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राम मंदिर चंदा विवाद: सरकार ने लिया सख्त एक्शन, जांच के लिए गठित की गई एसआईटी; ये अधिकारी करेंगे जांच

Sun, 14 Jun 2026 08:42 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 14 Jun 2026 08:42 AM IST
सार

Ram Temple donation controversy: राम मंदिर ट्रस्ट के द्वारा चंदा गबन मामले की जांच एअआईटी से कराने का अनुरोध राज्य सरकार ने स्वीकार्य कर लिया है।
 

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Ram Temple donation controversy: Government takes strict action, SIT formed to investigate
सरकार ने लिया एक्शन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीराम मंदिर के चंदे की राशि में गबन के मामले को अब शासन ने संज्ञान में लिया है। शासन ने शनिवार को तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है। एसआईटी में विशेष सचिव वित्त, मंडलायुक्त लखनऊ व आईजी रेंज लखनऊ शामिल हैं। एसआईटी पहले सात दिन में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेगी और 15 दिन बाद फाइनल रिपोर्ट देगी।

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करीब एक सप्ताह पहले चंदे की राशि में गबन करने का मामला सामने आया था। तब से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट गोपनीय तरीके से जांच कर रही है। आधिकारिक तौर पर पुलिस का हस्ताक्षेप नहीं है। लेकिन पुलिस की मदद से ट्रस्ट के पदाधिकारी संदिग्धों से पूछताछ कर रकम की रिकवरी में जुटे हैं। अब ट्रस्ट ने कोई बयान आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया है। इस बीच शनिवार को ट्रस्ट की तरफ से मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच एसआईटी से करवाने की मांग की थी। देर शाम शासन ने एसआईटी गठित कर दी। जिसमें विशेष सचिव वित्त नील रतन, मंडलयुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत और आईजी रेंज लखनऊ आईपीएस किरन एस शामिल हैं।
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कल आ सकती है एसआईटी

एसआईटी को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सात दिन में शासन को सौंपना है। इसलिए जांच तेजी से होगी। रविवार को एसआईटी अयोध्या आ सकती है। एसआईटी पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ कर अब तक जुटाए गए साक्ष्यों को भी कब्जे में लेगी। वहीं ट्रस्ट के जिम्मेदारों से भी मामले की जानकारी हासिल करेगी। उसी आधार पर आगे की जांच एसआईटी करेगी।
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जानें अभी तक इस पर क्या हुआ?

बताते चलें कि राम मंदिर के दानपात्र से धन गबन के आरोप में रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव में छापेमारी कर 10 से 12 लाख रुपये बरामद किए गए। कार्रवाई राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में की गई। बरामदगी आरोपी लवकुश मिश्रा के घर से हुई, जो मंदिर में कर्मी के रूप में कार्यरत रहा है।

लवकुश के पिता बच्चूलाल ने बताया कि ट्रस्ट के तीन-चार लोग उनके घर पहुंचे और ताला तोड़कर नकदी अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा कि उन्हें इस धन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी क्योंकि वे गाजियाबाद में रह रहे थे। 

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फैजाबाद में बन रहे मकान का उनके बेटे से कोई संबंध नहीं है और मकान निर्माण के लिए उन्होंने 10-12 बीघा खेत गिरवी रखा है। ग्रामीणों के अनुसार, लवकुश पहले कार मिस्त्री था और मंदिर में नौकरी मिलने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बदली थी। वहीं गांव में यह भी चर्चा है कि कुछ रुपये घूर में छिपाकर रखे गए थे, जिन्हें पुलिस ने बरामद किया है।

लवकुश राम मंदिर में कर्मी के तौर पर कार्यरत रहा

आरोपी युवक लवकुश मिश्रा (27 वर्ष) राम मंदिर में कर्मी के तौर पर कार्यरत रहा। उस पर दानपात्र के चढ़ावे के पैसे का गबन करने का आरोप है। लवकुश के पिता बच्चूलाल ने बताया कि राम मंदिर से चंपत राय सहित तीन-चार लोग उनके घर आए थे। 

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फैजाबाद में बन रहे मकान का उनके बेटे से कोई संबंध नहीं है। यह मकान उन्होंने अपनी जमीन गिरवी रखकर बनवाया है। मेरा लड़का पिछले 5-6 महीने से राम मंदिर में काम कर रहा था। उसे वहां रवि मिश्रा ने काम पर लगवाया था। 

रवि मिश्रा हमारे समधी हैं। फैजाबाद में जिस मकान का निर्माण हो रहा है, उसके लिए हमने बहुत पहले जमीन खरीद ली थी। उस जमीन और मकान से मेरे लड़के का कोई लेना-देना नहीं है। मैं करीब 10-12 बीघा खेत गिरवी रखकर मकान बनवा रहा हूं। मेरा लड़का जो पैसा राम मंदिर से लेकर आया था, उसे जो लोग यहां आए थे, वे अपने साथ लेकर चले गए। अब उससे हमारा कोई मतलब नहीं है।

दान प्रकरण पर चुप रहे नृपेंद्र मिश्र, बोले- मैं केवल निर्माण कार्य देखता हूं

 राम मंदिर के दानपात्र से धन गबन प्रकरण की जांच के बीच शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। उनके दौरे पर सबकी निगाहें दान विवाद को लेकर संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी थीं, लेकिन उन्होंने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से साफ इन्कार कर दिया।

महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में जब उनसे दान गड़बड़ी प्रकरण को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, “मैं केवल निर्माण कार्य देखता हूं और कुछ नहीं।” इसके बाद उन्होंने दान प्रकरण से जुड़े किसी भी अन्य सवाल का जवाब नहीं दिया। नृपेंद्र मिश्र का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राम मंदिर में दान राशि के गबन को लेकर ट्रस्ट और पुलिस स्तर पर जांच चल रही है तथा मामले में कई कर्मचारियों से पूछताछ और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

 दूसरी ओर, अयोध्या प्रवास के दौरान नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर परिसर में चल रही विभिन्न निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से बनाई जा रही बाउंड्री वॉल, ट्रस्ट कार्यालय, श्रद्धालु विश्रामालय, शंकराचार्य द्वार और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र, गोपाल राव, आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा समेत अन्य मौजूद रहे।

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