निजी कंपनियों को सौंपा जाएगा लखनऊ सहित यूपी के चार बड़े शहरों के जलकल विभाग का काम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश के चार बड़े शहरों लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा व गोरखपुर में सीवर सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी है। ग्लोबल टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर एक विदेशी कंपनी का नाम भी तय किया जा चुका है। चुनाव के बाद निजी कंपनी काम संभाल लेगी। पहले चरण में कंपनी के साथ 10 साल का करार होगा। इसके लिए नई योजना ‘वन सिटी, वन ऑपरेटर’ का एनजीटी के सामने प्रजेंटेशन भी हो चुका है।
शहरों में सीवर सफाई और सीवर लाइन के मेंटेनेंस का काम जलकल विभाग तो एसटीपी का संचालन जल निगम करता है। सीवेज पंपिंग स्टेशनों का संचालन अलग-अलग ठेकेदार करते हैं। प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह के मुताबिक ऐसे में कोई गड़बड़ी आने पर सब एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने लगते हैं।
‘वन सिटी, वन ऑपरेटर’ के लिए राज्य स्तरीय फंड बनाया जाएगा। सभी निकायों से इसके लिए पैसा लिया जाएगा। उसी फंड से निजी कंपनी को भुगतान किया जाएगा। इस व्यवस्था से निकायों पर आर्थिक बोझ भी घटेगा।
अभी लखनऊ नगर निगम को एसटीपी संचालन पर सालाना करीब 125 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं, नई व्यवस्था में यह 40 करोड़ रुपये हो जाएगा। अभी प्रदेश में 99 एसटीपी हैं और 58 नए एसटीपी लगाए जाने हैं।
गोमती होगी साफ
गोमती नदी में नालों व सीवर के कारण बढ़ रहे प्रदूषण को अब ‘वन सिटी, वन ऑपरेटर’ योजना के जरिये रोका जाएगा। इसका खाका तैयार है। गोमती के साफ होने का फायदा जौनपुर को भी मिलेगा। वहां पर साफ पानी पहुंचेगा। गोरखपुर, आगरा व गाजियाबाद में नदियों के साफ होने से आसपास के जिलों को भी लाभ होगा।
प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह का कहना है, ‘वन सिटी वन ऑपरेटर’ के तहत निजी कंपनी को एसटीपी समेत पूरा सीवर सिस्टम रखरखाव के लिए दिया जाएगा। इसके लिए कई कंपनियां आगे आई हैं। इनमें से एक का चयन कर आम चुनाव के बाद काम सौंपा जाएगा। नई योजना से गोमती सहित अन्य नदियां स्वच्छ होंगी।