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लखनऊ के अस्पतालों में भी हो रही है सेक्स चेंज सर्जरी

अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 12 Jan 2016 02:42 AM IST
Sex change surgery in Lucknow.
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14 साल बाद जब उसकी आवाज नहीं बदली, चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ के रत्ती भर बाल नहीं दिखे। इस पर घर वालों को चिंता होने लगी कि जिसे वह इतने समय से लड़का समझ रहे हैं, कहीं वह लड़की तो नहीं। एसजीपीजीआई इसका समाधान निकला।

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जांच में पता चला कि जिसे लड़का समझा जा रहा है वह वास्तव में लड़की है। उसके जननांग विकसित नहीं हुए हैं लेकिन उसमें महिलाओं में पाए जाने वाले हारमोन अधिक थे। इसके बाद अब उसे वैजाइनोप्लास्टी के जरिए लड़की बना दिया गया है।


उसने अपना घर भी बसा लिया है। वह गर्भधारण नहीं कर सकती इसलिए उसने एक अनाथ बच्चे को गोद भी ले लिया है। वह अब अपनी इस नए जीवन से खुश है।

केस टू- ढाई घंटे की सर्जरी कर लड़का से लड़की बना दिया

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एक गरीब किसान परिवार के घर जन्मे बच्चे के जननांग न लड़कों जैसे थे और न ही लड़कियों जैसे। बदनामी के डर से उसने किसी को भी यह बात नहीं बताई।

कुछ डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन वह भी सही राय नहीं दे पाए और चिकित्सा विश्वविद्यालय जाने की सलाह दी। धीरे-धीरे बच्चा बड़ा हो गया। पिछले कुछ महीनों से उसे माहवारी शुरू हो गई तो घर वाले चिंता में पड़ गए। उसे क्वीन मेरी अस्पताल जांच के लिए लाए।

यहां जांच के बाद पाया गया कि वो दिखता तो लड़के जैसा है लेकिन आंतरिक अंग लड़कियों वाले विकसित हैं। इसके बाद चिकित्सकों की टीम ने ढाई घंटे तक सर्जरी कर उसे लड़का से लड़की बना दिया।

ज्यादातर मामलों में पुरूष से महिला बनने के लिए सर्जरी

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पीजीआई और केजीएमयू में साल दो-तीन ऐसे मामले आ जाते हैं जिसमें सेक्स चेंज के लिए सर्जरी करनी पड़ती है। हालांकि इसमें अधिक मामले ऐसे हैं जिनमें पुरुष से महिला में बदलने की सर्जरी की गई।

पीजीआई के निदेशक व यूरोलॉजिस्ट प्रो. राकेश कपूर के अनुसार पुरुष से महिला के जननांग बनाने की सर्जरी ज्यादा कॉमन है।

पीजीआई में अब तक वो दर्जनों ऐसी सर्जरी कर चुके हैं लेकिन ऐसे मामलों में अधिकतर पुरुषों में महिलाओं के हार्मोन थे। पूरी तरह से पुरुष को महिला बनाने के मामले में बहुत सी कानूनी दिक्कतें आती हैं।

आंत के एक टुकड़े को काटकर बनाया गया योनि

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प्रो. राकेश कपूर ने एक ऐसे ही मरीज की सर्जरी के बारे में बताया कि बचपन से ही लड़कों जैसी दिखने व व्यवहार करने वाली रिजवाना (नाम परिवर्तित) को सभी लोग रिजवान के नाम से पुकारते थे। उसके रहन-सहन से लोग तो क्या इसके मां-बाप भी इसे लड़का ही समझते रहे। इसका पालन-पोषण भी लड़कों की तरह होता रहा।

उम्र बढ़ने के साथ उसमें लड़कियों की तरह शारीरिक परिवर्तन होने लगे। लड़कियों की तरह पतली आवाज, न दाढ़ी और न मूंछे। कई जगह दिखाने के बाद जब वो पीजीआई पहुंचे तो उसकी जांच ने परीक्षण के बाद पाया कि रिजवाना के आंतरिक शरीर की बनावट लड़की जैसी है लेकिन असंतुलित हारमोन के कारण उसके लिंग का विकास नहीं हो पाया था।

ऐसे में उसे लड़की बनाया जा सकता था सिर्फ दिक्कत ये थी कि वो कभी गर्भधारण नहीं कर पाएगी। इसके बाद वेजाइनोप्लास्टी के माध्यम से परिवार वालों के सहमति के बाद छह घंटे तक चली जटिल सर्जरी के बाद रिजवाना के अविकसित लिंग को हटाकर स्त्री जननेंद्रीय बनाई गई।

इस सर्जरी के तहत छोटी आंत के खास टुकड़े को रक्त संचालन के साथ निकालकर उसे योनि का रूप देकर रोपित किया गया।

ये है इसका प्रमुख कारण

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प्रो. राकेश कपूर के अनुसार पांच सौ में से 2 या 4 ही ऐसे मामले पाए जाते हैं। दरअसल इसमें मेड्युला से स्रावित होने वाले हार्मोन की अधिकता होती है। जिससे स्त्री के शरीर में पुरुषों जैसे लक्षण उभरने लगते हैं।

मेड्युला से स्रावित होने वाले हार्मोन की जननेंद्री के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने बताया कि रिजवाना को ऑपरेशन के बाद व्यक्तित्व की पहचान तो मिल गई लेकिन पुरुष हार्मोन के कारण उसके गर्भाशय का निर्माण नहीं हुआ था। जिसके कारण वह गर्भधारण नहीं कर पाएगी।

प्रो. राकेश कपूर के अनुसार जननांगों की विकृति को चिकित्सीय भाषा में एम्बीजीयस जेनेटेलिया कहा जाता है। इस विकृति में शिशुओं को लड़का या लड़की होने की पहचान नहीं हो पाती है लेकिन सर्जरी से अब एक लिंग निर्धारण संभव हो गया है।

50 हजार में से एक बच्चें में होती है विकृति

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कई चरणों में होने वाली सर्जरी से उन्हें लड़का या लड़की बनाया जा सकता है। इससे ये भी स्वस्थ सामाजिक जीवन जी सकते हैं। ये विकृति 50 हजार में से एक बच्चे को होती है।

ऐसे शिशुओं के पैदा होने की जानकारी होने पर इन्हें किन्नर समुदाय ले जाता है लेकिन अब सर्जरी से ये संभव हो गया है कि जननांगों की विकृति को सर्जरी से ठीक किया जा सके। जन्म के तीन माह के बाद बच्चे की जांच कर सर्जरी की जाती है।

इसमें छह-सात बार सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है, लेकिन बच्चे की पूरी जांच कर ये तय किया जाता है कि शरीर में किस तरह के हार्मोन और अंग हैं।

इस तरह राजा बनी रानी

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क्वीन मेरी अस्पताल की डॉ. एसपी जायसवार ने भी सेक्स चेंज की एक सर्जरी की थी। राजा (काल्पनिक नाम) की जांच में पाया गया कि उसके जीन लड़कियों की तरह हैं और बच्चेदानी भी पूरी तरह से विकसित थी। जबकि जननांग लड़कों की तरह थे। सिर्फ टेस्टिस नहीं थे।

इस विकृति को कांजिनाइटल एड्रिनल हाइपरप्लेसिया कहा जाता है। जो 5 से 15 हजार बच्चों में से एक में जन्मजात होता है। इसका कारण पर्यावर्णीय प्रदूषण या गर्भावस्था के दौरान गलत दवाओं का सेवन है।

...और लड़कियों की तरह जीने लगी

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राजा के बढ़े हुए क्लाइटोरियस को सर्जरी से कर छोटा कर दिया गया। इसके बाद योनिमार्ग बनाया गया। इसके बाद वह लड़कियों की तरह सामान्य जीवन जी रही है।

केजीएमयू में यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सक डॉ. विश्वजीत ने एक 20 साल की युवती की बड़ी आंत से उसका जननांग बनाने में सफलता पाई थी। राजाजीपुरम निवासी इस युवती को पैदाइश से ही जननांग नहीं बना था और उसकी बच्चेदानी भी नहीं थी।

बड़ी आंत का 15 सेंटीमीटर हिस्सा काट कर युवती का जननांग बनाया। चिकित्सीय भाषा में इस सर्जरी को वेजाइनोप्लास्टी कहते हैं। युवती बच्चेदानी न होने के कारण मां नहीं बन पाएगी।
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