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अतीत का झरोखा: भगवती सिंह बोले- मुझे दरोगा नहीं बनना, बनाने वाला बनना है
Mon, 07 Feb 2022 11:55 AM IST
ishwar ashish
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 07 Feb 2022 11:55 AM IST
सार
पिता छुट्टी लेकर गांव आए और बेटे से कहा, चलो बेटा साहब ने तुम्हें बुलाया है। कहा है कि दरोगा बना देंगे। भगवती सिंह बोले, मुझे दरोगा नहीं बनना है, बल्कि संस्कार देकर ऐसे दरोगा बनवाना है जो लोगों पर शासन नहीं, बल्कि सेवा भाव से काम करें। पढ़ें रोचक किस्सा:
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भगवती सिंह।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
भगवती सिंह जिन्हें लोग मंत्रीजी के नाम से भी जानते एवं पुकारते थे, उनका जन्म लखनऊ के उत्तरधौना गांव में स्थित ननिहाल में हुआ था। पर, प्राथमिक शिक्षा बख्शी तालाब के पास पैतृक गांव अर्जुनपुर में हुई। मिडिल यानी कक्षा 6 से आगे की पढ़ाई मटियारी में हुई। उनके पिता पृथ्वीपाल सिंह पुलिस में सिपाही थे। वे सीतापुर में तैनात थे। भगवती सिंह के साथ लंबे समय तक बतौर सहयोगी रहे अजय सिंह बताते हैं, भगवती जी ने जब इंटर की परीक्षा पास की तो उनके पिता सीतापुर के तत्कालीन पुलिस कप्तान के पास मिठाई लेकर पहुंचे।
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उन्होंने पुलिस कप्तान के सामने मिठाई रखते हुए कहा, साहब! बेटे ने इंटर पास किया है, उसी की मिठाई है। कप्तान बोले, लड़के को मेरे पास लाओ, मैं उसे दरोगा बना दूंगा। पिता छुट्टी लेकर गांव आए और बेटे से कहा, चलो बेटा साहब ने तुम्हें बुलाया है। कहा है कि दरोगा बना देंगे। भगवती सिंह बोले, मुझे दरोगा नहीं बनना है, बल्कि संस्कार देकर ऐसे दरोगा बनवाना है जो लोगों पर शासन नहीं, बल्कि सेवा भाव से काम करें। संयोग से 1952 में संविधान लागू
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होने के बाद पहली बार चुनाव हो रहा था।
सोशलिस्ट पार्टी के नेता एवं कुम्हरावां निवासी रामसागर मिश्र महोना क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे थे। भगवती सिंह उनके पास पहुंचे और राजनीति में काम करने की इच्छा जताई। उन्हें सदस्य बना दिया गया। वे आजन्म समाजवादी धारा की सियासत में ही रहे। वह जब पहली बार मंत्री बने तो उनके पास पुलिस विभाग से सुरक्षा आई, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए उसे वापस कर दिया कि पुलिस का काम आम आदमी की सुरक्षा करना है न कि सिर्फ नेताओं की। इसके बाद भी वह अनेकों पदों पर रहे, लेकिन कभी पुलिस की सुरक्षा नहीं ली।
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