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जलवायु परिवर्तन से खतरे में पड़ सकता है द्वीपों का अस्तित्व : डॉ. दिनेश शर्मा
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लखनऊ। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उप राज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन द्वीपों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। बढ़ता तापमान, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और चक्रवातों की बढ़ती तीव्रता इस संकट को गंभीर बना रही है। निचले स्तर पर स्थित द्वीपों के संरक्षण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने की जरूरत है।
'जलवायु परिवर्तन के दौर में द्वीपों का भविष्य : अंडमान-निकोबार के संदर्भ में' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु के बीच विकास की अवधारणा को नए सिरे से परिभाषित करना होगा। विकास ऐसा हो, जिसमें प्रकृति का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। अंडमान-निकोबार भारत के सामरिक सुरक्षा प्रहरी होने के साथ प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विविधता के प्रतीक भी हैं।
उन्होंने कहा कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर तटीय जमीन, पेयजल, कृषि और मत्स्य पालन के लिए चुनौती बन सकता है। इससे निपटने के लिए तटीय वनों और प्रवाल भित्तियों का संरक्षण जरूरी है। स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना होगा। स्थानीय और जनजातीय समाज का अनुभव भी इस संकट से निपटने में उपयोगी साबित हो सकता है। इस अवसर पर वैज्ञानिक डॉ. सीएम नौटियाल, डॉ. मुकुंद शर्मा, डॉ. ध्रुवसेन सिंह सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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'जलवायु परिवर्तन के दौर में द्वीपों का भविष्य : अंडमान-निकोबार के संदर्भ में' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु के बीच विकास की अवधारणा को नए सिरे से परिभाषित करना होगा। विकास ऐसा हो, जिसमें प्रकृति का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। अंडमान-निकोबार भारत के सामरिक सुरक्षा प्रहरी होने के साथ प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विविधता के प्रतीक भी हैं।
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उन्होंने कहा कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर तटीय जमीन, पेयजल, कृषि और मत्स्य पालन के लिए चुनौती बन सकता है। इससे निपटने के लिए तटीय वनों और प्रवाल भित्तियों का संरक्षण जरूरी है। स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना होगा। स्थानीय और जनजातीय समाज का अनुभव भी इस संकट से निपटने में उपयोगी साबित हो सकता है। इस अवसर पर वैज्ञानिक डॉ. सीएम नौटियाल, डॉ. मुकुंद शर्मा, डॉ. ध्रुवसेन सिंह सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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