फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Rudra Samvatsara begins on 19th, Navami on 27th

Lucknow News: 19 से रौद्र संवत्सर की शुरुआत, 27 को नवमी

Wed, 11 Mar 2026 02:30 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 11 Mar 2026 02:30 AM IST
विज्ञापन
Rudra Samvatsara begins on 19th, Navami on 27th
19 से रौद्र संवत्सर की शुरुआत, 27 को नवमी
लखनऊ। विक्रम संवत 2083 रौद्र संवत्सर की शुरुआत 19 मार्च से होने जा रही है। इसी दिन नवरात्र का पहला दिन होगा जिसमें कलश स्थापना के साथ प्रथम शैलपुत्री का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। 27 मार्च को नवमी मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, संवत्सर संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ वर्ष होता है। हिंदू पंचांग में 60 संवत्सर होते हैं। जैसे प्रत्येक माह के नाम होते हैं, उसी तरह प्रत्येक वर्ष के भी अलग-अलग नाम होते हैं। जैसे 12 माह होते हैं, उसी तरह 60 संवत्सर होते हैं। संवत्सर अर्थात बारह महीने का कालविशेष। रौद्र संवत्सर 54वां संवत्सर है। रौद्र संवत्सर व संवत 2083 के राजा इस बार ग्रह गुरु होंगे और मंत्री होंगे मंगल। इस मंत्रिमंडल में 8 पद शुभ ग्रहों के पास तो 2 पद अशुभ ग्रहों के पास होंगे।
विज्ञापन

ज्योतिषाचार्य पुनीत वार्ष्णेय के अनुसार, अन्योन्यं नृपसंक्षोभं चौरव्याघ्रादिभि: भयम्। मध्यवृष्टि: अनर्घत्वं रौद्राब्जे नैव गुर्जरे। अर्थात् रौद्र नामक संवत्सर में राजाओं में क्षोभ के अलावा चोरी व व्याघ्रादि भय, मध्य वृष्टि और महंगाई की आशंका बढ़ती है। 2083 विक्रम संवत् रौद्र संवत्सर और नवरात्र का प्रारंभ 19 मार्च से होगा क्योंकि 19 को लखनऊ में सूर्योदय 06:12 पर होगा। 19 मार्च को सूर्योदय के समय अमावस्या, उसके बाद चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि क्षय के कारण सुबह 6:54 से 20 मार्च को 04:53 बजे तक है।
विज्ञापन


इस संवत्सर का राजा गुरु, मंत्री- मंगल, सस्येश- गुरु, धान्येश- बुध, मेघेश- चंद्र, रसेश- शनि, नीरसेश- गुरु, फलेश- चंद्र, धनेश- गुरु, दुर्गेश- चंद्र है। इस मंत्रिमंडल में 8 पद शुभ ग्रहों के पास और 2 पद अशुभ ग्रहों के पास हैं। 2083 संवत के मंत्रिमंडल में ज्यादातर पद शुभ ग्रहों के पास होने से शुभ फल प्राप्त होने की संभावना अधिक है। मान्यता है कि ग्रह गुरु के राजा होने से चारों ओर पृथ्वी तल पर यज्ञ, धान्य व वृष्टि से पृथ्वी परिपूर्ण होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


नव संवत्सर पर करें धर्म-ध्वजा का पूजन

ज्योतिषाचार्य पुनीत वार्ष्णेय ने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर घर को साफकर, परिवार के सभी लोग स्वच्छ वस्त्र पहनकर कलश तथा धर्म-ध्वजा की स्थापना करें। उसके पश्चात देव-देवी एवं धर्म-ध्वजा का पूजन करें। साथ ही नए संवत्सर का फल सुनना चाहिए। इस दिन वर्ष भर निरोग रहने के लिए नीम की मुलायम पत्ती व फल, जीरा, काली मिर्च, हींग, नमक पीसकर खाना चाहिए। यथाशक्ति दान करना चाहिए। संभव हो तो कीर्तन भी जरूर करें।


कलश स्थापना का समय
19 मार्च, बृहस्पतिवार को तिथि क्षय के कारण अभिजित मुहूर्त में 11:50 से 12:38 तक उत्तम और उसके बाद शाम 6:17 बजे तक कलश स्थापना कर सकते है। जो श्रद्धालु राम नवमी उत्सव मनाने के कारण अष्टमी में ही पारण करते है उन्हें 26 मार्च दिन बृहस्पतिवार को ही नवरात्र का हवन आदि संपन्न कर पारण करना चाहिए।

एक नजर में... नवरात्र की तिथियां

19 मार्च, बृहस्पतिवार, प्रतिपदा- शैलपुत्री पूजन।

20 मार्च, शुक्रवार, द्वितीया- ब्रह्मचारिणी पूजन।

21 मार्च, शनिवार, तृतीया- चंद्रघंटा पूजन।

22 मार्च, रविवार, चतुर्थी- कुष्मांडा देवी पूजन।

23 मार्च, सोमवार, पंचमी- स्कंदमाता पूजन।

24 मार्च, मंगलवार, षष्ठी- कात्यायनी देवी पूजन।

25 मार्च, बुधवार, सप्तमी- कालरात्रि पूजन।

26 मार्च, बृहस्पतिवार, अष्टमी- महागौरी पूजन।

27 मार्च, शुक्रवार, नवमी- सिद्धिदात्री पूजन।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed