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दाल है कि गल ही नहीं रही
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Mon, 14 Oct 2013 10:45 AM IST
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महिला सशक्तीकरण के पैरोकार एक आईपीएस अफसर सत्ता के खासे करीब हैं लेकिन उनकी दाल है कि गल ही नहीं रही।
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सारे पैंतरे आजमाने के बाद अब आला अफसर चुप्पी मार कर बैठ गए हैं। जब सपा सरकार सत्ता में आई थी तो इन अधिकारी के आगे-पीछे कई आईपीएस अफसर मंडराने लगे थे।
सभी इस पहुंच वाले अफसर की आड़ में अपनी-अपनी रोटी सेंकने के चक्कर में थे। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीते, असलियत कुछ और निकली।
सामने आया कि अफसर तो सत्ताधारियों के नजदीक हैं पर इस बार किसी वजह से उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। खिसियाए आईपीएस यह असलियत अन्य अफसरों से भी नहीं बता पा रहे।
हालांकि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है। पिछले दिनों उन्होंने फिर से आकाओं के यहां अपनी आमदरफ्त बढ़ा दी है। उन्हें उम्मीद है कि शायद उनकी दाल इस बार गल जाए।
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