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डॉक्टरों की जिद ने ली सात और मरीजों की जान

Thu, 02 Jun 2016 02:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 02 Jun 2016 02:01 AM IST
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 seven patients died in KGMU.
मरीजों को लेकर इधर-उधर भाग रहे हैं तीमारदार - फोटो : amar ujala

रेजीडेंट डॉक्टरों की जिद ने बुधवार को केजीएमयू में सात और मरीजों की जान ले ली। इमरजेंसी और ओपीडी सेवाएं देख रहे वरिष्ठ चिकित्सक  बगैर रेजीडेंट के असहाय नजर आए। बहुत गंभीर मरीजों को ही सीनियर डॉक्टरों ने हाथ लगाया।

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बाकी मरीजों को हड़ताल का हवाला देकर लौटाया जाता रहा। करीब दो हजार मरीज लौटाए गए। 20 से ज्यादा ऑपरेशन टले। भर्ती मरीजों का भी बुरा हाल है। उनका इलाज सिर्फ नर्सों के भरोसे चल रहा है। उधर, रेजीडेंट डॉक्टरों के समर्थन के बाद चिकित्सा छात्र-छात्राओं ने बुधवार को अपना धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
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पीजीएमईई में प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के चिकित्सकों को 30 फीसदी अंकों की वरीयता देने को लेकर रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के चलते केजीएमयू में इलाज की व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर गई है।
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ट्रॉमा सेंटर में वरिष्ठ डॉक्टरों के बावजूद बुधवार को सांस लेने में दिक्कत के साथ भर्ती हुई छेदाना, श्रावस्ती निवासी मालती देवी, न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती कानपुर निवासी अर्पिता शुक्ला, सुल्तानपुर की जद्दो बानो और गैस्ट्रोइंट्राइटिस के गंभीर मरीज फिरोज की मौत हो गई।

इलाज के अभाव में तोड़ दिया दम

 seven patients died in KGMU.
हड़ताल के कारण पसरा सन्नाटा - फोटो : amar ujala

वहीं सुबह चार बजे सिर की चोट लगने के कारण ट्रॉमा सेंटर पहुंची आशा ने भी इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. सुरेंद्र कुमार और उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेद प्रकाश स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने में विभागों के हेड से सहयोग मांगते रहे। उन्हें चिकित्सकों की ड्यूटी लिस्ट तो मिल गई लेकिन वहां तैनात डॉक्टरों की मेहनत को कोई नतीजा नहीं निकला।

एकेडमिक काउंसिल की इमरजेंसी मीटिंग
केजीएमयू प्रशासन ने पीजी में प्रवेश को लेकर चल रही दिक्कतों से निपटने के लिए बुधवार को कार्य परिषद और शैक्षिक परिषद की आपात बैठक बुलाई। इसमें तय किया गया केजीएमयू अपनी पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों एमडी व एमएस का सत्र एक महीने बाद शुरू करेगा। हालांकि इसकी तिथि तय नहीं की गई।

कुलपति प्रो. रविकांत ने इसका आदेश भी जारी कर दिया। माना जा रहा है कि केजीएमूय प्रशासन 1 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई का इंतजार कर रहा है। इस सुनवाई में उसे उम्मीद है कि फ्रेशर छात्र-छात्राओं को वापस उनकी सीटें मिल जाएंगी।

लिंब सेंटर में अंदर से लगाया ताला
 सीनियर मरीजों को वापस लौटा रहे हैं तो जूनियर भी मनमानी पर उतारू हैं। बुधवार को जूनियर डॉक्टरों ने लिंब सेंटर में मुख्य गेट पर अंदर से ताला बंद कर लिया। इससे मरीज अंदर नहीं जा पाए।

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