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45 सवारियां लेकर 50 की रफ्तार में जा रही बस का धुरा टूटा, पलटने से बची
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लखनऊ। राजधानी में सबसे ज्यादा कैसरबाग डिपो की कार्यशाला में लापरवाही बरती जा रही है। यह डिपो लखनऊ परिक्षेत्र का सर्वाधिक कमाई करने वाला डिपो है। इसके बावजूद यहां के फोरमैन व सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक की लापरवाही से सबसे ज्यादा इसी की बसें चलते-चलते रूट पर ब्रेकडाउन हो रही हैं। इसी डिपो की यूपी 33 टी 8779 नंबर की बस हरदोई के संडीला एवं बालामऊ के बीच बीते रविवार दोपहर पलटने से बची।
बस लगभग 50 किमी की रफ्तार से दौड़ रही थी। उसी वक्त गियर बॉक्स और पिछले पहिए के बीच सेतु का काम करने वाला धुरा (साफ्ट) टूट गया। इस हादसे से बस में सवार 45 यात्रियों में अफरातफरी मच गई। बस में सवार एक यात्री ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि साफ्ट टूटने के बाद बस के निचले हिस्से में टकराने लगा, जिससे बस तेजी से लहराने लगी। हालांकि, चालक ने सूझबूझ से इसे पलटने से बचा लिया। लखनऊ से हरदोई जा रही यह बस संडीला औद्योगिक क्षेत्र पार करने के बाद हादसे का शिकार हुई। सवारियों को एक घंटे तक दूसरी बसों का इंतजार करना पड़ा। संडीला की ओर से जो बसें आ रही थी, उनमें पहले से भीड़ थी।
चार दिन से खड़ी 35 हजार कमाने वाली बस
हैदरगढ़ डिपो में यूपी 77 एएन 1892 नंबर की बस चार दिन से कार्यशाला में खड़ी है। यह बस औसतन 35 हजार रुपये की रोजाना की कमाई कर रही थी। लेकिन एक टायर, क्लच एवं प्रेशर प्लेट की खराबी के कारण यह एक दिसंबर से कबाड़ की श्रेणी में हो गई। इस बस को रूट पर लाने के लिए महज 20 हजार रुपये का खर्च आएगा।
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एआरएम ने मुझे नहीं दी सूचना
क्षेत्रीय प्रबंधक लखनऊ परिक्षेत्र परिवहन निगम पीके बोस ने बताया कि बस का साफ्ट टूटने की सूचना मुझे नहीं दी गई। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब करेंगे। बसों के रखरखाव में जो अधिकारी एवं कर्मचारी लापरवाही बरतेंगे उन पर सख्त कार्रवाई होगी।
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बस लगभग 50 किमी की रफ्तार से दौड़ रही थी। उसी वक्त गियर बॉक्स और पिछले पहिए के बीच सेतु का काम करने वाला धुरा (साफ्ट) टूट गया। इस हादसे से बस में सवार 45 यात्रियों में अफरातफरी मच गई। बस में सवार एक यात्री ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि साफ्ट टूटने के बाद बस के निचले हिस्से में टकराने लगा, जिससे बस तेजी से लहराने लगी। हालांकि, चालक ने सूझबूझ से इसे पलटने से बचा लिया। लखनऊ से हरदोई जा रही यह बस संडीला औद्योगिक क्षेत्र पार करने के बाद हादसे का शिकार हुई। सवारियों को एक घंटे तक दूसरी बसों का इंतजार करना पड़ा। संडीला की ओर से जो बसें आ रही थी, उनमें पहले से भीड़ थी।
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चार दिन से खड़ी 35 हजार कमाने वाली बस
हैदरगढ़ डिपो में यूपी 77 एएन 1892 नंबर की बस चार दिन से कार्यशाला में खड़ी है। यह बस औसतन 35 हजार रुपये की रोजाना की कमाई कर रही थी। लेकिन एक टायर, क्लच एवं प्रेशर प्लेट की खराबी के कारण यह एक दिसंबर से कबाड़ की श्रेणी में हो गई। इस बस को रूट पर लाने के लिए महज 20 हजार रुपये का खर्च आएगा।
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एआरएम ने मुझे नहीं दी सूचना
क्षेत्रीय प्रबंधक लखनऊ परिक्षेत्र परिवहन निगम पीके बोस ने बताया कि बस का साफ्ट टूटने की सूचना मुझे नहीं दी गई। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब करेंगे। बसों के रखरखाव में जो अधिकारी एवं कर्मचारी लापरवाही बरतेंगे उन पर सख्त कार्रवाई होगी।