11 सीटों के लिए वोटिंग कल, आज जानिए सूरत-ए-हाल
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दूसरे चरण का मतदान 17 अप्रैल को होना है, जिसमें मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका प्रमुख है तो मेनका गांधी और धर्मेंद्र यादव जैसे दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है।
इनमें कहीं जाति तो कहीं धर्म के आधार पर वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिशें चल रही हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में सपा ने यहां सर्वाधिक चार सीटें जीती थीं।
कांग्रेस को तीन, भाजपा को दो और बसपा-रालोद को एक-एक सीट मिली थी। विधानसभा चुनाव में भी सपा का प्रदर्शन शानदार रहा था और सपा के 32, बसपा के 11, भाजपा के सात और कांग्रेस के तीन विधायक जीते थे।
एक-एक सीट पीस पार्टी और इत्तेहाद-ए-मिल्ली कौंसिल को मिली थी। दूसरे चरण में सपा के सामने पिछले चुनावों का प्रदर्शन दोहराने की बड़ी चुनौती है।
मुस्लिमों के गढ़ में मोदी का दावा
इस इलाके की कई सीटों पर मुस्लिम आबादी 35 से 52 फीसदी तक है। जाहिर है, अधिकांश सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक हैं।
उनका ध्रुवीकरण किसी भी प्रत्याशी को दिल्ली पहुंचाने में मददगार साबित हो सकता है। वर्ष 2009 में यहां कई सीटों पर भाजपा मुख्य मुकाबले से बाहर रही थी लेकिन इस बार अधिकांश सीटों पर मजबूती से लड़ती नजर आ रही है।
इस दौर में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी, संतोष गंगवार, सपा के धर्मेन्द्र यादव, कांग्रेस के सलीम शेरवानी, जफर अली नकवी और बेगम नूर बानो समेत कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
यहां मुकाबले में हैं कई
उनका मुकाबला भाजपा के डॉ. यशवंत सिंह और बसपा के गिरीश चंद से है। यहां का 35-40 फीसदी मुस्लिम वोटर अगर बंटता है तो भाजपा की राह आसान हो जाएगी, लेकिन सपा या बसपा के पक्ष में इकतरफा मतदान किया तो नतीजा किसी के भी पक्ष में जा सकता है।
कांग्रेस-रालोद समर्थित महान दल के भगवान दास, पीस पार्टी के शीशराम रवि और आम आदमी पार्टी की सारिका चौधरी मुकाबले को बहुकोणीय बनाने की कोशिश कर रही हैं।
यहां ध्रुवीकरण की पूरी संभावना
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की संभावना वाली इस सीट का नतीजा काफी कुछ जातीय गणित पर निर्भर करेगा।
मुरादाबाद: मुरादाबाद में सपा, बसपा, कांग्रेस और पीस पार्टी ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। सभी अपना मुकाबला भाजपा के ठाकुर सर्वेश सिंह से मान रहे हैं।
सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मतदान शुरू होने तक वोटों के ध्रुवीकरण क्या तस्वीर बनती है। यहां बसपा से पूर्व मंत्री हाजी याकूब, सपा से पूर्व मेयर डॉ. एसटी हसन, कांग्रेस से पूर्व सांसद बेगम नूरबानो और पीस पार्टी से इंजीनियर इरफान मैदान में हैं।
यहां मुकाबला त्रिकोणीय है
यहां सपा प्रत्याशी को उनकी सहमति के बिना उतारा गया है। यहां भी मुस्लिम वोट का रुझान काफी हद तक चुनावी रुख तय करेगा।
रामपुर: इस सीट पर सपा के कद्दावर नेता और नगर विकास मंत्री आजम खां का इम्तिहान होना है। सपा ने यहां से नसीर अहमद खां को चुनाव मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने उनके प्रतिद्वंदी काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां को टिकट दिया है।
बसपा से हाजी अकबर अली और भाजपा से एमएलसी नैपाल सिंह उम्मीदवार है। 52 फीसदी मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर मुसलमानों का समर्थन किसी भी प्रत्याशी का पलड़ा झुका सकता है। भाजपा मोदी लहर और मुस्लिम वोटों के बंटवारे की उम्मीद में जीत की संभावना तलाश रही हैं।
दांव पर धर्मेन्द्र की प्रतिष्ठा
कांग्रेस ने गठबंधन में यह सीट महान दल के लिए छोड़ी है। महान दल ने स्वामी पगलानंद और आम आदमी पार्टी ने हेमा मेहरा को मैदान में उतारा है। इस सीट पर धर्मेन्द्र की प्रतिष्ठा दांव पर है।
आंवला: सपा ने तीन बार सांसद रह चुके कुंवर सर्वराज सिंह, भाजपा ने धर्मेन्द्र कश्यप, कांग्रेस ने पांच बार बदायूं के सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे सलीम इकबाल शेरवानी, बसपा ने दातागंज के विधायक सिनोद कुमार शाक्य उर्फ दीपू की पत्नी सुनीता शाक्य को मैदान में उतारा है।
पिछली बार यहां से मेनका गांधी चुनाव जीती थीं। उनके मुकाबले सपा के धर्मेन्द्र कश्यप लड़े थे। धर्मेन्द्र पाला बदलकर भाजपा में चले गए थे। इस सीट पर सपा, कांग्रेस और बसपा की नजरें मुस्लिम वोटों पर टिकी हैं।
बरेली और पीलीभीत
गंगवार पिछला चुनाव हार गए थे। उनके साथ ही यहां ऐरन की प्रतिष्ठा फंसी हुई है। कांग्रेस और सपा को मुस्लिम वोटों से बहुत उम्मीदें हैं।
पीलीभीत: यहां एक बार फिर मेनका गांधी मैदान में हैं। वे चार बार पीलीभीत और एक बार आवंला से सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं।
उनके मुकाबले बसपा ने पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूलबाबू, कांग्रेस ने बिलासपुर (रामपुर) के विधायक संजय कपूर और सपा ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बुद्धसेन वर्मा को मैदान में उतारा है। सभी प्रत्याशी मुख्य मुकाबला मेनका से मान रहे हैं। इस सीट पर मुस्लिम वोटों का रुझान हासिल करने वाला ही मेनका से मुकाबला करेगा।
धार्मिक समीकरणों को साधने की कोशिशें
इस सीट पर भाजपा ने निघासन के विधायक अजय मिश्र उर्फ टेनी, सपा ने पूर्व सांसद रवि प्रकाश वर्मा और बसपा ने तीन बार विधायक रहे अरविंद गिरि को टिकट दिया है। इस सीट पर जातीय और धार्मिक समीकरणों को साधने की कोशिशें हो रही हैं।
शाहजहांपुर: इस सुरक्षित सीट पर 2009 में सपा के मिथलेश कुमार ने जीत दर्ज की थी। वह फिर से सपा प्रत्याशी हैं। उनकी पत्नी पुवायां से विधायक हैं। देखना है कि वह दुबारा दिल्ली पहुंचते हैं या नहीं।
भाजपा ने मोहम्मदी की पूर्व विधायक कृष्णाराज, बसपा ने फूलन देवी के पति उम्मेद सिंह और कांग्रेस ने पुवायां से चार बार विधायक रह चुके चेतराम को मौका दिया है। उम्मेद सिंह पिछला लोकसभा कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे।
2009 में ये था परिणाम
लोकसभा चुनाव 2009 के नतीजे:सपा-4, कांग्रेस-3, भाजपा-2, बसपा-1, रालोद-1
विधानसभा चुनाव 2012 के नतीजे:सपा-33, बसपा-11, भाजपा-7, कांग्रेस-3, पीस पार्टी-1
नोट:बरेली के भोजीपुरा से इत्तेहाद ए मिल्ली कौंसिल के प्रत्याशी जीते थे लेकिन अब वे सपा में शामिल हो गए हैं।