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Lucknow News: पीएचडी के लिए लोहिया विधि विवि में चयनित हुए कुलसचिव
Fri, 17 Oct 2025 12:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 17 Oct 2025 12:32 AM IST
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लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलसचिव गिरिजेश त्यागी का चयन अपने ही विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए हो गया है। विधि विश्वविद्यालय ने बृहस्पतिवार को पीएचडी प्रवेश परीक्षा का फाइनल रिजल्ट वेबसाइट पर जारी कर दिया। गिरिजेश त्यागी उच्च शिक्षा विभाग में विशेष सचिव पद पर भी तैनात हैं।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के अनुसार पीएचडी में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार की अनिवार्यता है। कुलसचिव के चयन के बाद विश्वविद्यालय के साथ ही सोशल मीडिया पर भी चर्चा का दौर शुरू हो गया। विवि के विज्ञापन में फुल टाइम पीएचडी का ही जिक्र किया गया है। फुल टाइम पीएचडी के लिए न्यूनतम तीन साल का अवकाश जरूरी है। पीएचडी में शीर्षक आवंटित होने से पहले शोधकर्ता को छह महीने का कोर्स वर्क भी करना होता है। इसमें 75 फीसदी उपस्थिति होने पर ही कोर्स वर्क की परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलती है। परीक्षा में पास होने पर ही शीर्षक का आवंटन होता है। इसके साथ ही नियोक्ता से अनापत्ति प्रमाणपत्र जमा करने के बाद ही दाखिला मान्य होता है।
कोट
विश्वविद्यालय से परामर्श लेकर ही आवेदन किया गया था। अगर मुझे प्रवेश मिलेगा तो ठीक नहीं मिलेगा तो कोई बात नहीं।
- गिरिजेश त्यागी कुलसचिव
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- एडमिशन से पहले एनओसी की मांग की जाएगी। अगर नहीं मिली तो प्रवेश नहीं लिया जाएगा।
- दिवाकर, संयुक्त कुलसचिव
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के अनुसार पीएचडी में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार की अनिवार्यता है। कुलसचिव के चयन के बाद विश्वविद्यालय के साथ ही सोशल मीडिया पर भी चर्चा का दौर शुरू हो गया। विवि के विज्ञापन में फुल टाइम पीएचडी का ही जिक्र किया गया है। फुल टाइम पीएचडी के लिए न्यूनतम तीन साल का अवकाश जरूरी है। पीएचडी में शीर्षक आवंटित होने से पहले शोधकर्ता को छह महीने का कोर्स वर्क भी करना होता है। इसमें 75 फीसदी उपस्थिति होने पर ही कोर्स वर्क की परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलती है। परीक्षा में पास होने पर ही शीर्षक का आवंटन होता है। इसके साथ ही नियोक्ता से अनापत्ति प्रमाणपत्र जमा करने के बाद ही दाखिला मान्य होता है।
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कोट
विश्वविद्यालय से परामर्श लेकर ही आवेदन किया गया था। अगर मुझे प्रवेश मिलेगा तो ठीक नहीं मिलेगा तो कोई बात नहीं।
- गिरिजेश त्यागी कुलसचिव
- एडमिशन से पहले एनओसी की मांग की जाएगी। अगर नहीं मिली तो प्रवेश नहीं लिया जाएगा।
- दिवाकर, संयुक्त कुलसचिव