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यहां सूचना विभाग से ही नहीं मिलती 'सूचना'
अजीत बिसारिया/लखनऊ
Updated Wed, 23 Oct 2013 12:47 PM IST
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सरकारी विभागों से सूचना न मिलने पर जुर्माना लगाने वाले राज्य सूचना आयोग से ही सूचना पाना आसान नहीं है।
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पहले तो यहां अर्जी रिसीव कराने में ही नाको चने चबाने पड़ जाते हैं, फिर एक लाइन का जवाब मिलता है- मांगी गई सूचना के लिए आयोग की वेबसाइट देखें।
हाल ही में जुर्माने की वसूली के बाबत मांगी गई सूचना के मामले में यही जवाब मिला है। खास बात यह कि यह सूचना वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है।
सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत राज्य सूचना आयोग से पूछा गया था कि एक जनवरी 2012 से 31 अगस्त 2013 तक आयोग ने कितने अफसरों पर सूचना न देने के लिए जुर्माना लगाया और इनमें से कितने अफसरों से जुर्माने की वसूली हो पाई।
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आयोग के जन सूचना अधिकारी माता प्रसाद ने दिए गए जवाब में कहा है कि ‘जिन अधिकारियों पर सूचनाएं मुहैया न कराने पर जुर्माना लगाया गया है, उनके नाम, विभागों के नाम, वसूली की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई की संस्तुति आदि की सूचना के लिए कृपया आयोग की वेबसाइट देखें।’
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वेबसाइट देखने पर पता चला कि इस पर वसूली की स्थिति नहीं दी गई है। आयोग के ही कर्मचारियों ने बताया कि वसूली हुई या नहीं, यह सूचना आयोग के पास उपलब्ध ही नहीं होती। इसलिए वेबसाइट पर अपलोड करने का सवाल ही नहीं पैदा होता।
यही नहीं, जब सूचना के लिए दस रुपये के शुल्क के साथ आयोग में संपर्क किया गया था तो बताया गया कि जन सूचना अधिकारी छुट्टी पर हैं, इसलिए अर्जी नहीं ली जा सकती।
जबकि जवाब देने वाले जन सूचना अधिकारी माता प्रसाद उस दिन दफ्तर में मौजूद थे। हालांकि, उसी दिन यह अर्जी डाक सेक्शन में रिसीव करा दी गई थी।
क्या कहता है अधिनियम
सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 25 में कहा गया है कि राज्य सूचना आयोग साल के अंत के बाद यथाशीघ्र उस साल के दौरान अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन के संबंध में एक रिपोर्ट तैयार करेगा।
प्रत्येक मंत्रालय या विभाग अपनी अधिकारिता के भीतर लोक प्राधिकारियों के संबंध में ऐसी सूचनाएं इकट्ठा करके राज्य सूचना आयोग को उपलब्ध कराएगा।
मतलब, अगर इस धारा का अनुपालन किया जाता तो जुर्माना और वसूली की स्थिति के संबंध में सूचना अवश्य उपलब्ध होती।
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