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सर्जरी से ठीक किया किडनी कैंसर, 50 हजार में हुआ 1.5 लाख का इलाज
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 17 Oct 2016 12:06 PM IST
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लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने किडनी के एक बेहद खतरनाक कैंसर को सर्जरी से निकाल दिया। एग्रेसिव स्क्वैमस सेल रीनल कार्सिनोमा नामक यह कैंसर रेयर होता है।
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खास बात है कि जिस मरीज का ऑपरेशन किया गया उसकी निजी अस्पताल में सर्जरी करने की कोशिश की गई। पर जैसे ही वहां डॉक्टरों के समझ में आया उन्होंने सर्जरी बंद कर टांका लगा दिया।
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इसके बाद यह मरीज संस्थान लाया गया। यहां डॉक्टरों ने एग्रेसिव स्क्वैमस सेल रीनल कार्सिनोमा को डायग्नोज किया।
करीब चार घंटे की सर्जरी में डॉक्टरों ने कैंसर से प्रभावित बायीं किडनी, स्प्लीन और बड़ी आंत के प्रभावित हिस्से को काटकर बाहर निकाल दिया। अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। उसे रेडियो और कीमोथेरेपी की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
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1.5 लाख का इलाज हुआ 50 हजार में
डॉ. ईश्वर राम ध्याल
- फोटो : amar ujala
बाराबंकी के मो. यूसुफ (48) को पेट में असहनीय दर्द था। वह बाराबंकी में ही एक निजी संस्थान में गए। वहां डॉक्टरों ने बताया कि किडनी में पथरी है। 50 हजार रुपये ऑपरेशन के ले लिए गए।
डॉक्टरों ने 8 सेमी. का चीरा लगाकर जैसे ही पेट खोला उन्हें समझ में आ गया कि यह कुछ और है। आनन-फानन में यूसुफ को लोहिया संस्थान रेफर कर दिया गया। यूरोलॉजी विभाग के हेड डॉ. ईश्वर राम ध्याल के मुताबिक जांचों से बात साफ हो गई कि यूसुफ रेयर टाइप के कैंसर एग्रेसिव स्क्वैमस सेल रीनल कार्सिनोमा से जूझ रहा है।
डॉ. ध्याल के मुताबिक यूसुफ की तुरंत सर्जरी करनी मुश्किल थी। कैंसर बायीं किडनी के साथ ही रीढ़ की मांसपेशी, स्प्लीन, बड़ी आंत को भी चपेट में ले चुका था। ऐसे में कोई रिस्क नहीं लिया जा सकता था।
निजी अस्पताल की सर्जरी से रिकवर होने के बाद ही ऑपरेशन का प्लान किया गया। इसमें करीब 15 दिन का वक्त लग गया।
लोहिया संस्थान में ऑपरेशन के लिए मरीज को करीब 50 हजार रुपये खर्च करने। निजी सेंटर पर इस ट्यूमर को निकालने के लिए कम से कम डेढ़ लाख रुपये तक लग जाते हैं।
डॉक्टरों ने 8 सेमी. का चीरा लगाकर जैसे ही पेट खोला उन्हें समझ में आ गया कि यह कुछ और है। आनन-फानन में यूसुफ को लोहिया संस्थान रेफर कर दिया गया। यूरोलॉजी विभाग के हेड डॉ. ईश्वर राम ध्याल के मुताबिक जांचों से बात साफ हो गई कि यूसुफ रेयर टाइप के कैंसर एग्रेसिव स्क्वैमस सेल रीनल कार्सिनोमा से जूझ रहा है।
डॉ. ध्याल के मुताबिक यूसुफ की तुरंत सर्जरी करनी मुश्किल थी। कैंसर बायीं किडनी के साथ ही रीढ़ की मांसपेशी, स्प्लीन, बड़ी आंत को भी चपेट में ले चुका था। ऐसे में कोई रिस्क नहीं लिया जा सकता था।
निजी अस्पताल की सर्जरी से रिकवर होने के बाद ही ऑपरेशन का प्लान किया गया। इसमें करीब 15 दिन का वक्त लग गया।
लोहिया संस्थान में ऑपरेशन के लिए मरीज को करीब 50 हजार रुपये खर्च करने। निजी सेंटर पर इस ट्यूमर को निकालने के लिए कम से कम डेढ़ लाख रुपये तक लग जाते हैं।