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Lucknow News: टीबी के खिलाफ जंग में भारतीय संस्था विश्व का प्रतिष्ठित कोचोन पुरस्कार
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रीच की निदेशक डॉ राम्या अनंतकृष्णन और डिप्टी डायरेक्टर अनुपमा श्रीनिवासन ने पुरस्कार प्राप्त क
टीबी के खिलाफ लड़ाई में मरीजों को सिर्फ दवाएं ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी सहारा देने की पहल को वैश्विक पहचान मिली है। चेन्नई की गैर-सरकारी संस्था रिसोर्स ग्रुप फॉर एजुकेशन एंड एडवोकेसी फॉर कम्युनिटी हेल्थ (रीच) को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित कोचोन पुरस्कार दिया गया है। यह सम्मान पाने वाली रीच भारत की पहली गैर-सरकारी और गैर-लाभकारी संस्था बन गई है।
इंडोनेशिया में पांच नवंबर को स्टॉप टीबी पार्टनरशिप की बोर्ड बैठक में यह पुरस्कार प्रदान किया गया। कोरिया की स्वतंत्र गैर-लाभकारी संस्था कोचोन फाउंडेशन और स्टॉप टीबी पार्टनरशिप की ओर से दिया जाने वाला यह पुरस्कार टीबी के खिलाफ उल्लेखनीय योगदान करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को दिया जाता है। इसे टीबी के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा समर्पित पुरस्कार माना जाता है।
रीच पिछले 27 वर्षों से टीबी प्रभावित लोगों की मदद कर रही है। संस्था ने मरीजों के इलाज के साथ उनकी सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक और मानसिक परेशानियों को भी अपनी कार्ययोजना में शामिल किया है। इसके लिए राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, निजी स्वास्थ्य सेवाओं, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और टीबी चैंपियंस के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
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संस्था की सह-संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. नलिनी कृष्णन के मुताबिक, टीबी के खिलाफ लड़ाई में केवल बीमारी का इलाज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीज की पूरी परिस्थिति को समझना जरूरी है। वहीं, संस्था की निदेशक डॉ. रम्या अनंतकृष्णन ने इस उपलब्धि का श्रेय सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, टीबी नानबंस, टीबी चैंपियंस और मरीजों के परिवारों को दिया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक रह चुकीं डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने रीच को इस पुरस्कार के लिए नामित किया था। उन्होंने संस्था के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था आंकड़ों से आगे बढ़कर मरीजों की वास्तविक जरूरतों को समझते हुए वैज्ञानिक तरीके से टीबी के खिलाफ काम कर रही है।
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इंडोनेशिया में पांच नवंबर को स्टॉप टीबी पार्टनरशिप की बोर्ड बैठक में यह पुरस्कार प्रदान किया गया। कोरिया की स्वतंत्र गैर-लाभकारी संस्था कोचोन फाउंडेशन और स्टॉप टीबी पार्टनरशिप की ओर से दिया जाने वाला यह पुरस्कार टीबी के खिलाफ उल्लेखनीय योगदान करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को दिया जाता है। इसे टीबी के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा समर्पित पुरस्कार माना जाता है।
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रीच पिछले 27 वर्षों से टीबी प्रभावित लोगों की मदद कर रही है। संस्था ने मरीजों के इलाज के साथ उनकी सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक और मानसिक परेशानियों को भी अपनी कार्ययोजना में शामिल किया है। इसके लिए राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, निजी स्वास्थ्य सेवाओं, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और टीबी चैंपियंस के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
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संस्था की सह-संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. नलिनी कृष्णन के मुताबिक, टीबी के खिलाफ लड़ाई में केवल बीमारी का इलाज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीज की पूरी परिस्थिति को समझना जरूरी है। वहीं, संस्था की निदेशक डॉ. रम्या अनंतकृष्णन ने इस उपलब्धि का श्रेय सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, टीबी नानबंस, टीबी चैंपियंस और मरीजों के परिवारों को दिया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक रह चुकीं डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने रीच को इस पुरस्कार के लिए नामित किया था। उन्होंने संस्था के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था आंकड़ों से आगे बढ़कर मरीजों की वास्तविक जरूरतों को समझते हुए वैज्ञानिक तरीके से टीबी के खिलाफ काम कर रही है।