फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   SC decision on minority status of AMU has been described as historic by Ulema and organizations

UP: मुस्लिमों ने दान से समुदाय की शिक्षा के लिए की थी AMU की स्थापना, संगठनों ने SC के फैसले का किया स्वागत

Fri, 08 Nov 2024 08:44 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Fri, 08 Nov 2024 08:44 PM IST
सार

मुस्लिमों ने दान से समुदाय की शिक्षा के लिए AMU की स्थापना की थी। उलमा और संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। 

विज्ञापन
SC decision on minority status of AMU has been described as historic by Ulema and organizations
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की अल्पसंख्यक स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उलमा और संगठनों ने ऐतिहासिक बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1967 के अपने उस निर्णय को पलट दिया। इसमें कहा गया था कि एएमयू को एक अधिनियम के तहत बनाया गया था। इसलिए वह अल्पसंख्यक दर्जे का दावा नहीं कर सकता है। अब एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर एक नियमित बेंच के समक्ष विचार किया जाएगा कि क्या वास्तव में इसे अल्पसंख्यकों द्वारा स्थापित किया गया था।
विज्ञापन


इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि एएमयू की स्थापना मुस्लिमों द्वारा, मुस्लिम शिक्षा के लिए, मुस्लिम समुदाय के दान से की गई थी। ऐसे में एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान नहीं माना जाएगा, तो किस संस्थान को अल्पसंख्यक संस्थान कहा जाएगा। फिर अनुच्छेद 30 का वास्तविक अर्थ क्या है?
विज्ञापन


यह भी पढ़ेंः- UP By-Election: पोस्टर-वार में कूदी कांग्रेस, लिखा- '...हम इंडिया गठबंधन के सिपाही मोहब्बत की दुकान खोलेंगे'
विज्ञापन
विज्ञापन

सुप्रीम का निर्णय अल्पसंख्यक अधिकारों की जीत : शोएब

एएमयू ओल्ड ब्यॉज एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष एसएम शोएब ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समानता व अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण जीत बताया। कहा कि फैसला सभी अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए एक मिसाल साबित होगा, जो भारत के सामाजिक न्याय और समानता विमर्श में योगदान देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि नवगठित तीन जजों की बेंच का फैसला एएमयू ही नहीं बल्कि देश के हित में होगा।

एएमयू दे रहा बेहतर तालीम : यासूब

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि कुछ लोगों दिलों में एएमयू और उसका अल्पसंख्यक दर्जा कांटे की तरह चुभता है। एएमयू बेहतर शिक्षा के लिए जाना जाता है और मुस्लिम समुदाय में विभिन्न क्षेत्रों के लिए काबिल लोग तैयार किए हैं। उम्मीद है कि तीन जजों की बेंच भी अपना यही फैसला देगी।


यह भी पढ़ेंः- UP News: एक्शन में डिप्टी सीएम, सीएचसी कर्मियों पर गिराई गाज; वेतन रोका... जवाब किया तलब, मुकदमा भी होगा दर्ज

अल्पसंख्यकों के शैक्षिक संस्थानों को मिलेगी मजबूती : तारिक

एएमयू ओल्ड ब्यॉज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष तारिक सिद्दीकी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सिर्फ एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे का मामला नहीं है बल्कि फैसले ने संविधान के अनुच्छेद 30 को और मजबूत किया है। 

इसके तहत सभी अल्पसंख्यकों मुसलमान, सिख, इसाई, पारसी व बौद्ध आदि को अपने समुदाय के विकास के लिए शैक्षिक संस्थान बनाने और उन्हें संचालित करने का अधिकार देता है। कोर्ट के फैसले ने उन लोगों को राहत दी है जिन्होंने शैक्षिक संस्थान बनाए हैं या बनाने वाले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed