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रोबोटिक सर्जन ने बताए गले की गांठ ठीक करने के आसान तरीके

Mon, 18 Feb 2019 06:32 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Mon, 18 Feb 2019 06:32 PM IST
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robotic surgeons told the easy methods to cure cancer in neck
thyroid - फोटो : file photo
ओपेन सर्जरी से रोबोटिक सर्जरी तक के सफरनामे से कैंसर के मरीजों की जान बचाना आसान हुआ है। अब गले की गांठ की जांच के लिए नई तकनीक अपनाई जा रही है। सेंटीनल एलएन बायोप्सी में गांठ के अंदर स्याही डाली जाती है। इससे जितना हिस्सा नीला पड़ जाता है, उसे निकाल दिया जाता है। बाकी हिस्से को छोड़ दिया जाता है। यह कहना है सर्बिया के बेल्ग्रेड से आईं डॉ. नाडा सेंनट्रस का। वह शनिवार को एसजीपीजीआई में इंटरनेशनल सोसायटी आफ आंकोप्लास्टिक इंडोक्राइन सर्जन्स एंव इंडियन सोसायटी ऑफ थायरॉइड सर्जन्स (आईएसटीएस) की ओर से आयोजित साइंटिफिक प्रोग्राम में सेंटीनल एनएल बायोस्पी पर व्याख्यान दे रही थीं। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्थानों से आए रोबोटिक सर्जन्स ने बताया कि जिन स्थानों पर सर्जरी के ज्यादा मरीज हों या विशेषज्ञों को सर्जरी करने में वक्त आड़े आ रहा हो, वहां रोबोटिक सर्जरी को वरीयता देनी चाहिए। विषेशज्ञों ने कहा कि 40 से अधिक सर्जरी करने वाले को ही विशेषज्ञ समझा जाना चाहिए। 
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कटी नस को जोड़ना अब मुमकिन
थायरॉइड सर्जरी के दौरान गले की नस के कटने से मरीज की आवाज जाने का खतरा रहा है। कटी नस को जोड़ना मुमकिन है। कुछ मरीजों की कटी हुईं नसें जोड़कर उनकी आवाज वापस लाने में सफलता हासिल हुई है। भविष्य में भारत में किसी आपरेशन के दौरान नस कटती है तो मरीज की आवाज वापस लाई जा सकेगी। अभी इस तकनीक का नामकरण नहीं किया गया है। यह जानकारी डॉ. अकीरा मियूची ने दी। वहीं सियोल के डॉ. जून यांग ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी के दौरान कोई नस कट जाए तो उसे किस तरह से जोड़ा जा सकता है। इसी तरह डॉ. गौरव अग्रवाल, डॉ. मनीष कौशल ने थायरॉइड से होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी दी। मुंबई की डॉ. ज्योति डभोलकर ने थायरॉइड कैंसर में होने वाले मॉलीक्यूलर टेस्ट के बारे में बताया।
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रेडियो आयोडिन से ठीक होता है गले का कैंसर

पीजीआई के डॉ. सबरत्नम एम थायरॉइड कैंसर में घबराने की जरूरत नहीं है। इसमें कीमोथेरेपी भी नहीं की जाती है। इसके लिए रेडियो आयोडिन पिलाया जाता है। इससे मरीज की रिकवरी तेज होती है। वहीं पीजीआई के सीएमएस प्रो. अमित अग्रवाल ने बताया कि नई तकनीक से थायरॉइड कैंसर या गांठ का इलाज अब आसान हो गया है। पीजीआई सहित विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में इंड्रोक्राइन सर्जरी विभाग में इसकी सर्जरी की जा रही है। ध्यान रखें कि छोटी सी गांठ भविष्य में कैंसर का रूप ले सकती है। 

‘नए विशेषज्ञ तैयार करने की लें जिम्मेदारी’
कार्यक्रम में पहुंचे पीजीआई निदेशक प्रो. राकेश कपूर ने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों की जिम्मेदारी है कि वे विशेषज्ञ तैयार करें। पीजीआई रोबोटिक सर्जरी के लिए तैयारी है। संस्थान में रोबोटिक सर्जरी के विशेषज्ञ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों से आए रोबोटिक सर्जन्स के ज्ञान से संस्थान की दक्षता मुकम्मल हो गई है। इस दौरान प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे ने कहा कि शासन की ओर से चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान चिकित्सा शिक्षा सचिव नर्लिकर ने भी संबोधित किया।
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