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Lucknow News: केजीएमयू में अगले सप्ताह से शुरू होगा रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण
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केजीएमयू।
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के हड्डी रोग विभाग में अगले सप्ताह से मरीजों को रोबोट के माध्यम से घुटना प्रत्यारोपण की सुविधा मिलेगी। इसके लिए फिलहाल कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। विभाग में प्रदेश सरकार से मिले अनुदान से करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से अमेरिका निर्मित रोबोट मंगाया गया है।
कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि केजीएमयू में पारंपरिक शल्य चिकित्सा के जरिये भी घुटना प्रत्यारोपण किया जाता है। इस पर करीब सवा लाख रुपये खर्च आता है। विभाग में हर महीने लगभग 70 से 80 मरीजों के घुटने बदले जाते हैं। रोबोटिक सर्जरी ज्यादा सुरक्षित और सटीक है। इससे मरीज जल्द ही चलने-फिरने लगते हैं। खून कम बहने से कमजोरी भी नहीं लगती। विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने बताया कि रोबोटिक शल्य चिकित्सा के लिए मरीज की स्थिति, हड्डी की बनावट और बीमारी की गंभीरता को देखकर ही निर्णय लिया जाएगा। जिन मरीजों को अधिक सटीकता की जरूरत होगी, उन्हीं का चयन इस तकनीक के लिए होगा।
फिलहाल केजीएमयू में थे दो रोबोट
हड्डी रोग विभाग से पहले केजीएमयू में दो रोबोट थे। इनमें से एक जनरल सर्जरी विभाग में देश में निर्मित रोबोट है। दूसरा रोबोट शताब्दी भवन में पीपीपी मॉडल पर है और सभी विभाग इसका साझा इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, फीस ज्यादा होने से मरीज इनमें कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इस समय इसकी फीस 53,100 से 1,08,810 रुपये तक है।
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कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि केजीएमयू में पारंपरिक शल्य चिकित्सा के जरिये भी घुटना प्रत्यारोपण किया जाता है। इस पर करीब सवा लाख रुपये खर्च आता है। विभाग में हर महीने लगभग 70 से 80 मरीजों के घुटने बदले जाते हैं। रोबोटिक सर्जरी ज्यादा सुरक्षित और सटीक है। इससे मरीज जल्द ही चलने-फिरने लगते हैं। खून कम बहने से कमजोरी भी नहीं लगती। विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने बताया कि रोबोटिक शल्य चिकित्सा के लिए मरीज की स्थिति, हड्डी की बनावट और बीमारी की गंभीरता को देखकर ही निर्णय लिया जाएगा। जिन मरीजों को अधिक सटीकता की जरूरत होगी, उन्हीं का चयन इस तकनीक के लिए होगा।
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फिलहाल केजीएमयू में थे दो रोबोट
हड्डी रोग विभाग से पहले केजीएमयू में दो रोबोट थे। इनमें से एक जनरल सर्जरी विभाग में देश में निर्मित रोबोट है। दूसरा रोबोट शताब्दी भवन में पीपीपी मॉडल पर है और सभी विभाग इसका साझा इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, फीस ज्यादा होने से मरीज इनमें कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इस समय इसकी फीस 53,100 से 1,08,810 रुपये तक है।
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