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Lucknow News: एक साथ बंटेंगे चार वर्षों के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
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एसएनए की इमारत।
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लखनऊ। संगीत, नृत्य, वाद्य और रंगकर्म में उत्कृष्ट योगदान के लिए हर वर्ष उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से कलाकारों को पुरस्कारों की घोषणा की जाती थी। लेकिन 2021 से 2024 के बीच अकादमी पुरस्कारों की कोई घोषणा नहीं की गई। इससे कलाकारों में निराशा है। हालांकि, अकादमी ने तय किया है कि पिछले वर्षों के पुरस्कारों को इसी वर्ष एक साथ बांटा जाएगा। जल्द ही आवेदन प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों की घोषणा वर्ष 2021 से नहीं हुई है। 2020 में जो आवेदन किए गए थे, 2023 में उन आवेदनों के लिए पुरस्कार बांटे गए थे। ये पुरस्कार ऐसे कलाकारों को दिए जाते रहे हैं जो प्रदेश में जन्मे हों या फिर जिनका कार्यक्षेत्र प्रदेश में 10 या अधिक वर्ष का रहा हो। संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित नाहर के मुताबिक, पुरस्कारों के लिए प्रक्रिया शुरू हो रही है, जल्द ही आवेदन मांगे जाएंगे।
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उन्होंने बताया कि 2021 से लेकर 2024 तक के पुरस्कारों की घोषणा एक साथ की जाएगी। उम्मीद है कि अगस्त तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। पुरस्कार राशि बेहद कम होने के सवाल पर उन्होंने बताया कि पुरस्कार राशि में बढ़ोतरी के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। हरी झंडी मिलने पर राशि बढ़ाई जा सकती है।
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इन चार श्रेणियों में मिलते हैं पुरस्कार
अकादमी की ओर से चार श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाने की परंपरा है। नाट्य कला के लिए अकादमी सम्मान, प्रतिष्ठित कलाकारों के लिए अकादमी रत्न पुरस्कार, नाट्य निर्देशन के लिए बीएम शाह पुरस्कार और सफदर हाशमी पुरस्कार दिए जाते हैं।
इससे पहले भी 10 वर्षों के पुरस्कार एक साथ दिए गए थे
उप्र संगीत नाटक अकादमी की ओर से पुरस्कारों के कई वर्षों तक न बांटे जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी लंबे समय बाद वर्ष 2009 से लेकर 2018 तक के अकादमी पुरस्कार एक साथ बांटे गए थे। तब लखनऊ के हिस्से में 38 पुरस्कार आए थे।
फोटो))बेहद कम है पुरस्कार में मिलने वाली धनराशि
उप्र संगीत नाटक अकादमी की ओर से प्रतिष्ठित पुरस्कार के तहत सिर्फ 10 हजार रुपये, ताम्रपत्र व अंगवस्त्र दिया जाता है। वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी ने बताया कि कई बार मैंने व अन्य वरिष्ठ कलाकारों ने भी पुरस्कार राशि बढ़ाने की मांग अकादमी से की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि उन्हें 1984 में जब अकादमी पुरस्कार दिया गया था, तब पुरस्कार राशि सिर्फ पांच हजार थी। वर्तमान में इसे कम से कम 51 हजार होना चाहिए। बीएनए और हिंदी संस्थान ने सम्मान राशि बढ़ाई है, लेकिन एसएनए ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।