यूपी: कैराना पर संतों की रिपोर्ट पर राज्यपाल ने उठाए गंभीर सवाल
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कैराना से पलायन मामले की जांच के लिए गए संतों के दल ने शुक्रवार को राज्यपाल राम नाईक से मिलकर उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंपी। संतों ने जैसे ही सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट थमाई, नाईक तपाक से बोले, मैंने आज के समाचार पत्रों में रिपोर्ट के अंश देख लिए हैं। इसे गोपनीय रिपोर्ट बताया जा रहा है तो यह लीक कैसे हुई?
संतों के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राज्यपाल को सफाई दी कि बृहस्पतिवार को उन्होंने रिपोर्ट मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सौंपी थी लेकिन मीडिया के साथ इसे साझा नहीं किया था। इस सफाई से राज्यपाल संतुष्ट नहीं दिखे।
उन्होंने जानना चाहा कि जब मुख्यमंत्री को सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपी गई तो उसके अंश मीडिया को कैसे पता लगे? स्थानीय जनप्रतिनिधियों का पक्ष लिए बगैर तैयार की गई रिपोर्ट को लेकर राज्यपाल ने कई सवाल भी दागे।
आचार्य प्रमोद कृष्णम के नेतृत्व में हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि, महामंडलेश्वर स्वामी देवेंद्रानंद गिरि, स्वामी कल्याण देव तथा स्वामी चिन्मयानंद ने राजभवन में राज्यपाल से मिलकर उन्हें कैराना मामले की रिपोर्ट सौंपी।
नहीं लिया जनप्रतिनिधियों का पक्ष
संतों ने राज्यपाल को बताया कि उन्होंने कैराना के लोगों से मिलकर पलायन के मामले पर जानकारी ली और उसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। इस पर राज्यपाल ने सवाल किया कि क्या रिपोर्ट में राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई क्योंकि इसमें एक सांसद, दो विधायक समेत कई जनप्रतिनिधियों को सीधे दोषी ठहराया गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि उनकी न तो किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल या जनप्रतिनिधि से मुलाकात हुई और न ही उनसे इस प्रकरण के बारे में कोई जानकारी प्राप्त की गई है।
इस पर राज्यपाल ने कहा कि जिन्हें कठघरे में खड़ा किया जा रहा है, उनका पक्ष लिए बिना एकतरफा निष्कर्ष निकाल लिया जाना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। कम से कम स्थानीय सांसद, विधायकों, नगर पालिका के चेयरमैन व अन्य प्रमुख लोगों का भी पक्ष समिति को जानना चाहिए था।
संतों की समिति सरकार ने बनाई या सपा ने
राज्यपाल ने यह भी जानना चाहा कि संतों की जांच समिति सरकार ने बनाई है या सपा ने? राज्यपाल का कहना था कि जब सरकार ने पहले ही प्रशासन की एक जांच समिति गठित कर दी थी तो दूसरी जांच समिति बनाने का क्या औचित्य है?
प्रदेश में दंगा करवाना चाहती थी भाजपा
गौरतलब है कि संतों के दल ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव से मिलकर कैराना मामले की रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें कहा गया है कि कैराना की आड़ में भाजपा की प्रदेश में दंगा कराने की साजिश थी।
भाजपा नेता गुंडागर्दी की समस्या को सांप्रदायिक रंग देकर माहौल खराब करना चाहते थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले दस वर्षों में दो-ढाई सौ हिंदू और 160 मुस्लिम परिवारों ने कैराना छोड़ा है। इसकी प्रमुख वजह शिक्षा, रोजगार और व्यवसाय है।
पिछले दस वर्षों में 170 हिंदू परिवार कैराना आकर बसे भी हैं। संतों ने माहौल बिगाड़ने के लिए सांसद हुकुम सिंह, विधायक नाहिद हसन, संगीत सोम और साध्वी प्राची समेत एक दर्जन लोगों को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है।