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ये है रोडवेज बसों की हालत, ...पहले धक्का लगाएं, फिर करें सफर
Mon, 07 Dec 2020 01:07 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 07 Dec 2020 01:07 PM IST
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ऐसे चलती है जलालाबाद डिपो की बस
- फोटो : अमर उजाला
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आपको रोडवेज बस से सफर करना है तो गंतव्य पर समय से पहुंचने के लिए घर से चार-पांच घंटे पहले ही निकलना होगा। इसकी वजह ये है कि रोडवेज की अधिकतर बसें निकलतीं तो समय से ही हैं, लेकिन रास्ते में ये कहां खड़ी हो जाएं, इसका भरोसा नहीं रह गया है।
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यही नहीं आपको बस में सफर करने से पहले उसमें धक्का भी लगाना पड़ सकता है, तभी वह स्टार्ट होगी। परिवहन निगम मुख्यालय स्तर पर मेंटेनेंस सामग्री की खरीद-फरोख्त में सुस्ती से यह समस्या आ रही है। इसके कारण प्रदेश भर की कार्यशाला चाहे वह डिपो की हो या फिर परिक्षेत्र की, उसमें रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले मेंटेनेंस उपकरण और नई बैटरी का अभाव है। कार्यशाला के कर्मचारी इन बसों को ठोक पीटकर कर चला रहे हैं। ऐसी बसों से दुर्घटना का भी डर बना रहता है।
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जलालाबाद डिपो में 20 बसें खस्ताहाल :
सहारनपुर क्षेत्र के जलालाबाद डिपो में 29 बसों में से 20 धक्का देकर र्स्टाट होती हैं। इन बसों में सफर से पहले यात्रियों को धक्का लगाना पड़ता है। इनकी बैटरी खराब है।
कार्यशाला में नहीं ये सामान
कार्यशाला के कर्मचारियों ने बताया कि टायर, बैटरी की प्रमुख कमी के साथ-साथ छोटे-छोटे कल पुर्जे एवं लुब्रिकेंट, कूलेंट नहीं हैं। इसके कारण वाहनों में तकनीकी दोष दूर नहीं हो पाते हैं। इससे आमदनी देने वाले मार्गों की बसें स्थगित हो रही हैं। साथ ही जुगाड़ का कार्य होने से दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
प्रबंधन लापरवाह, दंड पा रहे कर्मचारी
परिवहन निगम के अधिकतर डिपो में मेंटेनेंस के सामान की बहुत कमी है। इससे बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है और अफसर कार्यशाला के कर्मचारियों को दंड दे रहे हैं। जबकि प्रबंधन की लापरवाही के चलते सामान की खरीद नहीं हो रही है। - जसवंत सिंह, प्रांतीय महामंत्री सेंट्रल रीजनल वर्कशॉप कर्मचारी संघ, उप्र
डिपो में नई बैटरी नहीं
प्रदेश के डिपो में वर्तमान में नई बैटरी नहीं है। इसके कारण ही बसों में सेल्फ स्टार्टिंग सिस्टम चौपट हो गया है। मुख्यालय में नई बैटरी की खरीद करने की फाइल चल रही है। - जयदीप वर्मा, मुख्य प्रधान प्रबंधक (प्राविधिक) परिवहन निगम
कार्यशाला में नहीं ये सामान
कार्यशाला के कर्मचारियों ने बताया कि टायर, बैटरी की प्रमुख कमी के साथ-साथ छोटे-छोटे कल पुर्जे एवं लुब्रिकेंट, कूलेंट नहीं हैं। इसके कारण वाहनों में तकनीकी दोष दूर नहीं हो पाते हैं। इससे आमदनी देने वाले मार्गों की बसें स्थगित हो रही हैं। साथ ही जुगाड़ का कार्य होने से दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
प्रबंधन लापरवाह, दंड पा रहे कर्मचारी
परिवहन निगम के अधिकतर डिपो में मेंटेनेंस के सामान की बहुत कमी है। इससे बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है और अफसर कार्यशाला के कर्मचारियों को दंड दे रहे हैं। जबकि प्रबंधन की लापरवाही के चलते सामान की खरीद नहीं हो रही है। - जसवंत सिंह, प्रांतीय महामंत्री सेंट्रल रीजनल वर्कशॉप कर्मचारी संघ, उप्र
डिपो में नई बैटरी नहीं
प्रदेश के डिपो में वर्तमान में नई बैटरी नहीं है। इसके कारण ही बसों में सेल्फ स्टार्टिंग सिस्टम चौपट हो गया है। मुख्यालय में नई बैटरी की खरीद करने की फाइल चल रही है। - जयदीप वर्मा, मुख्य प्रधान प्रबंधक (प्राविधिक) परिवहन निगम