रोहतास बिल्डर्स की 80 करोड़ की संपत्ति कुर्क : हजरतगंज और बादशाहनगर की संपत्तियां आईं कार्रवाई की जद में
रोहतास बिल्डर्स के सीएमडी सहित सभी निदेशकों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है। पुलिस ने 14 जून को नोटिस चस्पा कर ग्रुप के सभी निदेशकों की संपत्तियों को संबद्ध कर दिया था।
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रोहतास बिल्डर्स के खिलाफ सख्ती शुरू हो गई है। पुलिस ने मंगलवार को इसकी हजरतगंज और बादशाहनगर में मौजूद 80 करोड़ की संपत्तियों को कुर्क कर इन पर रिसीवर बैठा दिया। वहीं, 36 करोड़ की संपत्तियां बुधवार को कुर्क होंगी। रोहतास बिल्डर्स के सीएमडी सहित सभी निदेशकों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है। पुलिस ने 14 जून को नोटिस चस्पा कर ग्रुप के सभी निदेशकों की संपत्तियों को संबद्ध कर दिया था। इसके 21वें दिन कुर्की की कार्रवाई शुरू की गई है। कोर्ट के आदेश पर पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने इसका निर्देश दिया था।
प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज अखिलेश कुमार मिश्रा और गौतमपल्ली के प्रभारी निरीक्षक सुखबीर सिंह भदौरिया की संयुक्त टीम ने करीब तीन घंटे तक कार्रवाई की। इस दौरान हजरतगंज और महानगर के बादशाहनगर स्थित सभी संपत्तियों पर सीलबंदी कर रिसीवर बैठा दिए गए। रोहतास बिल्डर्स के मालिक परेश रस्तोगी, पीयूष रस्तोगी, पंकज रस्तोगी, कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट नितिन भाटिया के खिलाफ हजरतगंज थाने में गैंगस्टर का केस दर्ज किया गया था।
प्रभारी निरीक्षक गौतम पल्ली सुखबीर सिंह भदौरिया ने विवेचना के दौरान आरोपियों की संपत्तियों को चिह्नित किया। इसके बाद कोर्ट से इन्हें कुर्क करने का आदेश हासिल किया गया। कोर्ट ने संपत्तियां जब्त करने के बाद एसीपी हजरतगंज व प्रभारी निरीक्षक गौतमपल्ली को इनका रिसीवर नियुक्त कर दिया।
इन संपत्तियों को किया गया जब्त
पुलिस के मुताबिक राणा प्रताप मार्ग स्थित कैलाश बिल्डिंग, केएस ट्राईडेंट बिल्डिंग, अयोध्या हाईवे पर बादशाहनगर स्थित मेट्रो स्टेशन के पास का भवन, राजाराम मोहन राय मार्ग के पास पशुपति अपार्टमेंट की संपत्तियों को जब्त कर लिया गया है। वहीं, गुडंबा के कुर्सी रोड स्थित जेनेसिस क्लब के नाम से कंस्ट्रक्शन व भूखंड को भी जल्द जब्त किया जाएगा। पुलिस ने चार लग्जरी गाड़ियों व हजरतगंज के एसबीआई, एचडीएफसी बैंक में जमा रकम को भी संबद्ध किया है।
15 साल में अरबों की अवैध संपत्ति
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक परेश रस्तोगी ने वर्ष 2007 में प्रॉपर्टी के कारोबार में कदम रखा और रोहतास प्रोजेक्ट प्रा. लि. कंपनी खोलकर जमीनों की खरीद-फरोख्त शुरू की। भवन भी बनाकर बेचे। आरोप है कि कंपनी के नाम से बेनामी संपत्तियां भी बनाई गईं। 15 साल में अरबों की अवैध संपत्तियां खड़ी कर लीं। कंपनी में परेश के भाई व दोनों बेटे प्रमुख पदों पर थे। सभी ने मिलकर अवैध कमाई की। शुरुआती दौर में परेश ने आवासीय व व्यावसायिक भवन बनाकर बेचना शुरू किया। इससे उसने खुद को बाजार में स्थापित किया। फिर इसी साख के दम पर लोगों से आवासीय व व्यावसायिक भवनों, जमीनों के नाम पर अरबों का निवेश कराया, लेकिन उन्हें भवन व प्लॉट नहीं दिए।
पांच साल में चार थानों में 82 मुकदमे
एसीपी हजरतगंज अखिलेश कुमार सिंह के मुताबिक परेश रस्तोगी पर पांच सालों में राजधानी के हजरतगंज, गौतमपल्ली, विभूतिखंड व गोसाईंगंज थाने में 82 मुकदमे दर्ज हैं। सबसे अधिक 61 केस हजरतगंज थाने में, दो चिनहट व एक गौतमपल्ली में दर्ज है। विभूतिखंड थाने में 18 मुकदमे हैं।
इसके अलावा कानपुर, गोरखपर सहित कई जिलों में केस दर्ज हैं, जिनकी सूची मंगवाई जा रही है। रोहतास बिल्डर्स के निदेशकों के खिलाफ लखनऊ पुलिस ने 2019 में गिरोहबंद की कार्रवाई की थी। इस दौरान कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट को गिरफ्तार किया था। हालांकि, सीएमडी परेश रस्तोगी, उसका भाई पीयूष रस्तोगी, पंकज रस्तोगी व दीपक रस्तोगी फरार चल रहे हैं। पुलिस ने परेश को गिरोह का सरगना बताया है। सभी आरोपियों के खिलाफ 2019 में लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था।