शिक्षक भर्ती परीक्षा में अध्यापक खुद शून्य पर हो गए आउट, किसी के जीरो तो किसी का एक नंबर
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उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नौनिहालों की नींव मजबूत करने जा रहे तमाम बीएड बीटीसी अभ्यर्थी परीक्षा में फेल हो गए हैं। शिक्षक बनने के लिए हुई परीक्षा में कई अभ्यर्थी खाता भी नहीं खोल सके तो किसी को एक नंबर से ही संतोष करना पड़ा। अभ्यर्थियों ने उत्तर पुस्तिका जांच पर सवाल खड़ा करते हुए इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की है।
68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए 27 मई को आयोजित लिखित परीक्षा का परिणाम 13 अगस्त को जारी किया गया। इसमें 1,07,873 में से 41,556 अभ्यर्थी ही उत्तीर्ण हुए हैं। सामान्य और ओबीसी के लिए कट ऑफ 45 प्रतिशत और एससी एसटी के लिए 40 प्रतिशत रखी गई थी।
सोमवार को अभ्यर्थियों ने वेबसाइट पर जब अपना रिजल्ट देखा तो कई के होश उड़ गए। अभ्यर्थी सविता कुमार को 150 में से 1 तो जिरका अंसारी को शून्य मिला है। प्रदेश में हजारों ऐसे अभ्यर्थी हैं जिन्हें 0 से 10 के बीच नंबर मिले हैं।
रिजल्ट जारी करने की जल्दबाजी में गड़बड़ी का आरोप
उप्र दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में शून्य या एक अंक पाना चिंताजनक है। उन्होंने आशंका जताई कि रिजल्ट जारी करने की जल्दबाजी में उत्तर पुस्तिका जांचने में गड़बड़ की गई है।
उन्होंने कहा, विभाग ने न तो स्क्रूटनी का प्रावधान रखा है, न ही दोबारा कॉपी जांची जाएगी। ऐसे में उम्मीद के मुताबिक नंबर नहीं मिलने से हताश कुछ अभ्यर्थी उत्तर पुस्तिका जांच को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।