राम मंदिर चढ़ावा चोरी: FIR से बचने के लिए नागपुर-दिल्ली के संपर्क में आए अनिल मिश्रा, मंदिर आने पर लगी पाबंदी
Ram Temple offerings stolen: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में अनिल मिश्रा को एसआईटी ने दोषी माना है। अब वह किसी भी तरह से इस बात में जुटे हैं कि उन पर एफआईआर न हो।
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एसआईटी जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को दोषी बनाए जाने के बाद उनको आरोपी बनाए जाने पर पुलिस मंथन कर रही है। उधर, अनिल मिश्रा लखनऊ, दिल्ली से लेकर नागपुर तक दरवाजा खटखटा रहे हैं, ताकि किसी तरह से एफआईआर में नाम शामिल न हो। हालांकि पुलिस अब तक सिर्फ उनसे पूछताछ ही कर सकी है। आरोपी बनाएगी या नहीं, इसको लेकर स्पष्ट नहीं किया है। इसको लेकर अधिकारी बयान भी नहीं दे रहे हैं।
ट्रस्टी व वर्तमान अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की तहरीर पर आठ नामजद आरोपी बनाए थे। अन्य अज्ञात थे। पुलिस ने अब तक अज्ञात में किसी का नाम शामिल नहीं किया। हालांकि कई बैंक कर्मी, गणनाकर्मी व ट्रस्ट के पदाधिकारी भी संदिग्धता के घेरे में हैं। एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को दोषी बनाया गया था। जिसमें सभी तथ्यों का भी जिक्र किया गया था।
खासकर गणना को लेकर बनाए गए नियम शिथिल करने में उनकी भूमिका थी। इसलिए अंदेशा है कि उनको साजिश का आरोपी बनाया जा सकता है। जब से यह बात सामने आई है, तब से अनिल मिश्रा बेचैन हैं। सूत्र बताते हैं कि ट्रस्ट के कई पदाधिकारियों से लेकर संघ व विहिप के पदाधिकारियों से उन्होंने संपर्क किया है। जिससे किसी तरह से वह एफआईआर में शामिल न हों। वह सफाई दे रहे हैं कि इस्तीफा तो दे ही दिया, अपराध में भूमिका नहीं है। फिलहाल पुलिस की विवेचना आगे बढ़ने पर ही पता चल पाएगा कि अनिल का नाम एफआईआर में शामिल होगा कि नहीं।
खुद को पूरी तरह कर लिया है अलग
जब से इस्तीफा स्वीकार हुआ, तब से अनिल मिश्रा मंदिर नहीं गए हैं। ट्रस्ट के ऑफिस जाने का सवाल ही नहीं उठता है। उनका सार्वजनिक तौर पर कोई बयान भी नहीं आया है। एक तरह से उन्होंने खुद अलग कर लिया है। वहीं, कुछ यही हाल चंपत राय का है। वह भी कोई बयान नहीं दे रहे हैं। एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं।
व्हाट्सएप मैसेज का स्क्रीनशॉट वायरल
मंदिर प्रबंधन से पूर्व सैनिक भी जुड़े हैं। जिनका एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बना हुआ है। उसका एक स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। जिसमें एक मैसेज सात जून को डाला गया है। मैसेज में लिखा है कि.. सभी पूर्व सैनिक ध्यान दें, मंदिर पर हो रही गतिविधि की चर्चा किसी के साथ नहीं करना है। यदि कोई कुछ पूछता है तो केवल एक ही जवाब दें कि मंदिर पर कार्य हम कर रहे हैं, लेकिन हमें कोई जानकारी नहीं है। इसी मैसेज में चंपत राय का वह वीडियो बयान भी लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वर्तमान में ऑडिट का काम चल रहा है, कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई है।