LU: गर्ल्स हॉस्टल के शर्मनाक वीडियो पर हाई वोल्टेज ड्रामा
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लखनऊ विश्वविद्यालय के कैलाश हॉस्टल में लड़कियों के साथ लड़के के होली खेलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सामने आए वीडियो के आधार पर कहा जा रहा है कि छात्राओं के साथ होली खेलने वाला लड़का हॉस्टल की प्रोवोस्ट का बेटा है।
मामले पर हंगामा होने पर विश्वविद्यालय के कुलपति एसबी निमसे ने प्रोवोस्ट को जांच चलने तक हॉस्टल के बाहर जाने का निर्देश दे दिया था, लेकिन उनके आदेश को नहीं माना गया।
कुलपति ने रविवार को निर्देश दिए थे कि जब तक जांच चल रही है राजनीतिशास्त्र विभाग की प्रो. मनुका खन्ना कैलाश छात्रावास की प्रोवोस्ट का कार्यभार संभालेंगी। साथ ही प्रो. शीला मिश्रा जांच पूरी होने तक कैलाश छात्रावास में नहीं जाएंगी।
कुलपति के निर्देश के बावजूद प्रो. शीला मिश्रा ने सोमवार देर शाम तक छात्रावास नहीं छोड़ा और परिसर के अंदर ही रहीं। वहीं, कैलाश छात्रावास का मामला अब और गर्माता जा रहा है। इसकी शिकायत राज्यपाल तक पहुंच गई है।
प्रोवोस्ट बोलीं-छात्राएं नहीं जाने दे रहीं
विश्वविद्यालय के चीफ प्रोवोस्ट प्रो. एसपी त्रिवेदी ने बताया कि जब प्रो. शीला मिश्रा से हॉस्टल छोड़ने को कहा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि वह तो जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन छात्राएं उनको जाने नहीं दे रहीं।
चीफ प्रोवोस्ट के अनुसार प्रो. शीला मिश्रा ने उनसे कहा है कि उनको बाहर निकलवाया जाए। इसके बाद प्रो. त्रिवेदी ने मामले की जानकारी कुलपति प्रो. एसबी निमसे और चीफ प्रॉक्टर प्रो. निशि पांडेय को दी।
हालांकि, इसके बाद भी देर शाम तक प्रो. शीला हॉस्टल में बनी रहीं। वहीं, समाजवादी छात्र सभा का कहना है कि जिसके खिलाफ शिकायत है यदि वह छात्रावास में ही बना रहेगा तो जांच कैसे संभव होगी।
फूहड़ वीडियो बना रहा चर्चा का विषय
समाजवादी छात्र सभा ने रविवार को कैलाश छात्रावास का जो वीडियो सार्वजनिक किया था वह सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है।
सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों से लेकर कर्मचारियों तक में वीडियो को लेकर चर्चा होती रही। जिसने भी वीडियो को देखा शर्मनाक बताया।
सभी ने कहा कि हॉस्टल परिसर में इस तरह की हरकत निंदनीय है। सूत्रों के मुताबिक, कैलाश हॉस्टल में सोमवार को राजनीतिक गलियारे के कुछ लोगों का भी आना हुआ।
छात्रा ने लगाई सुरक्षा की गुहार
हॉस्टल में चल रहे इस विवाद के दौरान ही सोमवार को एक छात्रा ने चीफ प्रोवोस्ट और चीफ प्रॉक्टर के पास सुरक्षा की गुहार लगाई है।
कैलाश छात्रावास की इस छात्रा ने अपनी लिखित शिकायत में कहा है कि हॉस्टल की कुछ लड़कियां उसको यह कहते हुए परेशान कर रही हैं कि प्रोवोस्ट के खिलाफ शिकायत और वीडियो उसी ने दिए हैं।
इसे लेकर उसे अश्लील टिप्पणियां करने के साथ ही मारने-पीटने की धमकी दी जा रही है। छात्रा ने कहा कि उसे डर है कि इस मामले में उसके अभिभावकों को भी परेशान किया जा सकता है। इसीलिए उसने सुरक्षा की मांग की है।
कर्मचारियों ने भी दी हमले की मौखिक जानकारी
चीफ प्रोवोस्ट प्रो. एसपी त्रिवेदी ने बताया कि जांच के दौरान उक्त छात्रा से भी पूछताछ की गई थी। मगर, उसने कहा कि वह न तो प्रोवोस्ट के पक्ष में कुछ कहना चाहती है और न विपक्ष में। वह केवल अपनी पढ़ाई करना चाहती है।
वहीं, हॉस्टल के कर्मचारियों ने भी प्रॉक्टोरियल बोर्ड को मौखिक जानकारी दी है कि उनके ऊपर भी हॉस्टल में हमला हुआ है।
कर्मचारियों के मुताबिक, रविवार रात जब प्रो. शीला को बाहर जाना था तो छात्राओं ने उन्हें रोकने के लिए गेट पर हंगामा किया।
इसकी सूचना चीफ प्रॉक्टर प्रो. निशि पांडेय को दी गई तो उन्होंने निर्देश दिए कि कर्मचारी गेट पर ताला लगा दें और छात्राएं बाहर न जा पाएं। जब गार्ड और कर्मचारियों ने ऐसा किया तो छात्राएं उनसे हाथापाई पर उतर आईं।
लगातार हो रहे बवाल से बढ़ी छात्राओं की मुश्किलें
हॉस्टल में चल रही इस गहमा-गहमी के चलते परीक्षा की तैयारी कर रहीं छात्राओं का काफी नुकसान हो रहा है। हॉस्टल की कुछ छात्राओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह किसी मामले में नहीं पड़ना चाहती, लेकिन माहौल ऐसा हो चुका है कि वह पढ़ाई नहीं कर पा रहीं।
उधर, सोमवार को भी जांच समिति ने अपना काम जारी रखा। समिति में शामिल एक सदस्य ने स्वीकार किया कि हॉस्टल में जाकर जांच करना मुश्किल हो रहा है। इसके दो कारण हैं।
पहला कि प्रो. शीला का वहां मौजूद होना और दूसरा कि जो छात्राएं उनके समर्थन में हैं उनके सामने अन्य छात्राओं से वार्ता नहीं की जा सकती। संभव है कि वह दबाव में सही बात न बताएं। इसीलिए सोमवार को हॉस्टल के बाहर से ही जांच की गई।
2005 में भी हुआ था ऐसा ही ड्रामा
वर्ष 2005 में भी विवि में इसी तरह का ड्रामा हुआ था। उस समय प्रो. शीला मिश्रा मैनेजमेंट गर्ल्स हॉस्टल की प्रोवोस्ट थीं। कुछ आरोप लगने के बाद उन्हें वहां से हटा दिया गया। तब भी उन्होंने अपने आवास पर ताला लगा दिया था, जिसे बाद में प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने तोड़ा था। उस समय भी उन्होंने वहां से हटने में काफी आनाकानी की थी।
राज्यपाल तक पहुंचा मामला
कैलाश छात्रावास का मामला राज्यपाल राम नाईक तक भी पहुंच गया है। सोमवार को राज्यपाल एक कार्यक्रम में शामिल होने विवि आए तो समाजवादी छात्रसभा ने उन्हें ज्ञापन देकर पूरे मामले से अवगत कराया।
छात्रनेता अनिल यादव, अंकित सिंह, राकेश ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि प्रोवोस्ट के खिलाफ कुछ माह पहले भी कुलपति से शिकायत की गई थी, लेकिन तब उन्हें बिना वहां से हटाए ही जांच की गई।
छात्रसभा का आरोप है कि डरा-धमकाकर व भावनात्मक भाषण देकर कुछ छात्राओं को प्रोवोस्ट के पक्ष में किया गया है। इनका कहना है कि विवि प्रशासन के कुछ चेहरे वर्षों से एक ही पद पर जमे हैं, जिनमें से एक यह प्रोवोस्ट भी हैं।
राज्यपाल के अधीन कमेटी बनाकर जांच करने की मांग
छात्रसभा ने विवि प्रशासन की कमेटी की जगह राज्यपाल के अधीन एक स्वतंत्र कमेटी से जांच कराने, पूर्व में टीएसी कमेटी की जांच में लिप्त पाए लोगों पर कार्रवाई करने, कैलाश छात्रावास के सभी स्टाफ को बदलने जैसी मांगें रखी हैं।
इस मामले पर विवि के चीफ प्रोवोस्ट प्रो. एसपी त्रिवेदी का कहना है कि आवास न छोड़ने की बात से कुलपति और चीफ प्रॉक्टर को अवगत करा दिया गया है। जिस छात्रा ने सुरक्षा मांगी थी उसकी लिखित मांग चीफ प्रॉक्टर को दे दी गई है। साथ ही उसे कहा गया है कि वह जब चाहेगी उसे दूसरे हॉस्टल में भी शिफ्ट कर दिया जाएगा।
वहीं लविवि के चीफ प्रॉक्टर प्रो. निशि पाण्डेय का कहना है कि चीफ प्रोवोस्ट से मिले पत्र के आधार पर छात्रा की सुरक्षा के लिए एडिशनल प्रॉक्टर्स को वहां भेजा गया और हॉस्टल की नई प्रोवोस्ट को भी छात्रा का ध्यान रखने के लिए सूचित किया गया है।
पीड़ित छात्रा ने कुछ अन्य छात्राओं पर धमकाने का आरोप लगाते हुए शिकायत की है कि उससे जबरदस्ती कुबूल करवाया जा रहा है कि उसने शिकायत की है। इस बारे में कुलपति से वार्ता करके आगे का निर्णय लिया जाएगा।