गंभीर आरोप : बेसिक शिक्षा परिषद के पूर्व सचिव संजय के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू
बहराइच, लखीमपुर खीरी, फतेहपुर, इलाहाबाद, अंबेडकरनगर व अन्य कई जिलों में लगातार अनुपस्थित रहने या अन्य कारण से बर्खास्त शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए संबंधित बीएसए को आदेश देने और मृतक के आश्रितों की नियुक्ति में भी गड़बड़ी के आरोप हैं।
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बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव रहे संजय सिन्हा के खिलाफ विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। संजय के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप हैं। संजय साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा उर्दू एवं प्राचीन भाषाएं के निदेशक भी रहे हैं। शासन ने भ्रष्टाचार के आरोप में उन्हें इसी साल 5 मार्च को निलंबित कर दिया था और विजिलेंस जांच की सिफारिश की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने जुलाई में उनका निलंबन रद्द कर दिया था।
संजय पर आरोप है कि सचिव बेसिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के पद पर रहते हुए उन्होंने कई जिलों के सैकड़ों परिषदीय शिक्षकों के बीच सत्र में नियम विरुद्ध स्थानांतरण किए। बहराइच, लखीमपुर खीरी, फतेहपुर, इलाहाबाद, अंबेडकरनगर व अन्य कई जिलों में लगातार अनुपस्थित रहने या अन्य कारण से बर्खास्त शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए संबंधित बीएसए को आदेश देने और मृतक के आश्रितों की नियुक्ति में भी गड़बड़ी के आरोप हैं।
470 सरकारी कर्मियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
मौजूदा सरकार के बीते साढ़े चार साल के कार्यकाल में 470 सरकारी कर्मियों के खिलाफ विजिलेंस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं। यह आरोप पत्र 207 मामलों में दाखिल किए गए हैं। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है। विजिलेंस ने भ्रष्टाचार से संबंधित 142 मामलों में विभागीय कार्रवाई, 202 में अभियोजन, 10 मामलों में लघु दंड-वृहद दंड और सात मामलों में क्षति वसूली की कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा, बीते साढ़े चार साल में 1156 जाचें विजिलेंस को सौंपी गई। 267 मामलों में डिटेल इंवेस्टीगेशन, 497 खुली जांच, 168 गोपनीय जांच, 169 प्रकरणों में अभिसूचना संकलन और 55 मामलों में ट्रैप की कार्यवाही की गई। इस दौरान 322 मामलों में आरोप सिद्ध न होने के कारण उन्हे समाप्त कर दिया गया।