फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   SGPGI may induct biometric system to curb medicine scam

अब दवा लेने के लिए बायोमीट्रिक व्यवस्था की तैयारी, एसजीपीजीआई में दवा घोटाला सामने आने के बाद नई रणनीति पर विचार व्यवस्था की तैयारी

Sun, 14 Feb 2021 11:20 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Feb 2021 11:20 PM IST
विज्ञापन
SGPGI may induct biometric system to curb medicine scam
एसजीपीजीआई दवा घोटाले जैसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम लागू करने पर विच
लखनऊ। एसजीपीजीआई में पोस्ट डिपॉजिट (पीडी) खाते से लाखों का दवा घोटाला सामने आने के बाद हलचल मची हुई है। जांच की जद में कई वरिष्ठ अधिकारी भी आ सकते हैं। एसजीपीजीआई प्रशासन ने इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। सीएमएस प्रो. सोनिया नित्यानंद का कहना है कि इसके तहत जल्द ही पीडी अकाउंट वालों के लिए बायोमीट्रिक व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। ऐसे में मरीज के नाम पर दूसरा व्यक्ति दवा नहीं ले सकेगा। वहीं संस्थान मामले की जांच कर दोषियों को सजा दिलाएगा।
विज्ञापन

एसजीपीजीआई में विभिन्न मदों से प्राप्त रुपयों से इलाज कराने वाले मरीजों के खाते से करीब 55 लाख की दवाइयां निकालने का मामला सामने आ चुका है। पूरे प्रकरण की जांच के लिए कमेटी बनी है। सूत्र बताते हैं कि कमेटी से जुड़े सदस्य रविवार को भी फाइलों की पड़ताल में जुटे रहे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि दवा रैकेट में शामिल लोगों से पूछताछ के आधार पर संस्थान के कुछ अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं।
विज्ञापन

एक हजार से अधिक अकाउंट
एसजीपीजीआई में विभिन्न मदों से मरीज के इलाज के लिए आने वाले रुपयों को पीडी अकाउंट में जमा किया जाता है। मरीज का इलाज पूरा होने के बाद इस अकाउंट को बंद कर दिया जाता है। इन दिनों संस्थान में करीब 1000 से अधिक पीडी अकाउंट चल रहे हैं। इस अकाउंट में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहायता कोष अथवा अन्य किसी कॉरपोरेट संस्था से जुड़े मरीजों के इलाज के लिए एकमुश्त रुपये भेजे जाते हैं। जिस व्यक्ति के लिए रुपये आते हैं, उसके नाम पर संस्थान में पीडी अकाउंट बनाया जाता है। सूत्र बताते हैं कि मरीज के इलाज कर चले जाने के बाद यदि पीडी अकाउंट में रुपये बचे रहते हैं तो जालसाजी करने वाले उन रुपयों से डॉक्टरों के नकली हस्ताक्षर बनाकर दवा निकाल लेते हैं। जबकि नियमानुसार बचे हुए रुपये सरकारी खाते में लौटा देना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

ज्यादा चालाकी जालसाजों पर पड़ी भारी
एसजीपीजीआई से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जालसाज अभी तक इलाज कराकर जाने वालों के बचे हुए रुपयों पर निगाह रखते थे, लेकिन इस बार चूक गए। एक मरीज के नाम पर मुख्यमंत्री सहायता कोष से करीब दो लाख रुपये भेजे गए। कोविड की वजह से मरीज भर्ती नहीं हुआ। जब वह बुधवार को भर्ती होने आया तो पता चला कि उसके अकाउंट से रुपये निकल गए हैं। ऐसे में उसने लिखित शिकायत की। इस शिकायत के बाद ही दूसरे खातों की पड़ताल की गई तो मामला सामने आ गया। दूसरे ही दिन एक दूसरे मरीज के नाम पर दवा निकालने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया गया, जिसमें एक डॉक्टर ने दूसरे डॉक्टर के हस्ताक्षर को गलत बताते हुए शक जाहिर किया। एसजीपीजीआई प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने कुछ संविदा कर्मियों से पूछताछ की तो पूरे रैकेट का खुलासा हुआ। कर्मचारियों ने गलती भी स्वीकार की है।

प्रभारियों की भूमिका पर भी सवाल
एसजीपीजीआई में ओपीडी फार्मेसी, विभिन्न वार्ड, ऑपरेशन थिएटर में एचआरएफ के स्टोर हैं। इन स्टोर पर काम करने वाले डाटा इंट्री ऑपरेटर, दवा पहुंचाने वाले की निगरानी के लिए प्रभारी रखे गए हैं। इन लोगों की भूमिका पर सवाल उठ रहा है क्योंकि बिना इनकी सहमति के बिना हेरफेर नहीं हो सकता है। कुछ प्रभारी अपने चहेते लोगों को खास जगह पर बैठा कर खेल करते हैं, जो खेल में शामिल नहीं होते उनका स्थानांतरण करा देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed