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आईसीडीएस विभाग में बाबुओं के प्रमोशन में घोटाले का मामला, अब जांच समिति पर उठ रहे सवाल

Mon, 17 Jun 2019 09:49 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Mon, 17 Jun 2019 09:49 PM IST
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scam in clerk promotion in icds department : now questions are raised on investigation team
investigation

बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में बाबुओं के प्रमोशन में घोटाले की जांच के लिए गठित समिति पर सवाल उठने लगे हैं। बाल विकास मंत्री अनुपमा जायसवाल ने जो जांच समिति गठित की है, उसमें विभाग के ही विशेष सचिव व निदेशक को रखा गया है। इसलिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि इस जांच का भी वही हश्र होगा, जो इससे पहले कई जांचों की हो चुकी है।

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बता दें, विभागीय मंत्री के निर्देश पर जांच समिति में विशेष बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार गया प्रसाद और निदेशक शत्रुघ्न सिंह को रखा गया है। हालांकि जिन मामलों की जांच होनी है, वह इन दोनों अधिकारियों के मौजूदा पद संभालने के पहले की है। अलबत्ता शत्रुघ्न सिंह उस समय अपर निदेशक के पद पर निदेशालय में तैनात थे। 
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ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि नियमों को ताक पर रखकर कई प्रमोशन पाने वाले बाबुओं के कारगुजारी की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि विभागीय अधिकारियों की टीम उस गहराई तक शायद ही जांच कर पाए।
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वैसे यह आशंका निराधार नहीं है। पहले भी कई जांचें हुईं, लेकिन विभागीय स्तर पर जांच होने से कोई सुधार नहीं हुआ। नतीजतन बाबुओं का समूह जहां जमा था, वहीं जमा रहा और काल्पनिक पदों पर प्रमोशन का खेल चलता रहा है। संगठन का पदाधिकारी होने के नाते वर्षों से मलाईदार पद पर जमे बाबुओं को हटाने की हिम्मत किसी ने नहीं जुटाई। 

...तो मामले को रफा-दफा करने के लिए विभागीय जांच समिति

बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय में आग लगने की घटना, वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच हो चुकी है। पर, इन सभी प्रकरणों में विभागीय स्तर पर जांच समितियां गठित करके मामले को रफा-दफा कर दिया गया। 

बाबुओं के समूह के कारनामों की तमाम शिकायतें निदेशालय से लेकर शासन तक दबी पड़ी हैं। सभी मामलों में विभागीय जांच समिति बनाकर लीपापोती कर दी गई। लिहाजा प्रमोशन घोटाले के मौजूदा मामले में गठित विभागीय समिति से निष्पक्ष व पारदर्शी जांच को लेकर आशंका पैदा हो गई है। 

निदेशालय के एक पत्र की खूब हो रही चर्चा 
अनियमित प्रमोशन के खेल में शामिल दो बाबुओं के पक्ष में निदेशालय से शासन को भेजे गए एक पत्र की काफी चर्चा है। सूत्रों का कहना है कि जिस दिन प्रमोशन घोटाले की खबर ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित हुई, उसके अगले दिन ही निदेशालय से शासन को एक पत्र भेजा गया। 

इसमें लिखा है कि एक संगठन का अध्यक्ष व महामंत्री होने के नाते दोनों बाबुओं को मुख्यालय से हटाया जाना मुमकिन नहीं है। इनमें से एक बाबू वही है, जिन्हें एक ही दिन में दो प्रमोशन दिया गया, जबकि दूसरा बाबू पिछले 15-20 साल से निदेशालय में जमा हैं और सारे खेल का मास्टरमाइंड भी हैं।

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