नाईक ने संभाला यूपी राज्यपाल का पदभार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा के वरिष्ठ नेता रह चुके राम नाईक ने मंगलवार को यूपी के राज्यपाल का पदभार संभाल लिया है।
यहां राजभवन के गांधी सभागार में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. डी.वाई. चंद्रचूड ने राज्यपाल पद की शपथ दिलाई। नाईक प्रदेश के 28वें राज्यपाल हैं।
शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य रूप में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय समेत अखिलेश मंत्रिमंडल के कई मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
सबके लिए खुले हैं राजभवन के दरवाजे
सूबे के नए राज्यपाल राम नाईक ने आम लोगों के लिए राजभवन के दरवाजे खुले रखने का ऐलान किया है।
उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी जिससे लोग उनसे मिल सकें। नाईक ने कहा कि वे संविधान की किताब सामने रखकर काम करेंगे और उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने में अपना योगदान देंगे।
बतौर कुलाधिपति विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का स्तर सुधारने पर भी उनका ध्यान होगा।
प्रदेश के राज्यपाल का पदभार संभालने के बाद पत्रकारों से बातचीत में नाईक ने कहा कि वे प्रशासनिक कार्य से दूर रहेंगे। यह काम जनप्रतिनिधियों का है और उन्हें ही करना चाहिए।
हां, प्रदेश और लोगों की समस्याएं समझने के लिए वे जनसंपर्क जरूर करेंगे। इस दौरान जो भी बातें सामने आएंगी, उन्हें केंद्र या राज्य सरकार जहां पहुंचाना जरूरी होगा, पहुंचाएंगे।
मराठी का स्वागत करें उत्तर भारतीय
मुंबई में उत्तर भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाओं के सवाल पर नाईक ने कहा कि वास्तव में उतना होता नहीं है जितना प्रचार किया जाता है।
राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का हाथ इसमें रहता है लेकिन अब उसका प्रभाव भी कम हुआ है। नाईक ने कहा, जिस संसदीय क्षेत्र से मैं चुना जाता रहा हूं, वहां 25-30 फीसदी उत्तर भारतीय हैं। मैं भाषा के आधार पर भेदभाव में विश्वास नहीं करता।
भाषा विचारों के साथ लोगों को जोड़ने का माध्यम है। मैं मराठी हूं, शपथ ग्रहण कराने वाले हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी मराठी हैं, फिर अपनी प्रमुख सचिव जूथिका पाटणकर का नाम लेते हुए कहा कि संयोग से ये भी मराठी ही हैं। मराठी का स्वागत करें उत्तर भारतीय। हम सब मिलकर काम करेंगे।
कुरैशी पर टिप्पणी नहीं
पूर्ववर्ती डॉ. अजीज कुरैशी द्वारा रेप को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान को लेकर हुए सवाल पर नाईक ने कहा कि जिसने कहा उसी से पूछो।
रामपुर के मौलाना मोहम्मद अली जौहर विवि को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने संबंधी विधेयक को मंजूरी देने के डॉ. कुरैशी के निर्णय पर पुनर्विचार के सवाल पर नाईक ने कहा कि नई सरकार तो पिछली सरकार के एक महीने या कुछ और अवधि के फैसलों की समीक्षा कर सकती है लेकिन राज्यपाल के मामले में ऐसा नहीं है।
विधेयक को मंजूरी मिलते ही कानून बन गया। यह गलत है या सही, इसे तय करने का अधिकार अब केवल न्यायपालिका को है।
अखिलेश व मुलायम ने फोन करके दी थी बधाई
नाईक ने राज्य सरकार के साथ बेहतर तालमेल बनाकर चलने का संकेत देते हुए कहा कि जब उन्हें प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और नेताजी (मुलायम सिंह यादव) ने उन्हें फोन करके बधाई दी थी। नाइक ने कहा कि नेताजी उनके साथ संसद में रह चुके हैं।
राम नाईक ने यूपी का राज्यपाल बनाए जाने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। राज्यपाल के रूप में काम शुरू करने से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री, न्यायपालिका, मंत्रियों, पार्टियों के नेताओं, सांसदों, विधायकों और जनता का अभिवादन भी किया।