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अयोध्या: संत बोले, खुदाई में मिले अवशेष करीब दो हजार साल पुराने, मंदिर की प्रामाणिकता कर रहे साबित

Thu, 21 May 2020 08:36 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 21 May 2020 08:36 PM IST
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Saints of Ayodhya speaks on parts of temple found in Ayodhya.
खुदाई में मिले अवशेष

अयोध्या के रामजन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण के लिए पुराने गर्भगृह स्थल पर चल रहे समतलीकरण के दौरान मिल रहे मंदिर के अवशेष रामजन्मभूमि की प्रमाणिकता पुष्टि कर रहे हैं। रामनगरी के संतों का मानना है कि जो अवशेष मिल रहे हैं वह करीब दो हजार वर्ष पुराने हैं।

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संतों ने इन अवशेषों को अमूल्य, धार्मिक धरोहर बताते हुए रामजन्मभूमि परिसर में ही संग्रहालय बनाकर संरक्षित करने की मांग उठाई है ताकि राममंदिर की प्रमाणिकता का इतिहास हमेशा जीवंत रहे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राममंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में समतलीकरण के दौरान खुदाई में देवी-देवताओं की मूर्तियां, शंख, चक्र, शिवलिंग की आकृति, ब्लैक टच स्टोन, सैंड स्टोन सहित अन्य अवशेष प्राप्त हो रहे हैं।
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रामनगरी के संतों का कहना है कि खुदाई में मिल रहे अवशेष सनातन धर्म, संस्कृति के धार्मिक गौरव की महत्ता दर्शा रहे हैं। संतो ने यह भी कहा कि भूमि विवाद में लंबे समय तक चली अदालती कार्रवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के मंदिर के हक में दिए गये फैसले की भी ये अवशेष पुष्टि कर रहे हैं।

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अवशेषों को संग्रहालय बनाकर किया जाए संरक्षित: महंत कमलनयन

Saints of Ayodhya speaks on parts of temple found in Ayodhya.
महंत कमलनयन दास - फोटो : amar ujala

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास का कहना है कि पहले से ही भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर उस स्थान पर था। आक्रांताओं ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाया।

समतलीकरण के दौरान मिल रहे पुरावशेषों से साबित हो रहा है कि वहां बहुत विशाल मंदिर था। अभी और भी तमाम अवशेष खुदाई में मिलेंगें इसमें कोई संशय नहीं है। राममंदिर की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए इन अवशेषों को संग्रहालय बनाकर संरक्षित किया जाना चाहिए।

दो हजार वर्ष पुराने हो सकते हैं अवशेष: सत्येंद्र दास

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आचार्य सत्येंद्र दास। - फोटो : amar ujala

श्रीरामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि समतलीकरण में जो अवशेष मिल रहे हैं उससे साबित होता है कि वहां पहले ही दिव्य-भव्य रामलला का मंदिर था, मस्जिद मंदिर तोड़कर बनाई गयी थी।

शंख, चक्र, त्रिशूल, आमलक की आकृतियां दर्शाती हैं कि जो लोग कह रहे थे कि वहां मंदिर नहीं है, उन्हें अब सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो अवशेष मिल रहे हैं कि वे करीब दो हजार वर्ष पुराने हो सकते हैं, यह अवशेष हिंदू संस्कृति के प्रतीक हैं इन्हें परिसर में ही संरक्षित किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी मिला बल: कन्हैया दास

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महंत कन्हैया दास। - फोटो : amar ujala

संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राममंदिर के हक में जो निर्णय दिया है खुदाई में मिल रहे अवशेषों से सुप्रीम फैसले को भी बल मिल रहा है।

राममंदिर के अस्तित्व को नकारने वालों के लिए ये अवशेष बड़े सबूत के रूप में सामने आए हैं। अभी तो और गहराई तक खुदाई होगी तब और अवशेष मिलेंगे। ये पुरावशेष सनातन संस्कृति के प्रतीक हैं इसलिए इनका संरक्षण किया जाना चाहिए।

विदेशी आक्रांताओं ने मंदिर तोड़कर बनाया था मस्जिद: राजूदास

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पुजारी राजूदास - फोटो : amar ujala

हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने कहा कि पिछले कई दिनों से राममंदिर निर्माण के लिए चल रहे समतलीकरण के कार्य में विभिन्न प्रकार के अवशेष मिले हैं, जिसमें कसौटी दार खंभे, चक्र, धनुष बने स्तंभ, देवी-देवताओं की खंडित प्रतिमा यह सभी इस बात को स्पष्ट करते हैं कि यही स्थान भगवान श्रीराम का जन्म स्थान है।

यहां करीब दो हजार वर्ष पूर्व महाराज विक्रमादित्य ने मंदिर निर्माण कराया था जिसे कुछ विदेशी आक्रांताओं ने तोड़कर मस्जिद का आकार दिया था। अब खुदाई में मिल रहे अवशेष मंदिर की प्रमाणिकता सिद्ध कर रहे हैं।

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