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सियासत: दलित वोट बैंक को अपने खेमे में लामबंद करने में जुटी सपा, बाबा साहेब वाहिनी गठन की कवायद तेज
Tue, 13 Jul 2021 08:49 AM IST
शाहरुख खान
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 13 Jul 2021 08:49 AM IST
सार
पार्टी में सक्रिय कई दलित चेहरे इसकी जिम्मेदारी संभालने के लिए निरंतर प्रदेश कार्यालय की परिक्रमा कर रहे हैं। सपा के रणनीतिकारों का कहना है कि पार्टी में हर वर्ग के लोग हैं। लेकिन वोट बैंक के रूप में मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण को ही अहम माना गया है। जबकि बसपा के साथ दलित वोट बैंक हैं।
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
विस्तार
सपा की निगाह अब दलित वोट बैंक पर है। इसे अपने पाले में करने का प्रयास है। इसका आधार बनेगी बाबा साहेब वाहिनी। इसके गठन की कवायद तेज कर दी गई है। वाहिनी की कमान दलित युवाओं को देने की तैयारी है। राष्ट्रीय नेतृत्व ऐसे चेहरे को वाहिनी की जिम्मेदारी देना चाहता है, जो निर्विवाद होने के साथ उच्च शैक्षणिक योग्यता भी रखता हो।
दलितों से जुड़े मुद्दे को लेकर संघर्ष करने का माद्दा रखता हो। कई संभावित चेहरों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। सपा ने गत 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाई थी। पार्टी कार्यालय से लेकर जिला कार्यालय तक दीपोत्सव मना और लोहिया वाहिनी की तर्ज पर बाबा साहेब वाहिनी गठन की रूपरेखा तैयार हुई।
पार्टी में सक्रिय कई दलित चेहरे इसकी जिम्मेदारी संभालने के लिए निरंतर प्रदेश कार्यालय की परिक्रमा कर रहे हैं। सपा के रणनीतिकारों का कहना है कि पार्टी में हर वर्ग के लोग हैं। लेकिन वोट बैंक के रूप में मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण को ही अहम माना गया है। जबकि बसपा के साथ दलित वोट बैंक हैं।
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बदले सियासी समीकरण को ध्यान में रखते हुए सपा दलित वोट बैंक को अपने साथ लेने की ख्वाहिशमंद है। विभिन्न विश्वविद्यालयों में दलित छात्रनेताओं की नई पौध तैयार हुई है। सपा इन्हें अपने पाले में करना चाहती है। पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि सपा जाति, धर्म से ऊपर उठकर जनता के हितों की रक्षा करने वालों को तवज्जो देते है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में हर वर्ग के लोग पार्टी से जुड़ रहे हैं।
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दलितों से जुड़े मुद्दे को लेकर संघर्ष करने का माद्दा रखता हो। कई संभावित चेहरों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। सपा ने गत 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाई थी। पार्टी कार्यालय से लेकर जिला कार्यालय तक दीपोत्सव मना और लोहिया वाहिनी की तर्ज पर बाबा साहेब वाहिनी गठन की रूपरेखा तैयार हुई।
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पार्टी में सक्रिय कई दलित चेहरे इसकी जिम्मेदारी संभालने के लिए निरंतर प्रदेश कार्यालय की परिक्रमा कर रहे हैं। सपा के रणनीतिकारों का कहना है कि पार्टी में हर वर्ग के लोग हैं। लेकिन वोट बैंक के रूप में मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण को ही अहम माना गया है। जबकि बसपा के साथ दलित वोट बैंक हैं।
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बदले सियासी समीकरण को ध्यान में रखते हुए सपा दलित वोट बैंक को अपने साथ लेने की ख्वाहिशमंद है। विभिन्न विश्वविद्यालयों में दलित छात्रनेताओं की नई पौध तैयार हुई है। सपा इन्हें अपने पाले में करना चाहती है। पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि सपा जाति, धर्म से ऊपर उठकर जनता के हितों की रक्षा करने वालों को तवज्जो देते है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में हर वर्ग के लोग पार्टी से जुड़ रहे हैं।
बढ़ रहा है कुनबा
पार्टी रणनीतिकारों का कहना है कि विभिन्न दलों के दलित नेता लगाता पार्टी के संपर्क में हैं। इन्हें शामिल करने से पहले जिला कमेटी से परामर्श लिया गया है। जिनके नाम पर कमेटी ने हरी झंडी दी है, उन्हें शामिल कर लिया गया। कुछ की ज्वाइनिंग अभी फंसी हुई है। उम्मीद है कि 15 जुलाई को तहसील स्तर पर होने वाले प्रदर्शन के बाद बड़ी संख्या में दलित नेता सपा की सदस्यता लेंगे।