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Lucknow News: सैप्सिस एक से दूसरे में नहीं फैलता, लेकिन शरीर को पहुंचाता है गंभीर नुकसान
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प्रेसवार्ता कर सेप्सिस की जानकारी देते चिकित्सक।
लखनऊ। सेप्सिस में जरा सी लापरवाही जानलेवा हो सकती है। तेज सांस, भ्रम या बेहोशी, बहुत कम पेशाब, बेहद कमजोरी, ठंडी-चिपचिपी त्वचा या लगातार गिरता रक्तचाप जैसे संकेत दिखें तो मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। ये जानकारी केजीएमयू में पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने दी। वह शुक्रवार को सेप्सिस दिवस पर शताब्दी भवन में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
उन्हाेंने बताया कि सेप्सिस खुद एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। इसके पीछे बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से होने वाला संक्रमण हो सकता है। फेफड़े, पेशाब की नली, पेट और घाव में संक्रमण इसके प्रमुख कारण हैं। बुखार, ठंड लगना या सांस तेज चलना कई बार सामान्य संक्रमण के लक्षण लगते हैं, लेकिन यही संक्रमण शरीर के लिए गंभीर खतरा बन जाए तो वह सेप्सिस में बदल जाता है। इसमें संक्रमण के खिलाफ शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती है। इसका असर ब्लड प्रेशर और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है। गंभीर स्थिति में मरीज सेप्टिक शॉक में पहुंच सकता है।
डॉ. वेद ने बताया कि सेप्सिस में इलाज का सबसे अहम हिस्सा संक्रमण के स्रोत की पहचान और उसे काबू में करना है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार खून और अन्य नमूनों की जांच कराते हैं। बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका होने पर एंटीबायोटिक दी जा सकती है। मरीज का रक्तचाप गिरने पर नसों के जरिये तरल पदार्थ और जरूरत पड़ने पर रक्तचाप बढ़ाने वाली दवाएं दी जाती हैं। गंभीर मरीज को ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।
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उन्हाेंने बताया कि सेप्सिस खुद एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। इसके पीछे बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से होने वाला संक्रमण हो सकता है। फेफड़े, पेशाब की नली, पेट और घाव में संक्रमण इसके प्रमुख कारण हैं। बुखार, ठंड लगना या सांस तेज चलना कई बार सामान्य संक्रमण के लक्षण लगते हैं, लेकिन यही संक्रमण शरीर के लिए गंभीर खतरा बन जाए तो वह सेप्सिस में बदल जाता है। इसमें संक्रमण के खिलाफ शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती है। इसका असर ब्लड प्रेशर और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है। गंभीर स्थिति में मरीज सेप्टिक शॉक में पहुंच सकता है।
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डॉ. वेद ने बताया कि सेप्सिस में इलाज का सबसे अहम हिस्सा संक्रमण के स्रोत की पहचान और उसे काबू में करना है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार खून और अन्य नमूनों की जांच कराते हैं। बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका होने पर एंटीबायोटिक दी जा सकती है। मरीज का रक्तचाप गिरने पर नसों के जरिये तरल पदार्थ और जरूरत पड़ने पर रक्तचाप बढ़ाने वाली दवाएं दी जाती हैं। गंभीर मरीज को ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।
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