्ट के माध्यम से तीन बार में अनिल कुमार को कुल 27 लाख रुपये बतौर रिश्वत दिया गया। 3 सितंबर 2019 को सूडा इकाई कार्यालय में 10 लाख रुपये दिए गए। 11 अक्तूबर 2019 को महाप्रबंधक के कार्यालय में 10 लाख रुपये दिए गए और फिर 23 अक्तूबर 2019 को यूनिट इंचार्ज के घर पर 7 लाख रुपये दिए गए। इस मामले में अनिल कुमार की स्पष्ट भूमिका सामने आने के बाद एसआईटी ने शासन की अनुमति से एफआईआर दर्ज कर ली है और आगे की जांच शुरू कर दी है।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार अयोध्या में मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 189.01 करोड़ रुपये स्वीकृृत हुआ था। निर्माण के लिए राजकीय निर्माण निगम और उप संविदाकार (सब कॉन्ट्रैक्टर) मेसर्स रेड्डी विरन्ना कॉन्स्ट्रक्शन के बीच 131 करोड़ रुपये का काम कराने के लिए 30 नवंबर 2016 को अनुबंध हुआ था। सब कॉन्ट्रैक्टर ने 2017 में इसका काम शुरू किया था। मेसर्स रेड्डी विरन्ना कॉन्स्ट्रक्शन के उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने राजकीय निर्माण निगम अयोध्यांचल के महाप्रबंधक के खिलाफ बिलों को पास करने के लिए घूस मांगने की शिकायत की थी।
विज्ञापन
उन्होंने यूनिट इंचार्ज अनिल कुमार के साथ हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी शिकायत के साथ सौंपी थी। शासन ने इस मामले की जांच 22 जून 2020 को एसआईटी को सौंपी थी। एसआईटी की जांच के दौरान यूनिट इंचार्ज द्वारा अवैध तरीके से धन उगाही के पर्याप्त सुबूत मिले।
विज्ञापन
जांच के दौरान पाया गया कि कंपनी के कमल सिंह बिष्ट के माध्यम से तीन बार में अनिल कुमार को कुल 27 लाख रुपये बतौर रिश्वत दिया गया। 3 सितंबर 2019 को सूडा इकाई कार्यालय में 10 लाख रुपये दिए गए। 11 अक्तूबर 2019 को महाप्रबंधक के कार्यालय में 10 लाख रुपये दिए गए और फिर 23 अक्तूबर 2019 को यूनिट इंचार्ज के घर पर 7 लाख रुपये दिए गए। इस मामले में अनिल कुमार की स्पष्ट भूमिका सामने आने के बाद एसआईटी ने शासन की अनुमति से एफआईआर दर्ज कर ली है और आगे की जांच शुरू कर दी है।