सड़क बनाने के नाम पर नहीं हो पाएगा गोलमाल!
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शहरों में सड़क बनाने के नाम पर होने वाले गोलमाल पर रोक लगाने की तैयारी है। निकायों को सड़क बनाते समय प्रस्ताव में इस बात का अनिवार्य रूप से जिक्र करना होगा कि इसके पहले यह कब बनी थी।
स्थानीय निकाय निदेशालय ने नगर निगम, पालिका परिषद और नगर पंचायतों से यह भी पूछा है कि उनके यहां कितनी पक्की, कितनी अर्द्धपक्की व कितनी कच्ची सड़कें हैं। निकायों से 25 मई तक यह ब्यौरा निदेशालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
शहरी क्षेत्रों में सड़क बनाने की जिम्मेदारी नगर निगम, पालिका परिषद व नगर पंचायतों की है। निकायों में रोड रजिस्टर बनाने की व्यवस्था है। सड़क बनाते समय इस रजिस्टर में अनिवार्य रूप से जिक्र करना होता है कि इसके पहले इसका निर्माण कब हुआ था।
इसके बावजूद इंजीनियर और ठेकेदार की मिलीभगत से रोड रजिस्टर में पूरा ब्यौरा नहीं रखा जाता है और सड़क बनाने के लिए तैयार होने वाली फाइल में इसका जिक्र किया जाता है। इसके चलते निकायों में सड़क निर्माण के नाम पर आए दिन धांधली की शिकायतें मिलती रहती हैं।
मांगी पूरी जानकारियां
स्थानीय निकाय निदेशक अविनाश कृष्ण सिंह ने नगर आयुक्त व अधिशासी अधिकारियों को भेजे पत्र में सड़कों के बारे में पूरी जानकारी मांगी है। इसमें पूछा गया है कि उनके यहां कितनी सड़कें हैं।
वर्ष 2014 में कितनी लंबी सड़कें बनवाई गईं और इस पर कितना खर्च किया गया। इनमें से कितनी नई और कितनी पुरानी सड़कें हैं तथा इनके रख-रखाव की क्या व्यवस्था की गई है।
ये जानकारियां भी मांगीं
स्थानीय निकाय निदेशालय ने निकायों से तालाब, पोखरा, झील की भी सूचनाएं मांगी हैं। यह भी पूछा गया है कि कुल कितने हैंडपंप हैं। इनमें कितने चालू और कितने खराब हैं।
निकायों में कितनी पशु वधशालाएं हैं, कितने शौचालय व मूत्रालय बनवाए गए हैं। शहरों में प्रतिदिन कितना कूड़ा निकलता है। कुल कितने टन कूड़े का निस्तारण हो रहा है और इससे निकायों को कितनी आय हो रही है।