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शाह-योगी ने सेट किया पश्चिमी यूपी का चुनावी एजेंडा: विकास-पलायन समेत यह होंगे बड़े मुद्दे, भाजपा बनाम अन्य लड़ाई बनाने का प्रयास
Fri, 03 Dec 2021 07:30 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 03 Dec 2021 07:30 AM IST
सार
शब्द भले ही कुछ प्रयोग हुए, लेकिन साफ हो गया कि विपक्ष पर वार को भाजपा छेड़छाड़, कानून-व्यवस्था, पशु चोरी, धर्मांतरण, दंगा, हिंदुओं से किए गए दोयम दर्जे के व्यवहार को मुख्य हथियार बनाएगी। शाह ने लोगों से हाथ उठवाकर इस बार भी यूपी में भाजपा के 300 पार जाने का वचन लिया।
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सहारनपुर में सीएम योगी और अमित शाह
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
आक्रामक अंदाज में अस्मिता के सवाल पर बात। विकास के अलावा पहचान, पलायन, सम्मान व सुरक्षा पर पहले की सरकारों और केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद आए फर्क पर बात। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को सहारनपुर में प्रख्यात देवी शक्तिपीठ मां शाकंभरी देवी के नाम पर बनने वाले राज्य विश्वविद्यालय का शिलान्यास करते हुए पश्चिमी यूपी का भाजपा का चुनावी एजेंडा सेट कर दिया।
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शब्द भले ही कुछ प्रयोग हुए, लेकिन साफ हो गया कि विपक्ष पर वार को भाजपा छेड़छाड़, कानून-व्यवस्था, पशु चोरी, धर्मांतरण, दंगा, हिंदुओं से किए गए दोयम दर्जे के व्यवहार को मुख्य हथियार बनाएगी। शाह ने पश्चिमी यूपी के युवाओं को ‘जिगर का टुकड़ा’ बताया। लोगों से हाथ उठवाकर इस बार भी यूपी में भाजपा के 300 पार जाने का वचन लिया। भले ही लोग कहते हों कि किसानों के आंदोलन से इस क्षेत्र में भाजपा की चुनौती बढ़ी है। पर, शाह व योगी बृहस्पतिवार को यह बताने की कोशिश की कि वे बिल्कुल चिंतित नहीं हैं। हर संभावित चुनौती से निपटने की पूरी तैयारी कर ली है।
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प्रतीकों से दुखती रग पर हाथ
राजनीति में प्रतीकों का बहुत महत्व है। अगर इनका प्रयोग इनसे सरोकार रखने वालों को अतीत की दुश्वारियों की याद दिलाते हुए की जाए तो मारक क्षमता और बढ़ जाती है। शाकंभरी देवी राज्य विवि का शिलान्यास करते हुए भाजपा ने यही किया। शाह ने यह कहते हुए, ‘लोगों को पलायन पर मजबूर करने वाले योगी सरकार बनने के बाद प्रदेश से पलायन कर गए हैं।’ लोगों को 2017 से पहले के पलायन का दर्द याद दिला यह समझाने की कोशिश की कि मोदी व योगी सरकार ने हिंदुओं के सम्मान-स्वाभिमान, सुरक्षा एवं रोजी-रोटी के लिए किस तरह काम किया है।
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बिसात बिछाने की कोशिश
बीते कुछ वर्षों में गन्ना भुगतान, कांवड़ यात्रा, माफिया, धर्मांतरण, छेड़छाड़, पशु चोरी जैसे मुद्दे पश्चिमी यूपी के राजनीतिक समीकरण बनाते-बिगाड़ते रहे हैं। वहीं, हिंदुओं का पलायन भी बड़ा मुद्दा बना है। शहरी इलाकों में अक्सर सांप्रदायिक तनाव के लिए पहचाने जाने वाले पश्चिमी यूपी में मुजफ्फरनगर दंगा ने कई जिलों के ग्रामीण इलाकों में हिंदू-मुस्लिम खाई बढ़ाई है। इसलिए शाह व योगी की बातों का मर्म खास है। वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल कहते हैं कि सहारनपुर में इन दोनों ने कुछ भी ऐसा नहीं छोड़ा जो हिंदुओं को उनके अतीत के कष्ट याद दिलाने वाला न हो। यह एक तरह चुनाव अभियान में भाजपा की रणनीति का ट्रेलर था। जो यह बता गया कि भाजपा इस क्षेत्र के लिहाज से दंगा, पलायन सहित उन सभी मुद्दों को पूरी आक्रामकता से उठाएगी। उसका हमला मुख्य रूप से सपा पर होगा, जिससे हिंदुओं के साथ किए गए सौतेले व्यवहार को ठीक से धार दी जा सके।
इनका भी मतलब खास
शाह के निशाने पर अखिलेश यादव को रखा। इस पर प्रो. एपी तिवारी कहते हैं कि अयोध्या आंदोलन के साथ सपा मुस्लिमों के ध्रुवीकरण की राजनीति की प्रतीक बन गई है। इसलिए सपा पर हमला स्वत: हिंदू-मुस्लिम राजनीतिक समीकरण बना देता है। ये समीकरण पश्चिमी यूपी की राजनीतिक बिसात पर भाजपा को मजबूत बनाता है। विपक्ष को घेरता है। प्रो. तिवारी के निष्कर्षों के मद्देनजर देखें तो शाह व योगी ने जो एजेंडा सेट किया है, विपक्ष चाहकर भी उससे नहीं हट पाएगा।
देवबंद से इतर भी पहचान
सहारनपुर में इस्लामिक शिक्षा का बड़ा केंद्र दारुल उलूम देवबंद भी है। इसको लेकर खूब राजनीति भी होती रही है। मुख्यमंत्री योगी ने उसी इलाके में शाकंभरी देवी के नाम पर विवि बनाने का फैसला कर भविष्य में इस इलाके की पहचान सिर्फ देवबंद से ही नहीं बल्कि शाकंभरी देवी विवि से कराने के अपने संकल्प का संदेश दिया है। यहां से मिलने वाली डिग्री पर शाकंभरी देवी का चित्र होने की जानकारी देकर उन्होंने यह बताने की कोशिश की है कि वह इस इलाके की पहचान सनातन संस्कृति के केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए कृत संकल्प हैं।
इसलिए शाह व योगी की बातें खास
पश्चिमी यूपी में कई स्थानों पर मुस्लिम आबादी अच्छी-खासी है। अतीत में छोटी-छोटी बातों पर सांप्रदायिक घटनाएं घटती रही हैं। मुजफ्फरनगर दंगा की जड़ में भी छेड़छाड़ ही थी। शायद इसीलिए शाह ने केंद्री में मोदी सरकार बनने के बाद अनुच्छेद-370 समाप्त होने, तीन तलाक खत्म करने, आतंकवाद पर अंकुश लगने जैसे कामों तथा योगी की सरकार बनने के बाद प्रदेश में बहन-बेटी से छेड़छाड़ की किसी की हिम्मत न होने, पशु तस्करी और गो-हत्या पर रोक, माफिया के मुर्गा बनने, कान-पकड़कर समर्पण करने, धर्मांतरण पर रोक लगने जैसे कामों का उल्लेख कर हिंदुओं को प्रतीकात्मक रूप से संदेश दिया कि उनकी सुरक्षा, सम्मान, स्वाभिमान व भारतीय संस्कृति की चिंता केवल भाजपा ही कर सकती है।