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Lucknow News: सिजेरियन प्रसव का दुष्प्रभाव, गर्भाशय पर चिपक रहा प्लेसेंटा

Mon, 25 Aug 2025 02:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 25 Aug 2025 02:07 AM IST
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Side effect of cesarean delivery, placenta sticking to the uterus
लखनऊ। ऑपरेशन से प्रसव कराने की जिद अगले बच्चे के समय घातक साबित हो सकती है। पहली बार सिजेरियन प्रसव होने से दूसरी बार गर्भधारण करने पर प्लेसेंटा के गर्भाशय से चिपकने की आशंका बढ़ जाती है। केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति विभाग में प्लेसेंटा के गर्भाशय से चिपकने (प्लेसेंटा एक्रीटा) के रोजाना दो मामले आ रहे हैं। इनमें से ज्यादातर का पहला प्रसव ऑपरेशन से हुआ था।
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केजीएमयू में स्त्री एवं प्रसूति विभाग की प्रोफेसर डाॅ. सीमा मेहरोत्रा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान भ्रूण को पोषक तत्व और ऑक्सीजन प्रदान करने के लिए प्राकृतिक रूप से एक अंग पनपता है, जिसे प्लेसेंटा कहते हैं। यह गर्भनाल के माध्यम से शिशु से जुड़ा रहता है। यह अपशिष्ट पदार्थ को हटाता है। प्रसव के समय प्लेसेंटा भ्रूण से अलग हो जाता है।
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कई बार प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार में गंभीर तरह चिपक जाता है। इससे यह सामान्य रूप से अलग नहीं हो पाता। यह स्थिति आमताैर पर पूर्व में हुए सिजेरियन प्रसव की वजह से आती है। असल में सिजेरियन के समय बने निशान पर ही प्लेसेंटा जाकर चिपकता है। ऐसी स्थिति में ऑपरेशन ही विकल्प होता है, लेकिन बुरी तरह चिपकने पर उसे अलग करना जोखिम भरा रहता है। कई बार इस कोशिश में ज्यादा रक्तस्राव होता है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए घातक होता है।
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विभाग में इस तरह के ज्यादातर मामले रेफर होकर आते हैं। दो साल पहले तक प्लेसेंटा एक्रीटा का बमुश्किल एक मामला आता था। अब इसके औसतन दो मामले रोज आ रहे हैं। डाॅ. सीमा मेहरोत्रा के मुताबिक, सामान्य प्रसव को सिजेरियन पर वरीयता देनी चाहिए।
निकालना पड़ता है गर्भाशय
डाॅ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डाॅ. मालविका मिश्रा ने बताया कि रक्तस्राव रोकने के लिए कई बार गर्भाशय को निकालना (हिस्टेरेक्टॉमी) पड़ता है। ऐसी स्थिति में महिला दोबारा मां नहीं बन सकती है। प्रसवपूर्व निदान के लिए नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड होना चाहिए। इसका पता चलने पर नियोजित तरीके से ऑपरेशन की योजना बनाई जाती है।

पांच से 15 फीसदी है सिजेरियन प्रसव का आदर्श प्रतिशत
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सिजेरियन प्रसव पांच से 15 फीसदी के बीच ही होने चाहिए। वहीं देश में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-3 की रिपोर्ट में यह 8.5 फीसदी, सर्वे-4 में 17.2 फीसदी और सर्वे-5 में बढ़कर 21.5 फीसदी पहुंच गया।
सामान्य प्रसव के लिए यह करें-
जीवनशैली और खान-पान पर विशेष ध्यान दें
गर्भावस्था के दाैरान सक्रिय रहें
पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें
स्वस्थ और संतुलित आहार लें
मोटापे से बचें और वजन नियंत्रण रखें
मानसिक और शारीरिक तैयारी
प्रसव के दाैरान तनाव से बचें और शांत रहने का प्रयास करें
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