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माल एवेन्यू पुल पर रेलवे का रेड सिग्नल

Tue, 13 Aug 2013 08:12 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 13 Aug 2013 08:12 AM IST
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red signal for mall avenue over bridge

हाईकोर्ट ने भले ही माल एवेन्यु रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे उपरिगामी सेतु को जनहित में माना हो लेकिन रेलवे ने इस पुल के डिजाइन पर आपत्ति जताई है।

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रेलवे का कहना है कि उसने जनरल एरेजमेंट डिजाइन (जीएडी) को मंजूरी नहीं दी है। इसके बावजूद सेतु निगम ने पुल की सइट पर निर्माण शुरू करा दिया।

अब रेलवे ने इस पर आपत्ति जताते हुए अपनी जमीन पर सेतु निगम द्वारा अब तक कराए गए अस्थायी निर्माण को ध्वस्त करने के लिए नोटिस जारी किया है।

माल एवेन्यू की रेलवे क्रॉसिंग (संख्या 214 पर 655) मीटर लम्बे पुल के निर्माण के लिए 51 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस पुल का क्रॉसिंग के ऊपर का हिस्सा रेलवे को बनाना है।
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सेतु निगम ने डीआरएम कार्यालय के इंजीनियरिंग अनुभाग को 25 जुलाई 2013 को जीडीए की मंजूरी के लिए फाइल भेज दी थी।

पिछले 18 दिनों में सेतु निगम के अधिकारियों ने जीडीए की मंजूरी के लिए डीआरएम को कई बार पत्र लिखे। इस बीच सेतु निगम ने आवास विकास परिषद की ओर वाले हिस्से पर पिलर डालकर पुल का स्लैब तक तैयार कर लिया।
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कैंट इलाके में सेतु निगम ने अपना अस्थायी साइट कार्यालय खोला है। रेलवे ने पुल बनाने के लिए जीएडी को मंजूरी तो यह मामला उत्तर रेलवे मुख्यालय पहुंच गया।

उत्तर रेलवे के मुख्य अभियंता ने छह अगस्त को डीआरएम को पत्र लिखकर माल एवेन्यू सहित लखनऊ मंडल के 12 पुलों के निर्माण के लिए जीएडी को मंजूरी न देने पर सख्त नाराजगी जतायी थी।

रेलवे ने अब माल एवेन्यू में बन रहे पुल के बिना जीएडी निर्माण कराने पर अपनी आपत्ति दर्ज करा दी। मंडल अभियंता प्रथम की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि सेतु निगम ने बिना जीएडी के निर्माण शुरू कर दिया है।


इससे क्रॉसिंग के ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन तार को भी खतरा हो सकता है। रेलवे ने सेतु निगम के अस्थायी कार्यालय सहित उसकी जमीन पर हुए सभी निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश भी दिए हैं।

हालांकि इस बारे में डीआरएम जगदीप राय से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठ सका।

भारी अनियमितता
मुख्य अभियंता ने यह भी कहा है कि लखनऊ मंडल में जीएडी और ईएसपी के अलावा महत्वपूर्ण डिजाइन को प्राप्त करने का कोई सिस्टम नहीं है।

एक बार डिजाइन खो जाने पर दोबारा इस प्रक्रिया को शुरू करना कठिन होता है। उन्होंने बताया कि लखनऊ मंडल में बहुत सी निर्माण गतिविधियां प्रगति पर हैं।

इनके जीएडी व ईएसपी को स्वीकृत करने के लिए नोडल अफसर की तैनाती की जाए। यह नोडल अफसर निर्माण इकाई के संपर्क में रहेगा। हर माह लंबित मामलों के लिए एक दिन निर्धारित किया जाना चाहिए।

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