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सरकारी अस्पतालों में खत्म हो गई ये मुफ्त दवाइयां

Sat, 29 Nov 2014 02:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 29 Nov 2014 02:56 PM IST
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shortage of medicines in goverment hospitals.

सरकारी अस्पतालों में दवाओं को संकट पैदा हो गया है। आयरन, कैल्शियम से लेकर इंफर्टिलिटी तक में दी जाने वाली, एंटीबायटिक से लेकर मानसिक रोगों की दवाएं भी मरीजों को नहीं मिल रही हैं।

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इसके चलते मरीजों को महंगी एंटीबायोटिक दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। एमॉक्सीलीन जैसी सामान्य एंटीबायटिक की भी आपूर्ति नहीं हो रही है। पैरासिटामाल का सैम्पल सब स्टैंडर्ड निकलने से बुखार की दवा की भी कमी हो गई है।
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल), बलरामपुर, झलकारीबाई और अवंतीबाई महिला चिकित्सालय में दवाओं का संकट पैदा हो गया है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल में एमॉक्सी और सिप्लॉक्स 500 एमजी एंटीबायटिक दवा की आपूर्ति काफी समय से बंद है।
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मरीजों को दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। इसी तरह बलरामपुर और लोहिया अस्पताल में भी एंटीबायोटिक दवाओं का संकट है और यहां भी जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।

रेट कांट्रैक्ट में शामिल कंपनियां नहीं दे रहीं दवाएं

shortage of medicines in goverment hospitals.

वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय (डफरिन) में आयरन, कैल्शियम सिरप, कीडे़ मारने वाली अलबंडाजोल, दर्द की दवा ब्रूफेन, बांझपन के मरीजों को दी जाने वाली इंफर्टिलिटी की एफसीजी टैबलेट मरीजों को नहीं दी जा रही है।

इसी तरह हजरतगंज के झलकारीबाई महिला चिकित्सालय में बुखार की पैरासिटामाल, एंटीबायटिक इमॉक्सिलीन खत्म हो गई है।

सरकारी अस्पतालों में दवा अपूर्ति स्वास्थ्य महानिदेशालय के केंद्रीय औषधि भंडार के रेट कांट्रैक्ट (आरसी) में शमिल कंपनियां करती हैं।

दवाओं का रेट कम कोट कर ये कंपनियां आरसी में तो शामिल हो जाती हैं इसके बाद दवाओं की आपूर्ति में लापरवाही करती हैं। हालत ये है कि रेडिको कंपनी को दर्द की दवा डिक्लोफेनिक सोडियम की आरसी है।

लेकिन ये दवा अस्पतालों को मिल नहीं रही है। इसी तरह स्कॉट एडिल कंपनी सीफोटैक्सिम एंटीबायटिक इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं कर रही है। पैरासिटामाल की कमी लगातार बनी हुई है।

कुछ ऐसा है अस्पाताल ए हाल

shortage of medicines in goverment hospitals.

इटावा व गाजियाबाद में पैरासिटामाल का नमूना अधोमानक पाए जाने के बाद ये दिक्कत शुरू हुई है। मेट्रोजिल, एंटीफंगल फ्लूकोनोजोल, मधुमेह की मेटफॉर्मिन, एंटी एलर्जिक सिट्रीजिन, एंटीबॉयटिक इमॉक्सिसिलीन की आपूर्ति भी अस्पतालों में न के बराबर है।

महिलाओं को लगने वाला रुगॉन इंजेक्शन भी खत्म
सीएचएसी पर आने वाली निगेटिव ग्रुप की महिलाओं को रुगॉन इंजेक्शन नहीं मिल रहा है।

ऐसी महिलाओं को इंजेक्शन के लिए डफरिन महिला चिकित्सालय भेजा जा रहा है। इसके चलते महिलाओं को सीएचसी से अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है।

केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग का भी यही हाल है वहां भी निगेटिव ग्रुप की महिलाओं को दिया जाने वाला इंजेक्शन नहीं मिल रहा है।

सीएमएसडी के निदेशक डॉ.योगेश शर्मा ने बताया कि जिन कंपनियों से रेट कांट्रैक्ट है उन्हें दवा आपूर्ति के लिए नोटिस जारी किया गया है। नई आरसी के लिए टेंडर भी कर दिया गया है। दवाओं की आपूर्ति को सुधारने के प्रयास जारी हैं।

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