अयोध्या पर फैसले से पहले संघ ने कसी कमर, अपनों को काबू करने के लिए बनाई रणनीति
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अयोध्या मामले पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीख नजदीक आने के साथ ही अपने संगठनों के लोगों को काबू में रखने के लिए कमर कस ली है।
संघ ने अपने पदाधिकारियों व सक्रिय कार्यकर्ताओं को बयानबाजी और सोशल मीडिया पर टिप्पणियां करने से रोक लगाने के बाद संगठनों की सद्भाव समितियों के जरिये हिंदू समाज और सामान्य कार्यकर्ताओं से संपर्क व संवाद शुरू कर दिया है।
यह समितियां हर परिस्थिति में शांति व धैर्य से रहने का आग्रह कर रही हैं। समितियों के पदाधिकारी लोगों को समझा रहे हैं कि फैसला जो भी आए उसे धैर्य व संयम से सुने।
निर्णय को न तो किसी की जीत मानें और न किसी की हार। फैसला पक्ष में आए तो खुशियां मनाने की जरूरत नहीं है और अपेक्षा के अनुरूप न होने पर आक्रोश भी व्यक्त न करें। कोई ऐसा काम न करें, जिससे समाज में विभाजन और तनाव की परिस्थितियां बनें और असामाजिक तत्वों को मौका मिले।
छोटे-छोटे समूह से बनाकर मोर्चा बंदी
समाज में सौहार्द कायम रखने के लिए संघ ने अति उत्साही व असामाजिक तत्वों पर निगाह रखने के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे समूह बनाने को कहा है।
संगठनों के स्थानीय पदाधिकारियों को समूह बनाकर गांव या मोहल्ले में लोगों से संपर्क व संवाद रखने के साथ ही मुस्लिम बस्तियों में जाकर उन्हें समझाना और मेलजोल बनाए रखने का आग्रह करना होगा।
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच इस दिशा में पहले से ही कार्य कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि हर जिले की जिम्मेदारी किसी न किसी प्रमुख पदाधिकारी को दी गई है जो सभी से समन्वय बनाकर शांति व सौहार्द पर नजर रखेगा।