गांधी हत्या का दाग धोने के लिए संघ ने बनाया प्लान
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‘गांधी-दीनदयाल का सहारा और स्वदेशी का नारा’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बदली परिस्थितियों में बदले मूड के सहारे लोगों को जोड़ने की कार्ययोजना बनाई है। इसमें जहां स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने पर जोर दिया जाएगा, वहीं महात्मा गांधी व दीनदयाल उपाध्याय के विचारों के जरिये लोगों तक पहुंचने की कोशिश भी होगी।
मकसद गांधी की हत्या को लेकर कुछ राजनीतिक दलों के आरोपों को झूठा साबित करना हो या सांप्रदायिक संगठन के आरोपों को दुष्प्रचार साबित करने का प्रयास।
संघ ने स्वदेशी जागरण मंच के जरिये पूरे देश में लोगों के बीच यह बात पहुंचाने की योजना बनाई है कि उसे गांधी का दुश्मन बताने वाले खुद स्वराज व स्वदेशी की विचारधारा के बड़े दुश्मन हैं। वास्तव में गांधी के हिंद स्वराज और उपाध्याय के एकात्म मानववाद में कोई अंतर नहीं है।
पूर्वांचल के विश्वविद्यालयों पर होगा फोकस
गांधी और उपाध्याय दोनों ही स्वदेशी आधारित अर्थव्यवस्था के पक्षधर थे। इसलिए संघ परिवार गांधी का विरोधी हो ही नहीं सकता। यह अभियान गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी (वाराणसी) से शुरू किया जा रहा है।
पहले दिन बीएचयू में राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। इसके बाद 27 सितंबर को इलाहाबाद विवि, 29 को पूर्वांचल विवि जौनपुर और 30 को गोरखपुर विवि में कार्यक्रम होंगे।
गांधी जयंती पर 2 अक्तूबर को इलाहाबाद के गांधी विचार एवं शांति अध्ययन केंद्र में ‘वैश्वीकरण की चुनौतियां व गांधी का हिंद स्वराज’ सम्मेलन के साथ पहला चरण पूरा होगा। इन संगोष्ठियों में विश्वविद्यालय के आसपास के जिलों से स्कूल व कॉलेजों को छात्रों को भी बुलाया गया है।
पहले चरण में मुख्य फोकस पूर्वांचल के विश्वविद्यालयों के छात्रों पर रहेगा। बाद में इसे देश के दूसरे स्थानों में ले जाया जाएगा। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में ऐसे नौजवानों को जोड़ना है जो संघ पर होने वाले वैचारिक हमलों का सटीक जवाब दे सकें।
इसलिए काशी से शुरुआत
अभियान की शुरुआत काशी से करने के पीछे भी वजह है। सूत्रों की मानें तो संघ यह संदेश देना चाहता है कि भाजपा के सत्ता में आने के बावजूद संघ अपने सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए पहले की तरह ही तत्पर है।
स्वदेशी जागरण मंच के काशी प्रांत के संयोजक डॉ. निरंजन कहते भी हैं कि महात्मा गांधी व दीनदयाल उपाध्याय दोनों का ही मानना था कि अर्थव्यवस्था समाज में अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की चिंता करने वाली हो।
हमारा मानना है कि एफडीआई से देश की अर्थव्यवस्था सुधरने वाली नहीं है। इसलिए प्रधानमंत्री जी अपने संसदीय क्षेत्र व आसपास के इलाकों के बंद उद्योग-धंधों के लिए ‘स्वदेशी आधारित विकास मॉडल’ लेकर आएं। सरकार पर स्वदेशी मॉडल से विकास का दबाव डाला जाएगा।