‘कास्टिंग काउच’ पर शर्मिला टैगोर का हीरोइनों को दो टूक जवाब, पुलिस में शिकायत क्यों नहीं करतीं
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प्रसिद्ध अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने कहा है कि हम फिल्मी हस्तियां तो कांच के घरों में रहते हैं। सबकी नजर हम पर रहती है। निजी जिंदगी जैसी कोई चीज हमारे साथ नहीं है। टैगोर बृहस्पतिवार को गोमती नगर स्थित एक होटल में फिक्की फ्लो के लखनऊ कानपुर इकाई द्वारा आयोजित समारोह में विचार व्यक्त कर रही थीं। यह आयोजन मदर्स डे (13 मई) के उपलक्ष्य में किया गया था, जिसमें टैगोर ने अभिनेत्री और मां के दायित्वों के बीच संतुलन, महिला सशक्तीकरण पर खास तौर पर चर्चा की।
किसी समय ‘कश्मीर की कली’, ‘आराधना’, ‘सफर’, ‘अमर प्रेम’, ‘मौसम’, ‘चुपके चुपके ’ जैसी फिल्मों में अभिनय से धूम मचाने वाली टैगोर ने कहा कि एक पढ़ी-लिखी, कुशल महिला से पुरुष भी डरते हैं और असुरक्षित महसूस करते हैं। यही चीजें फिल्मों में भी दिखती हैं। क्या वजह है कि डॉन कोई अभिनेता ही हो सकता है, अभिनेत्री नहीं। उन्होंने कहा कि किसी समय खलनायिकाओं को समाज में बुरा समझा जाता था, लेकिन आज अभिनेत्रियां हर तरह की भूमिकाएं कर सकती हैं। वे नायिकाएं भी बनती हैं और खलनायिकाएं भी।
पद्मभूषण, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों सहित कई सम्मान पा चुकीं 73 वर्षीया अभिनेत्री ने कहा कि मां के तौर पर मैं खुद को दस में छह अंक दे सकती हूं। उन्होंने कहा कि आप कितने भी व्यस्त हों लेकिन आप अगर अपने परिवार और बच्चों के लिए समय निकालना चाहते हैं तो निकाल ही लेते हैं। बहुत सारी ऐसी औरतें जो नौकरीपेशा नहीं हैं, बच्चों को समय नहीं दे पाती हैं। उनका समय छतों या सजने-संवरने में बीत जाता है।
उन्होंने कहा कि सवाल नीयत का होता है। उन्होंने कहा कि जब कभी ऐसा हुआ कि मैं फिल्मों के कारण बहुत व्यस्त रही तो टाइगर (पति पटौदी) बच्चों के साथ होते थे। उन्होंने कहा कि परिवार में यह नहीं सोचना चाहिए कि कौन-सा काम स्त्री का है और कौन-सा पुरुष का। ये देखना चाहिए कि कौन-सा काम जरूरी है। फिक्की फ्लो की अध्यक्ष रेणुका टंडन ने स्वागत किया। सवाल शांतनु राय चौधरी और कई दर्शकों ने पूछे।
...तब अभिनेत्रियों का सम्मान नहीं था
शर्मिला टैगोर ने कहा कि एक दौर था जब फिल्मी कलाकारों को बहुत सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता था। उन्होंने बताया कि ‘कश्मीर की कली’ के बाद एक पत्रिका के आवरण पर मेरा चित्र छपा और उसी पर एक व्यापारी की पत्नी का भी चित्र छपा लेकिन उस व्यापारी ने मेरे चित्र के कारण सारी पत्रिकाएं बाजार से हटवा दी थीं।
सोचा था निर्भया आखिरी घटना होगी
प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री ने कहा कि जब निर्भया कांड हुआ था और उसकी देश भर में जिस प्रकार निंदा हुई थी तो लगा था कि इस प्रकार की घटनाएं थम जाएंगी और आगे नहीं होंगी लेकिन कठुआ की घटना से इसकी पुनरावृत्ति हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है कि हम परिवार में बच्चों की परवरिश सही ढंग से करें।
जब कॅरिअर शीर्ष पर था, विवाह किया
शर्मिला टैगोर ने कहा कि जब मुझे जो ठीक लगा किया। मैंने 24 वर्ष की उम्र में शादी की। तब मेरा कैरियर शीर्ष पर था लेकिन मुझे लगा कि 40 वर्ष की उम्र में शादी करने से बेहतर है कि अभी विवाह कर लूं। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि शादी के बाद अभिनेत्रियों का कॅरियर रुक जाता है। ‘मौसम’, ‘अमर प्रेम’ सहित मेरी कई फिल्में शादी के बाद प्रदर्शित हुईं।
‘कास्टिंग काउच’ की पुलिस में शिकायत क्यों नहीं करते
बीते दौर की प्रसिद्ध अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने ‘कास्टिंग काउच’ को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि मेरा इस पर विश्वास नहीं। मेरे साथ तो कुछ हुआ नहीं। हां, मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे संघर्ष नहीं करना पड़ा लेकिन मुझे लगता है कि यह हर पेशे में कुछ न कुछ होता होगा। लेकिन अगर कोई महिला इसे पसंद नहीं करती है तो उसे कहना चाहिए और अगर वह नहीं कहती है तो यह उसका अपना निर्णय है। मुझे तो ऐसा कुछ नहीं लगता। हां, अपनी उम्र के कारण आज क्या हो रहा है, इसके बारे में मुझे बहुत जानकारी नहीं है लेकिन एक सहज ज्ञान के तौर पर कह सकती हूं कि आपको जो चीज पसंद नहीं है वह मत करिए। अगर आपके साथ ऐसा कुछ होता है और आप नहीं चाहते तो पुलिस में शिकायत करिए। वास्तव में ये बातें व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर हैं। सबके लिए ऐसी कोई बात नहीं कही जा सकती है। शर्मिला टैगोर बृहस्पतिवार को लखनऊ प्रवास के दौरान कुछ पत्र-प्रतिनिधियों से बातचीत की। बातचीत के प्रमुख अंश:
सवाल- खुद और अपनी बहू करीना कपूर के रिश्तों को लेकर क्या कहेंगी?
जवाब- ये वैसे ही जैसे हर किसी के घर में होता है। इसमें प्रसिद्ध व्यक्ति और आम व्यक्ति में कोई फर्क नहीं है। परिवार परिवार ही होता है।
'सैफ अली खान की दूसरी शादी का प्रसंग एक मां के तौर पर'
सवाल- अपने बेटे सैफ अली खान की दूसरी शादी का प्रसंग एक मां के तौर पर आपके लिए कितना मुश्किल था?
जवाब- जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो फिर उनका अपना जीवन होता है, उनके अपने निर्णय होते हैं, अपनी पसंद-नापसंद होती है। हालांकि यह दुखद तो था, आप एक रिश्ता बनाते हैं और फिर उस रिश्ते को तोड़ना दुखद तो होता है। आप कोई चीज बनाएं और फिर उसे समाप्त कर दें लेकिन ठीक है। सारा (सैफ की पहली पत्नी अमृता सिंह से बेटी) अब बड़ी हो गई है, फिल्में कर रही है। उसकी पहली फिल्म में थोड़ी देर हुई है।
सवाल- आपने अपने दौर में बहुत सारे निषेधों को तोड़ा। आपके विचार से एक अभिनेत्री के तौर पर वह दौर अधिक मुश्किल था या आज का?
जवाब- एक तरीके से देखें जैसे यात्राएं, संचार आज ज्यादा आसान है। खूबसूरत सड़कें हैं, हवाई जहाज की अधिक सुविधाएं हैं, हर आधे घंटे पर उड़ाने हैं, मोबाइल है, संचार की दूसरी सुविधाएं हैं लेकिन इस किस्म की पाबंदियां, सलाहें कि आप क्या पहनें, क्या खाएं, ये करो, ये मत करो-ये सब उस समय उतना नहीं था। पहले घर के लोग या पड़ोसी कुछ कह देते थे या फिर कभी कभार समाचार पत्रों में कुछ बातें आ जाती थीं लेकिन आज कोई बात वायरल होती है और फिर हर कोई अपनी राय देने लग जाता है। जैसे सलाह की बाढ़-सी आ जाती है। पहले तैमूर के बारे में बहुत सारी बातें आईं और अब वह हर किसी का प्रिय है। कल कुछ होगा, फिर और कुछ होगा, फिर लोग भूल भी जाएंगे।
'मीडिया अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी'
सवाल- मीडिया की भूमिका को किस रूप में देखती हैं?
जवाब- मीडिया आपके लिए अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है लेकिन मीडिया की अहम भूमिका है। फिल्मों के प्रचार के लिए मीडिया जरूरी है। मीडिया के बगैर प्रसिद्ध लोगों का अस्तित्व ही क्या है?
सवाल- फिल्मों में वापसी को लेकर क्या कोई योजना है?
जवाब- नहीं ये बहुत कठिन कार्य है और अब ये मुझसे नहीं हो सकेगा।
सवाल- अभिनेत्रियों की वापसी को लेकर आपकी क्या धारणा है?
जवाब- नियमित काम करते जाओ तो ठीक है नहीं तो कई बार मुश्किल हो जाती है।
सवाल- इस उम्र में भी इस खूबसूरती और स्वास्थ्य का राज क्या है?
जवाब- थोड़ा व्यायाम क्योंकि इसका कोई छोटा रास्ता नहीं है।