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संघ भी कूदा भाजपा के साथ चुनावी मैदान में
अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ
Updated Mon, 02 Dec 2013 08:49 PM IST
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लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारियां तो काफी पहले से चल रही हैं। पर, अब संघ ने भी तैयारी शुरू कर दी है।
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संघ की तरफ से भाजपा का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल को सौंपने का निश्चय किया गया है।
वह फिलहाल उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के सिलसिले में यह जिम्मेदारी निभाएंगे। अभी तक संघ की तरफ से पूरे देश की भाजपा की जिम्मेदारी सहसरकार्यवाह सुरेश सोनी के पास है।
भाजपा के बारे में उनकी भूमिका को फैसले का आधार बनाया जाता है। संकेत यह भी है कि निकट भविष्य में डॉ. गोपाल के कंधों पर अन्य राज्यों की जिम्मेदारी भी आ सकती है।
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डॉ. गोपाल को उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में भाजपा की जिम्मेदारी देने का निश्चय लोकसभा चुनाव को लेकर सामने खड़ी चुनौतियों के मद्देनजर किया गया है। वनस्पति शास्त्र से पीएचडी डॉ. गोपाल उत्तर प्रदेश के ही रहने वाले हैं।
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कृष्ण गोपाल को इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद भाजपा की नीतिनिर्धारण व निर्णयों में उत्तर प्रदेश की भूमिका और बढ़ जाएगी।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) रामलाल उत्तर प्रदेश के ही हैं।
महत्वपूर्ण निश्चय
डॉ. कृष्ण गोपाल को भले ही अभी सीधे तौर पर दो राज्यों की ही जिम्मेदारी सौंपी गई हो। पर, इस निश्चय से यह साफ हो गया है कि पूरा संघ परिवार लोकसभा चुनाव के मद्देनजर खासतौर से उत्तर प्रदेश को लेकर काफी चिंतित और गंभीर है।
इसकी वजह भी है। लोकसभा की 80 सीटों वाले इस राज्य पर भी मोदी के मिशन और भाजपा को सत्ता मिलने का पूरा दारोमदार टिका है।
इसलिए संघ की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश से ठीक-ठाक और उम्मीद के मुताबिक सीटें निकल आएं जिससे दिल्ली में सरकार बनने का रास्ता आसान हो जाए।
संघ में विभिन्न दायित्वों की जिम्मेदारी निभा चुके डॉ. कृष्ण गोपाल न सिर्फ उत्तर प्रदेश के बारे में जमीनी जानकारी रखते हैं।
साथ ही संघ के लंबे समय तक सरकार्यवाह रहे स्व. शेषाद्रि के सहायक के रूप में वह पूरे देश के विभिन्न प्रांतों के बारे में भी काफी गहरी जानकारी वाले माने जाते हैं। प्रदेश के सभी जिलों में उनके भरोसे के तमाम लोग हैं।
संघ की सीधी कमान
डॉ. गोपाल को ऐसा प्रचारक माना जाता है जो बड़ी से बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बावजूद निचले स्तर तक सीधे संवाद रखते आए हैं।
संघ के लोगों का कहना है कि संघ परिवार में खासतौर से उत्तर प्रदेश में जमीनी कार्यकर्ताओं व नेताओं के बीच संवादहीनता की स्थिति खड़ी हो गई है।
उससे निपटने के लिए विभिन्न स्तर पर तमाम उपाय करने के बाद कोई नतीजा न निकलने के कारण स्थिति बहुत ही चिंताजनक है।
मोदी के मिशन को कामयाब बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सहित बिहार व अन्य कई राज्यों में भाजपा की सीटों में बढ़ोतरी जरूरी है। जो मौजूदा स्थिति में कहीं से भी संभव नहीं दिख रही है।
इसीलिए एक ऐसे शख्स की जरूरत थी जो दो टूक फैसला ले सके और बिना किसी लाग-लपेट के संघ नेतृत्व के सामने पूरी स्थिति को रख सके। माना जा रहा है कि इस निश्चय का भाजपा की रीतिनीति पर भी काफी असर पड़ेगा।
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