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दाखिले में हेराफेरी : निदेशक ने अपने कॉलेज में भी की दाखिले में धांधली, तीन अन्य कर्मचारियों को भी देंगे नोटिस
Tue, 22 Nov 2022 12:16 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 22 Nov 2022 12:16 AM IST
सार
आयुष कॉलेजों में दाखिले में हुई फेराफेरी मामले में गिरफ्तार किए गए निदेशालय के कर्मचारी राजेश सिंह और कैलाश भास्कर को अब मंगलवार को निलंबित किया जाएगा। देर शाम तक उन पर लगे आरोपों से संबंधित दस्तावेद निदेशालय को नहीं मिल पाए हैं।
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विस्तार
आयुष कॉलेजों में छात्रों के दाखिले में हुई हेराफेरी के मामले में नया खुलासा हुआ है। पड़ताल के दौरान एसटीएफ को पता चला है कि पूर्व में गिरफ्तार किए जा चुके आयुर्वेद निदेशक एसएन सिंह का भी एक कॉलेज संचालित था, जिसमें भी दाखिले में धांधली की जांच की जा रही है। वहीं एसटीएफ इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। एसटीएफ के सूत्रों ने बताया कि अगले एक दो दिनों में न्यायालय में रिमांड के लिए आवेदन किया जाएगा।
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एसटीएफ को पता चला है कि कौशांबी जिले में एसएन सिंह के पिता के नाम से चंद्रशेखर सिंह आयुर्वेदिक डिग्री कॉलेज संचालित किया जा रहा है। एसएन सिंह यहां 2018 से बतौर निदेशक तैनात हैं। वहीं वेंडर के रूप में कुलदीप सिंह वर्मा का भी बीते चार साल से निदेशालय में काउंसिलिंग में दखल रहा है। इसके अलावा उमाकांत यादव 2015 से निदेशालय में तैनात हैं। इन तीनों ने मिलकर बीते चार सालों में जमकर घपला किया है। पिछले कार्य के आधार पर ही एजेंसियों को काम दिया गया। इसके लिए कोई टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। एसटीएफ इसके भी साक्ष्य जुटा रही है।
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निजी में एक से दो लाख और सरकारी में तीन से पांच लाख में दाखिला
एसटीएफ की पड़ताल में पता चला है कि सरकारी कॉलेजों में दाखिले के लिए तीन से पांच लाख रुपये लिए जाते थे जबकि निजी कॉलेजों में दाखिले के लिए यह रेट एक से दो लाख रुपये था। इन पैसों का नीचे से लेकर ऊपर तक बंदरबांट किया जाता था।
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कागजों के इतजार में नहीं हो सका आयुष कर्मचारियों का निलंबन
आयुष कॉलेजों में दाखिले में हुई फेराफेरी मामले में गिरफ्तार किए गए निदेशालय के कर्मचारी राजेश सिंह और कैलाश भास्कर को अब मंगलवार को निलंबित किया जाएगा। देर शाम तक उन पर लगे आरोपों से संबंधित दस्तावेद निदेशालय को नहीं मिल पाए हैं। इनके निलंबन के बाद तीन अन्य कर्मचारियों को भी आरोप पत्र दिया जाएगा।
आयुष कॉलेजों में हुई हेराफेरी मामले में प्रो एसएन सिंह, प्रो उमाकांत को निलंबित किया जा चुका है। जबकि इन दोनों के साथ गिरफ्तार होने वाले लिपिक राजेश सिंह और कैलाश भास्कर की रिपोर्ट निदेशालय नहीं पहुंची है। ऐसे में गिरफ्तारी के तीन दिन बाद भी उन्हें निलंबित नहीं किया जा सकता है। निदेशक ने जेल से उनकेसंबंध में पत्र मांगा है। नियमानुसार गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर संबंधित कर्मी को निलंबित किया जाना चाहिए। अब इन दोनों को मंगलवार को निलंबित किया जाएगा। इसके बाद इन दोनों पर लगे आरोपों की पड़ताल की जाएगी। इन दोनों कर्मचारियों के साथ ही अन्य कर्मियों पर भी कार्रवाई होगी। इसमें डिस्पैच कार्यालय के रजिस्टर में कई तरह के बदलाव के मामले में कर्मचारियोंको चिन्हित किया जा रहा है।