संघ के लिए यूपी अहम, जल्द सामने आएगी रणनीति
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक 27 अक्तूबर से एक नवंबर तक रांची (झारखंड) में होगी। बैठक के एजेंडे में उत्तर प्रदेश में संघ परिवार के कामकाज की स्थिति और भविष्य की चुनौतियां पर चर्चा भी शामिल है। पिछले साल लखनऊ में हुई बैठक में तय काम और उन पर अमल की भी समीक्षा इस बैठक में होगी। इसीलिए उत्तर प्रदेश के लोगों को लखनऊ बैठक में लिए गए फैसलों पर अमल के ब्यौरे सहित बुलाया गया है।
लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा को जबर्दस्त सफलता मिलने के बावजूद पिछले साल अक्तूबर में लखनऊ में हुई कार्यकारी मंडल की बैठक में सूबे को लेकर खासी चिंता जताई गई थी। साथ ही माहौल में हुए बदलाव का लाभ उठाते हुए संगठन के कामकाज को ज्यादा मजबूत बनाने की योजना बनाई गई थी।
इसमें मुख्य मार्गों के किनारे स्थित गांवों में संघ की शाखाओं का विस्तार और इन शाखाओं में दलितों व पिछड़ों की भागीदारी बढ़ाने का काम भी शामिल था। इसके लिए प्रचारकों को गांव व बस्तियों को गोद लेने के निर्देश दिए गए थे। स्वाभाविक रूप से रांची बैठक में इन सब पर हुए काम की समीक्षा होगी।
उठेगा आरक्षण का मुद्दा : देश में इस समय आरक्षण का मुद्दा काफी चर्चा में है। प्रमोशन में आरक्षण को लेकर यूपी मुख्य रूप से फोकस में है। अनुसूचित जाति के कर्मचारी प्रमोशन में आरक्षण की बहाली की मांग पूरी करने के लिए लोकसभा में लंबित संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
आरक्षण मुद्दे पर भी होगी चर्चा
संघ परिवार जिस तरह हिंदुओं को लामबंद करने की कोशिश में जुटा है और दलित व पिछड़े समाज पर उसका फोकस है, उसे देखते हुए इस मुद्दे की फांस निकालने पर भी चर्चा स्वाभाविक है। जिससे यूपी में डेढ़ साल बाद होने वाले चुनावी समर के लिहाज से भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के संघ के सपने को पूरा करने की राह में कोई रोड़ा न बने।
सियासी समीकरणों की भी होगी चर्चा : लखनऊ बैठक के बाद से अब तक सूबे के सियासी समीकरणों में कई बदलाव हुए हैं। मोदी के धुर विरोधी मुलायम इस समय विरोध भूलकर प्रधानमंत्री के प्रशंसक जैसी भूमिका में हैं। स्वाभाविक रूप से इससे नफा-नुकसान के आकलन पर रांची में चर्चा होगी।
राम मंदिर का मुद्दा भी किसी न किसी रूप में विचार के लिए आना ही है। इस नाते भी यूपी की स्थितियों पर चर्चा स्वाभाविक है। वैसे तो रांची बैठक में बिहार चुनाव के फीडबैक और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भगवा टोली की रणनीति पर चर्चा होगी, पर जिस तरह भगवा टोली यूपी में 2017 में सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है, उस नाते प्रदेश भाजपा की दशा और नए अध्यक्ष के बारे में भी कुछ न कुछ निष्कर्ष इस बैठक से ही निकलेगा।