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Lucknow News: दो घंटे में होगी सेप्सिस की पहचान, आसान होगा एंटीबायोटिक का चयन

Sat, 07 Feb 2026 02:28 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 07 Feb 2026 02:28 AM IST
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Sepsis can be diagnosed within two hours, making antibiotic selection easier.
संजय गांधी पीजीआई।
लखनऊ। अब शुरुआती दो घंटे में ही सेप्सिस जैसी जानलेवा बीमारी का पता लग सकता है। इससे मरीज पर काम करने वाली एंटीबायोटिक दवाई के चयन में मदद मिलेगी और उसकी जान बचाई जा सकेगी। संजय गांधी पीजीआई में माइक्रोबायोलॉजी विभाग में यूपी-यूके माइक्रोकॉन कार्यशाला में विशेषज्ञों ने ये जानकारी दी।
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आयोजक प्रो. चिन्मय साहू और माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. रूंगमई एसके मारक ने बताया कि सेप्सिस के मरीजों में शुरुआती कुछ घंटे गोल्डन ऑवर माने जाते हैं। यदि इसी दौरान सही एंटीबायोटिक शुरू हो जाए तो मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। अभी तक इस्तेमाल की जा रही माल्टी-टॉफ तकनीक से छह से सात घंटे में सेप्सिस और मरीज पर काम करने वाली एंटीबायोटिक का पता लगाया जा सकता था। अब नई तकनीक विकसित की गई है।
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इस नई तकनीक में मरीज के रक्त में एक विशेष रसायन मिलाया जाता है, जिससे रक्त से प्रोटीन को अलग किया जाता है। इसके बाद मात्र दो घंटे के भीतर यह स्पष्ट हो जाता है कि सेप्सिस पैदा करने वाले जीवाणु पर कौन सी एंटीबायोटिक सबसे प्रभावी रहेगी। इससे डॉक्टर बहुत तेजी से सही इलाज की दिशा तय कर सकेंगे। इसमें महज दो घंटे का समय ही लगता है। सेप्सिस में देरी से दी गई गलत या कम प्रभावी एंटीबायोटिक मरीज की हालत को और बिगाड़ सकती है। ऐसे में दो घंटे में सटीक जानकारी मिलना उपचार की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।
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कार्यशाला में प्रतिभागियों को इस नई तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे कि वे अपने-अपने संस्थानों में इसे लागू कर सकें। प्रो. मारक ने कहा कि पीजीआई का उद्देश्य केवल अपने संस्थान तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि प्रदेश और पड़ोसी राज्यों में भी सेप्सिस प्रबंधन को मजबूत करना है। यह पहल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के माइक्रोबायोलॉजिस्ट को आधुनिक तकनीकों से लैस करने के उद्देश्य से आयोजित यूपी-यूके माइक्रोकॉन कार्यशाला के दौरान सामने आई है, जिसमें 120 से अधिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
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