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संकट में प्रदेश के होम्योपैथिक कॉलेज, संविदा शिक्षकों का नवीनीकरण रुका

Mon, 27 Jul 2020 12:37 PM IST
ishwar ashish अमित यादव, अमर उजाला, लखनऊ
अमित यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 27 Jul 2020 12:37 PM IST
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recognition of rajkiya homeopathic medical colleges in crisis
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों की मान्यता संकट में है। जिन संविदा शिक्षकों के भरोसे मेडिकल कॉलेजों के संचालन का दावा किया गया था, उसकी भर्ती में भ्रष्टाचार सामने आया है। जब इसकी शिकायत शासन स्तर पर हुई तो संविदा शिक्षकों के नवीनीकरण को रोक दिया गया।
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मामले में एक पूर्व निदेशक को हटाकर उनके खिलाफ जांच बैठाई गई है।  प्रदेश में इस समय अयोध्या, लखनऊ, प्रयागराज, आजमगढ़, गाजीपुर, कानपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ और गोरखपुर में राजकीय होम्योपैथिक मेेडिकल कॉलेज हैं। इनमें से अलीगढ़ और गोरखपुर को 2019-20 सत्र में ही प्रवेश की अनुमति केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद और आयुष मंत्रालय ने दी है।
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इन दोनों कॉलेजों में सौ-सौ सीटों पर प्रवेश की अनुमति तो ले ली गई, लेकिन यहां एक भी स्थायी शिक्षक की तैनाती नहीं की गई। दोनों कॉलेजों में एक-एक कार्यवाहक प्रधानाचार्य तैनात किया गया। अन्य राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों में भी मान्यता बचाने के लिए दो सौ से अधिक संविदा शिक्षकों की भर्ती की गई।
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पांच महीने से स्थायी निदेशक नहीं 

संविदा शिक्षकों की इसी भर्ती में मनमानी की गई। यही नहीं संविदा शिक्षकों का नवीनीकरण भी निदेशक ने कर दिया। इस मामले की शिकायत जब शासन स्तर पर की गई तो निदेशक होम्योपैथी को हटा दिया गया और उनके खिलाफ जांच भी बैठा दी गई। अलीगढ़ व गोरखपुर के मेडिकल कॉलेजों में एक भी संविदा शिक्षक नहीं है।

दोनों ही कॉलेजों में 2019 सत्र के लिए बीएचएमएस फर्स्ट प्रोफेशनल की कक्षाएं शुरू हुई थी। लेकिन वहां संविदा शिक्षक कई अन्य विषय के रख लिए गए थे। ऐसे में बिना जरूरत शिक्षक रखने से शासन को लाखों रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ा। इसकी शिकायत भी शासन स्तर पर की गई है। पूर्व निदेशक सहित निदेशालय के कई अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितता की जांच भी चल रही है।

होम्योपैथिक निदेशालय में पांच महीने से स्थायी निदेशक नहीं है। प्रो. वीके विमल को संविदा शिक्षक नियुक्ति मामले में हटाने के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच चल रही है। इसी बीच वे सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। उनकी जगह कानपुर मेडिकल कॉलजे से डॉ. आनंद चतुर्वेदी को कार्यवाहक निदेशक बनाया गया।

लेकिन उनका एक ऑडियो वायरल हो गया। इसमें कई बड़े लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है। इसके बाद उनको भी हटा दिया गया। शासन ने विशेष सचिव राजकमल यादव को निदेशक का कार्यभार दिया, लेकिन उनके खिलाफ चिकित्सकों ने मोर्चा खोल दिया। विशेष सचिव के हटने के बाद निदेशालय निदेशक विहीन है। इससे जरूरी कार्य ठप हैं। 

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