चरित्रहीनता देश की सबसे बड़ी समस्या : राम नाईक
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यह विचार राज्यपाल राम नाईक ने व्यक्त किए, वे बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 130वीं जयंती के अवसर पर बोल रहे थे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल सोसाइटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत का दर्जा इन्होंने ही दिलवाया।
संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में जब उनके सामने वंदे मातरम् व जन-गण-मन अधिनायक में से किसी एक को राष्ट्र के लिए चुनने का प्रस्ताव आया तो उन्होंने दोनों का सम्मान रखा। वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत व जन-गण-मन अधिनायक को राष्ट्रगीत का दर्जा दिलवाया।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने कहा कि लोकसभा में केरल के एक संसदीय क्षेत्र के सदस्य ने सवाल उठाया कि राष्ट्रगान देश के सभी स्कूलों में क्यों नहीं गाया जाता, इस पर सत्ता पक्ष ने जवाब दिया कि हां, यह सच है, कारण पूछा गया तो बताया गया कि उपेक्षा के कारण, फिर सरकार इस पर निर्देश देगी, यह बताया गया।
लोहिया ने की थी राजेंद्र प्रसाद की आलोचना
राज्यपाल राम नाईक ने खुशी जताते हुए कहा कि यह घटना वर्ष 1991 की है और उस समय बतौर लोकसभा सदस्य उन्होंने फिर सवाल किया और पूरी तैयारी के साथ प्रथम राष्ट्रपति ने किस तरह राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान को लेकर समन्वय अपनाया।
इसके बाद दोनों सदनों में सत्रारंभ व सत्रावसान में राष्ट्रगीत व राष्ट्र्रगान गाने की परंपरा शुरू की। कार्यक्रम में यूपी विधानसभा के अध्यक्ष माता प्रसाद ने कहा कि प्रथम राष्ट्रपति की सादगी से सभी को सीख लेनी चाहिए। हिंदू कोड बिल का उन्होंने विरोध किया।
उन्होंने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद की समाजवादी विचारधारा के पोषक डॉ. राम मनोहर लोहिया ने आलोचना भी की लेकिन वे कभी घबराए नहीं। कार्यक्रम में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के कुलपति प्रो. रविकांत ने कहा कि विद्यार्थियों को चाहिए कि वे डॉ. राजेंद्र प्रसाद के जीवन से सीखें।
वे पढ़ाई में काफी अच्छे थे और हर अच्छे काम के लिए संतुलन के साथ समझौता किया। कार्यक्रम में एलयू के कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने यूनिवर्सिटी में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर शोध पीठ बनाने की घोषणा की। इसके लिए वे यूजीसी से पांच करोड़ रुपये की ग्रांट लेकर आएंगे।
अब तो संतों की वाणी में भी संयम नहीं रहा
वहीं, दीन दयाल उपाध्याय, आचार्य नरेंद्र देव सहित अन्य महापुरुषों के नाम पर शोध भी पीठ बनेगी। इसमें टीचर्स प्रोजेक्ट लाएंगे और स्टूडेंट रिसर्च करेंगे। कार्यक्रम में राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल सोसाइटी के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री नरेश चंद्रा ने घोषणा पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि सोसाइटी पल्स पोलियो व बेटी बचाओ अभियान चला रही है। जल्द ही राजेंद्र बाबू के नाम पर पत्रकारिता संस्थान स्थापित किया जाएगा।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि देश में अब तो संतों की वाणी में भी संयम नहीं रहा। वे कुछ भी बोल जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने अत्यंत सरल, सात्विक और अनुशासन प्रिय जीवन जिया, हम उन्हें राजनीतिक संत कहते हैं।
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि यहां विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद मौजूद हैं, वे जानते हैं कि किस तरह विधानसभा की कार्रवाई के दौरान नारेबाजी व हंगामा खूब होता है। कई बार तो मारपीट तक की नौबत आती है लेकिन पहले के जमाने में विधानसभा हो या लोकसभा हर जगह स्वस्थ डिबेट होती थी।