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एसिड अटैक पीड़ितों द्वारा चलाए जा रहे शीरोज कैफे का संचालन किसी अन्य को देने की तैयारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 04 Oct 2018 12:12 AM IST
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गोमती नगर स्थित शीरोज कैफे।
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डॉ. भीमराव अंबेडकर परिवर्तन स्मारक परिसर में महिला कल्याण निगम द्वारा संचालित शीरोज हैंगआउट कैफे बंद नहीं होगा, बल्कि इसका संचालन नाम बदल कर किया जाएगा। हालांकि यह संचालन कौन करेगा, इसे लेकर मंथन चल रहा है।
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महिला कल्याण मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने शीरोज बंद नहीं होने की पुष्टि की। मंत्री ने कहा कि इसका संचालन करने वाले एनजीओ छांव फाउंडेशन की अनियमितता छिपाने के लिए भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं।
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कैफे में काम करने वाली 12 एसिड अटैक पीड़ित महिलाएं पूर्व की भांति अलीगंज स्थित महिला कल्याण निगम के एकल श्रमजीवी महिला छात्रावास में ही निशुल्क रहेंगी। इसके अलावा इन्हें राष्ट्रीय कौशल विकास निगम एवं राज्य महिला एवं बाल संसाधन केन्द्र के सहयोग से नि:शुल्क प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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साथ ही सरकार कैफे के संचालन के लिए दूसरे विकल्प पर मंथन कर रही है। सूत्रों का कहना है कि इसका नए सिरे से नाम बदलकर निगम ही संचालन करे या किसी अन्य विकल्प की भी तलाश की जाएगी। इतना तय है कि कैफे को बंद नहीं किया जागा। जल्द ही इस मुद्दे पर फैसला कर लिया जाएगा।
एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के आर्थिक व सामाजिक विकास एवं पुनर्वासन के उद्देश्य से महिला कल्याण निगम ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर परिवर्तन स्थल परिसर के कैंटीन को दो साल के लिए एलडीए से लीज पर लेकर दिल्ली की स्वैच्छिक संस्था छांव फाउंडेशन को दिया था। इस संबंध में संस्था और महिला कल्याण निगम के बीच एक एमओयू किया गया था।
संस्था को नहीं मिली राहत
सरकार द्वारा गठित स्टेट मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक में लिए गए फैसले खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली छांव फाउंडेशन को वहां से कोई खास राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने सरकार द्वारा संस्था को कैंटीन का स्थान खाली करने के लिए दी गई 29 सितंबर तक की समय सीमा को बढ़ाकर 22 अक्तूबर कर दिया है।