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लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंची जेएनयू की आग, दो घंटे बवाल

Thu, 25 Feb 2016 12:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 25 Feb 2016 12:57 AM IST
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ruckus in lu over jnu issue.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में चल रहे देशद्रोह के मामले की आग बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में भड़क उठी। विवि के समाजशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राजेश मिश्रा ने देशद्रोह के आरोपी छात्र उमर खालिद से जुड़ा एक लेख अपने फेसबुक वॉल पर अपलोड किया जिसमें लेखक ने उमर खालिद को बेटा कहते हुए उसका पक्ष लिया है।

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जैसे ही यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता व विश्वविद्यालय के छात्र अनुराग तिवारी की अगुवाई में कार्यकर्ता व छात्र विरोध करते हुए समाजशास्त्र विभाग जा पहुंचे।
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कार्यकर्ताओं ने कक्षाएं बंद कराकर विभाग का गेट बंद करा दिया। प्रो. राजेश मिश्रा का पुतला भी फूंका।

करीब दो घंटे से ज्यादा चले बवाल के बाद मौके पर पहुंचे कुलपति प्रो. एसबी निमसे से आश्वासन मिलने के बाद छात्र शांत हुए। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने प्रो. राजेश को बर्खास्त कर उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की।
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लगाए नारे-जो अफजल की चाल चलेगा, वो अफजल की मौत मरेगा

ruckus in lu over jnu issue.

मौके पर प्रो. राजेश मिश्रा के न मिलने पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। ‘जो अफजल की चाल चलेगा, वो अफजल की मौत मरेगा...’, ‘जेएनयू और कश्मीर हमारा है, और सारा का सारा है...’ सहित ‘प्रो. राजेश मुर्दाबाद...’ जैसे नारे लगाए। कार्यकर्ताओं ने कक्षाएं बंद कराकर विभाग का गेट बंद करा दिया।

मौके पर बुलाने के लिए अड़े, अर्थी बनाई, पुतला फूंका
मामले की जानकारी होने पर मौके पर पहुंचीं चीफ प्रॉक्टर प्रो. निशी पांडेय और पुलिस प्रशासन ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं को समझाने की काफी कोशिशें की, लेकिन वे प्रो. राजेश को वहां बुलाए जाने पर अड़े रहे।हालांकि छुट्टी पर होने के चलते प्रो. राजेश नहीं आए।

प्रॉक्टर से नोकझोंक

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एबीवीपी कार्यकर्ता प्रो. राजेश की प्रतीकात्मक अर्थी तैयार करने के साथ ही विभाग के सामने उनका पुतला फूंकने की तैयारी करने लगे। इसको लेकर चीफ प्रॉक्टर से उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई।

अनुराग तिवारी व अन्य कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे लोग विभाग से लेकर गेट नंबर एक तक पुतला निकालना चाहते हैं जिससे सभी को पता चले कि प्रो. राजेश जैसा देशद्रोही विवि का शिक्षक हैं।

लेकिन प्रो. निशी पांडेय ने छात्रों को परिसर में नारेबाजी और प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी, जिसके बाद पुतला उनकी मौजूदगी में वहीं फूंका गया।

कुलपति बोले, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था

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लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने कहा कि स्टूडेंट्स से शिकायत मिली थी कि प्रो. राजेश मिश्रा ने अपने फेसबुक वॉल पर कुछ ऐसा लिखा है जो उन्हें नहीं लिखना चाहिए था। इस मामले में स्टूडेंट्स का मांग पत्र लेने के साथ ही प्रो. राजेश से पूछा गया है कि उनकी अपनी इस मुद्दे पर क्या राय है। प्रो. राजेश का पक्ष आने के बाद आगे कुछ कहा जा सकता है।

वहीं, फेसबुक पर ये पोस्ट डालने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्‍त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश मिश्रा का कहना है कि मैं किसी भी राष्ट्रविरोधी कृत्य या नारों के सख्त खिलाफ हूं।

फेसबुक का पोस्ट दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद के एक लेख जो कि इंडियन एक्सप्रेस में 23 फरवरी को छपा था, को शेयर किया गया है। इस लेख के कुछ कथनों को मैंने शब्दश: उद्धृत किया है। मेरा इस बारे में स्पष्ट विचार है कि युवा को घोर अपराधी घोषित करने से पूर्व उनके वास्तिवक दृष्टिकोण को समझना चाहिए। ताकि उनका खामखां में भविष्य बर्बाद न हो।

यही अध्यापकों व बौद्धिकों का धर्म है। आने वाले समय में कोई विरोधी सरकार यदि abvp के बच्चों के विरोध में कुछ करेगी तो हम सरीखे ही, उनके दृष्टिकोण को मद्देनजर रखने की बात करेंगे।

ये है बवाल की असली वजह

ruckus in lu over jnu issue.

असल में एक अंग्रेजी दैनिक में प्रो. अपूर्वानंद का लेख छपा था जिसमें उन्होंने उमर खालिद को अपना बेटा बताया है। इसी पोस्ट को प्रो. राजेश मिश्रा ने अपने फेसबुक वॉल पर शेयर किया।

इसके साथ ही लेख की शुरुआती पंक्तियां (‘‘मैं कहना चाहता हूं कि उमर मेरा बेटा है। मैं उससे कभी नहीं मिला। मैं उसे जानता भी नहीं। लेकिन फिर भी मैं उसे अपना बेटा होने का दावा करता हूं।’’... ‘‘उमर खुद को बिना सीमाओं वाले व्यक्ति केेरूप में देखता है।’’... उमर कोई कायर नहीं है, उसमें पर्याप्त साहस है कि वह पक्षपाती व कट्टर खफा लोगों का सामना कर सके।’’) भी लिख दीं।

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